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डायरिया का प्रकोप, रोज आ रहे 200 मरीज
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2016 11:51 PM IST
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डायरिया
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं ढुलमुल
संक्रामक रोगों से जा चुकी है चार लोगों की जान
तापमान बढ़ने के साथ संक्रामक रोगों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। खासकर पूरे जिले में डायरिया का भयंकर प्रकोप है। अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। लगभग 200 मरीज रोज आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। इसके बावजूद सेहत महकमा सब कुछ ओके होने का दावा करता नजर आ रहा है।
पिछले साल अलापुर क्षेत्र के गांव उपरैला में संक्रामक रोगों से 108 लोगों की मौत हुई थी। संक्रामक रोगों से मौतों पर शासन तक हिल गया था। शासन की टीम ने गांव का दौरा किया था। इस साल भी संक्रामक रोगों का सीजन शुरू हो गया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक इससे निपटने के लिए मुकम्मल इंतजाम नहीं किए है। तमाम सीएचसी और पीएचसी पर स्टाफ के साथ दवाओं की भी किल्लत है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो डायरिया के रोगियों में 25 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। रोज 200 से ज्यादा मरीज सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। निजी अस्पताल और क्लीनिक भी मरीजों से भरे हुए हैं।
डायरिया के लक्षण एवं पहचान
1. 24 घंटे में चार से अधिक पतले दस्त होना।
2. पानी की कमी, मुंह सूखना, प्यास अधिक लगना।
3. शरीर में एकदम से कमजोरी आना
4. त्वचा में रूखापन आ जाना।
डायरिया होने के कारण
1. दूषित पानी पीने से होता है।
2. बैक्टीरिया संक्रमण के वजह से होता है।
3. वायरल संक्रमण की वजह से होते है।
4. बासी एवं दूषित भोजन खाने से होता है।
डायरिया से बचाव
1. साफ एवं स्वच्छ पानी पीएं।
2. दस्त अधिक होने पर अस्पताल में तुरंत दिखाएं।
3. ओआरएस का घोल तुरंत पिलाएं।
4. बच्चों को ओआरएस के जिंक की टैबलेट दें।
-----
संक्रामक रोगों से निपटने की सभी तैयारियां कर ली गई हैं। टीमें गठित कर दी गई है। फिलहाल जिले में स्थिति सामान्य है। मई के पहले सप्ताह में इतने मरीज मिलना सामान्य बात है। फिर भी पूरे जिले में निगरानी की जा रही है।
विज्ञापन
-डॉ. कौशल गुप्ता, प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण सेल
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संक्रामक रोगों से जा चुकी है चार लोगों की जान
तापमान बढ़ने के साथ संक्रामक रोगों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। खासकर पूरे जिले में डायरिया का भयंकर प्रकोप है। अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। लगभग 200 मरीज रोज आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। इसके बावजूद सेहत महकमा सब कुछ ओके होने का दावा करता नजर आ रहा है।
पिछले साल अलापुर क्षेत्र के गांव उपरैला में संक्रामक रोगों से 108 लोगों की मौत हुई थी। संक्रामक रोगों से मौतों पर शासन तक हिल गया था। शासन की टीम ने गांव का दौरा किया था। इस साल भी संक्रामक रोगों का सीजन शुरू हो गया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक इससे निपटने के लिए मुकम्मल इंतजाम नहीं किए है। तमाम सीएचसी और पीएचसी पर स्टाफ के साथ दवाओं की भी किल्लत है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो डायरिया के रोगियों में 25 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। रोज 200 से ज्यादा मरीज सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। निजी अस्पताल और क्लीनिक भी मरीजों से भरे हुए हैं।
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डायरिया के लक्षण एवं पहचान
1. 24 घंटे में चार से अधिक पतले दस्त होना।
2. पानी की कमी, मुंह सूखना, प्यास अधिक लगना।
3. शरीर में एकदम से कमजोरी आना
4. त्वचा में रूखापन आ जाना।
डायरिया होने के कारण
1. दूषित पानी पीने से होता है।
2. बैक्टीरिया संक्रमण के वजह से होता है।
3. वायरल संक्रमण की वजह से होते है।
4. बासी एवं दूषित भोजन खाने से होता है।
डायरिया से बचाव
1. साफ एवं स्वच्छ पानी पीएं।
2. दस्त अधिक होने पर अस्पताल में तुरंत दिखाएं।
3. ओआरएस का घोल तुरंत पिलाएं।
4. बच्चों को ओआरएस के जिंक की टैबलेट दें।
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संक्रामक रोगों से निपटने की सभी तैयारियां कर ली गई हैं। टीमें गठित कर दी गई है। फिलहाल जिले में स्थिति सामान्य है। मई के पहले सप्ताह में इतने मरीज मिलना सामान्य बात है। फिर भी पूरे जिले में निगरानी की जा रही है।
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-डॉ. कौशल गुप्ता, प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण सेल