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ग्रामीण इलाकों में मच्छरों का प्रकोप...फिर जानलेवा होगा मलेरिया

Sat, 20 Mar 2021 12:38 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 20 Mar 2021 12:38 AM IST
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Outbreak of mosquitoes in rural areas ... Malaria will be fatal again
बदायूं। बदलते मौसम से ग्रामीण इलाकों में मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है। इनसे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग कतई गंभीर नहीं है और न ही ग्राम पंचायत समितियां इस पर ध्यान दे रहीं हैं। सफाई व्यवस्था से लेकर दवा का छिड़काव तक कागजों में हो रहा है। इससे लगातार मच्छरों की संख्या बढ़ती जा रही है। शाम होते ही मच्छरों के झुंड लोगों पर हमला कर देते हैं। इससे लोगों का खुले में बैठना तक मुनासिब नहीं है। यही हाल रहा तो फिर जिले में मलेरिया फैलेगा और उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा।
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केंद्र और प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई से लेकर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के तमाम प्रयास कर रही हैं। प्रत्येक क्षेत्र में सफाई रहे, कहीं बीमारी न फैले, इसके लिए करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है। हर गांव में सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं। आशा, आंगनबाड़ी से लेकर एएनएम को स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी दी गई है। सभी ग्राम पंचायतों में दवा का छिड़काव और बीमारी की रोकथाम के लिए दस-दस हजार रुपये का बजट आता है लेकिन हैरानी की बात है कि कई साल से ग्रामीण इलाकों में दवा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा। ग्राम प्रधान से लेकर जिम्मेदार तक सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।
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हैरत की बात ये है कि जिला प्रशासन भी इस पर कोई गौर नहीं दे रहा। जब किसी इलाके में मलेरिया या बीमारियां फैलती हैं तब स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन की नींद टूटती है। विभागीय अधिकारियों की इसी लापरवाही से जिले के कई इलाके संवेदनशील घोषित हो चुके हैं। तमाम लोग अपनी जान गवां चुके हैं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था और मच्छरों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे जिले में डेंगू, मलेरिया, टाईफाइड, डायरिया आदि बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। कौन से इलाके में कब क्या हो जाए, ये नहीं कहा जा सकता।
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संवेदनशील घोषित हैं जिले के पांच ब्लॉक
- ग्रामीण इलाकों में सफाई व्यवस्था सबसे ज्यादा खराब है। रोजाना गांव में झाड़ू नहीं लगती। नालियां साफ नहीं होतीं। नतीजा ग्रामीण इलाकों में बीमारियां फैलती हैं। इसके चलते दातागंज, समरेर, जगत, सालारपुर और म्याऊं संवेदनशील घोषित हो चुके हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है।
दो साल पहले मलेरिया से मरे थे साढ़े तीन सौ लोग
- करीब दो साल पहले जिले में मलेरिया फैला था। तब रोज पंद्रह-बीस लोगों की मौत हो रही थी। उस समय मलेरिया कोरोना से ज्यादा खतरनाक स्थिति में था। करीब डेढ़ सौ लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग जागा था। तब बरेली और लखनऊ से टीमें आईं। मामले की जांच शुरू की गई। बीमारी की रोकथाम को टीमें लगाईं। इसके बावजूद मरने वालों की संख्या साढ़े तीन सौ पहुंच गई। जबकि स्वास्थ्य विभाग मरने वालों का आंकड़ा कम बताने में लगा रहा।

इस समय मैं छुट्टी पर आया हूं। जिले में मलेरिया रोकथाम के लिए एक अभियान दस्तक चल रहा है। संक्रामक रोक नियंत्रण के तहत लोगों को जानकारी दी जा रही है। इससे बचाव और सावधानी बताई जा रही है। दवा के छिड़काव के लिए कितना बजट आया है या नहीं। अभी इसकी जानकारी नहीं है।- डॉ. हरदत्त कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी
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