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गोलमाल: पट्टे लेने के लिए बदला %बाप%....जिंदा व्यक्ति की पत्नी को दिखाया विधवा
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दातागंज (बदायूं)। तहसील क्षेत्र के गांव लहढैरी के तत्कालीन प्रधान ने तहसील कर्मियों से मिलकर खुद के नाम के अलावा अपने परिवार और रिश्तेदारों के जमीन के पट्टे करा लिए। उसने एक पट्टे में अपने पिता का नाम सही लिखाया तो दूसरे पट्टे में भाई के पिता का नाम फर्जी दर्ज करा दिया। इतना ही नहीं, परिवार के ही एक व्यक्ति को मृत दर्शाकर उसकी पत्नी को विधवा दर्शाते हुए उसे भी पट्टा दिलवा दिया, जबकि वह व्यक्ति जीवित है। पट्टे हासिल करने वालों में कुछ लोग दूसरी न्याय पंचायत के हैं तो दो लोग बरेली क्षेत्र के भी रहने वाले हैं। इस मामले की शिकायत जब डीएम और शासन तक पहुंची तो उसका खुलासा हुआ। इसके बाद इसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत लहढैरा के गांव लहढैरी में वर्ष 2008-09 में इस गांव के कई लोगों को छह से 12 बीघा तक जमीन के पट्टे आंवटित किए गए गए थे। उस वक्त बुधपाल पुत्र नन्कू प्रधान था। जब गलत तरीके से पट्टों का आंवटन किया गया तब गांव लहढैरी के सत्यपाल पुत्र त्रिमल ने इसकी शिकायत डीएम के साथ ही शासन स्तर पर की। उन्होंने न्यायालय में वाद भी दायर किया। जब जांच हुई तो पूरा मामला खुलकर सामने आया। पता चला कि प्रधान ने खुद का बुधपाल पुत्र जीवन के नाम से एक पट्टा कराया। इसमें प्रधान ने पिता का नाम जीवन दर्शाया है, वहीं दूसरा उसके सगे भाई रामलाल पुत्र ननकू के नाम से पट्टा हुआ। तीसरा पट्टा उसके परिवार के महेंद्र पुत्र रामलाल की पत्नी गुड्डी के नाम से हु्आ है। इसमें गुड्डी को विधवा दर्शाया गया है, जबकि महेंद्र आज भी जीवित है। प्रधान ने एक पट्टा अपने रिश्तेदार भूपाल पुत्र शिवलाल के नाम से कराया, जो कि तहसील क्षेत्र के गांव अकबरपुर का रहने वाला है, जबकि नियमानुसार पट्टा उसी ग्राम पंचायत के व्यक्ति को मिल सकता है।
इनके अलावा एक पट्टा राजकुमारी पत्नी लोचन के नाम से हुआ। इस नाम की गांव में ही कोई महिला नहीं है। चौकाने वाली बात तो यह रही है कि बरेली जिले के बल्लिया निवासी नत्थूलाल पुत्र सरदार, फरीदपुर निवासी ऋषिपाल पुत्र मोती के नाम से भी हुआ है। यहीं नहीं दूसरी ग्राम पंचायत करीमगंज के रहने वाले ओमपाल पुत्र बदन सिंह, अग्रपाल पुत्र बदन सिंह, राजपाल पुत्र श्रीराम, यशपाल पुत्र मुंशी समेत छह पट्टे हुए हैं, जो कि पूरी तरह से नियमों के खिलाफ हैं। एक दशक से भी पहले हुए इन गलत पट्टों का खुलासा होने के बाद से पट्टे आवंटित करने वालों में खलबली मची हुई है।
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पट्टे देने वाले तहसील कर्मियों का लगाया जा रहा पता
इस मामले के खुलने के बाद उन तहसील कर्मियों का पता लगाया जा रहा है जिन्होंने गलत तरीके से यह पट्टे आवंटित किए हैं। जाहिर है कि उनकी दिक्कतें बढ़ना तय है। हालांकि मामला एक दशक से पहले का है, ऐसे में यह भी अंदेशा है कि इससे जुड़े कुछ कर्मचारी दूसरी तहसीलों में भी कार्यरत हो सकते हैं।
यह मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा है। अब जो भी आदेश मिलेंगे उसी के तहत कार्रवाई होगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, सभी पर कार्रवाई तय है। -केबी सिंह, एसडीएम, दातागंज
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ग्राम पंचायत लहढैरा के गांव लहढैरी में वर्ष 2008-09 में इस गांव के कई लोगों को छह से 12 बीघा तक जमीन के पट्टे आंवटित किए गए गए थे। उस वक्त बुधपाल पुत्र नन्कू प्रधान था। जब गलत तरीके से पट्टों का आंवटन किया गया तब गांव लहढैरी के सत्यपाल पुत्र त्रिमल ने इसकी शिकायत डीएम के साथ ही शासन स्तर पर की। उन्होंने न्यायालय में वाद भी दायर किया। जब जांच हुई तो पूरा मामला खुलकर सामने आया। पता चला कि प्रधान ने खुद का बुधपाल पुत्र जीवन के नाम से एक पट्टा कराया। इसमें प्रधान ने पिता का नाम जीवन दर्शाया है, वहीं दूसरा उसके सगे भाई रामलाल पुत्र ननकू के नाम से पट्टा हुआ। तीसरा पट्टा उसके परिवार के महेंद्र पुत्र रामलाल की पत्नी गुड्डी के नाम से हु्आ है। इसमें गुड्डी को विधवा दर्शाया गया है, जबकि महेंद्र आज भी जीवित है। प्रधान ने एक पट्टा अपने रिश्तेदार भूपाल पुत्र शिवलाल के नाम से कराया, जो कि तहसील क्षेत्र के गांव अकबरपुर का रहने वाला है, जबकि नियमानुसार पट्टा उसी ग्राम पंचायत के व्यक्ति को मिल सकता है।
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इनके अलावा एक पट्टा राजकुमारी पत्नी लोचन के नाम से हुआ। इस नाम की गांव में ही कोई महिला नहीं है। चौकाने वाली बात तो यह रही है कि बरेली जिले के बल्लिया निवासी नत्थूलाल पुत्र सरदार, फरीदपुर निवासी ऋषिपाल पुत्र मोती के नाम से भी हुआ है। यहीं नहीं दूसरी ग्राम पंचायत करीमगंज के रहने वाले ओमपाल पुत्र बदन सिंह, अग्रपाल पुत्र बदन सिंह, राजपाल पुत्र श्रीराम, यशपाल पुत्र मुंशी समेत छह पट्टे हुए हैं, जो कि पूरी तरह से नियमों के खिलाफ हैं। एक दशक से भी पहले हुए इन गलत पट्टों का खुलासा होने के बाद से पट्टे आवंटित करने वालों में खलबली मची हुई है।
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पट्टे देने वाले तहसील कर्मियों का लगाया जा रहा पता
इस मामले के खुलने के बाद उन तहसील कर्मियों का पता लगाया जा रहा है जिन्होंने गलत तरीके से यह पट्टे आवंटित किए हैं। जाहिर है कि उनकी दिक्कतें बढ़ना तय है। हालांकि मामला एक दशक से पहले का है, ऐसे में यह भी अंदेशा है कि इससे जुड़े कुछ कर्मचारी दूसरी तहसीलों में भी कार्यरत हो सकते हैं।
यह मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा है। अब जो भी आदेश मिलेंगे उसी के तहत कार्रवाई होगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, सभी पर कार्रवाई तय है। -केबी सिंह, एसडीएम, दातागंज