{"_id":"5d7552928ebc3e0181671918","slug":"other-badaun-news-bly3754541158","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉक्टर हैं नहीं, स्टाफ भी कम,...फिर क्यों न बिगड़ें एसएनसीयू के हालात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉक्टर हैं नहीं, स्टाफ भी कम,...फिर क्यों न बिगड़ें एसएनसीयू के हालात
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। महिला अस्पताल के एसएनसीयू की हालत कोई ऐसे ही खराब नहीं हुई है। यहां न तो कोई जिम्मेदार है और न ही कोई टोकने वाला है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोई ये तक चेक करने वाला नहीं हैं कि स्टाफ आ रहा है या नहीं, रात को डॉक्टर रुकते हैं या फिर गायब रहते हैं। एसएनसीयू में क्या व्यवस्थाएं हैं, क्या जरूरत है और क्या नहीं, सब ऐसे ही धड़ल्ले से चल रहा है। जिसकी मर्जी में जो आ रहा है वह वैसा काम कर रहा है। ऐसे में फिर चाहे बच्चे मरें या फिर इंफेक्शन फैले, उनकी बला से।
पिछले तीन माह से एसएनसीयू की स्थिति कुछ ज्यादा खराब है। अब तक करीब 40 बच्चों की मौत हो चुकी है। पिछले चौबीस घंटे का रिकॉर्ड देखें तो तीन बच्चे दम तोड़ चुके हैं। शुरूआती दौर में बच्चों की मौत का कारण इंफेक्शन बताया गया था। इससे जिला स्तर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया था। उस समय स्थानीय स्तर पर फ्यूमीगेशन और बायोलॉजिकल सर्वे कराने की तैयारी चल रही थी लेकिन डीजी हेल्थ ने आकर इंफेक्शन फैलने से ही इंकार कर दिया। इससे सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। बाद में माना गया कि एसएनसीयू में स्टाफ कम है। डॉक्टर नहीं है। उससे पहले चार डॉक्टर लगाए गए थे लेकिन कोई ड्यूटी पर नहीं आया। डीजी हेल्थ ने अलग से दो डॉक्टर भेजने का दावा किया था। अब तक उनको भी नहीं भेजा गया है। आज के हालात देखें तो सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप वार्ष्णेय पर एसएनसीयू टिका है। वह सुबह से लेकर दोपहर तक बैठते हैं। जरूरत पर दोबारा पहुंच भी जाते हैं लेकिन नाइट ड्यूटी में तैनात डॉ. हनीश चावला अक्सर रात को गायब हो जाते हैं, यानी एसएनसीयू 16 घंटे डॉक्टर विहीन रहता है। इस दौरान सिर्फ स्टाफ नर्सें मौजूद होती हैं। बच्चों की संख्या को देखते हुए उनकी भी संख्या कम है। कम से कम चार वॉर्मर पर एक स्टाफ नर्स होनी चाहिए। यहां तो पूरे 21 बच्चे भर्ती हैं। दूसरी बात यह कि मशीनें खराब पड़ी हैं। बच्चों का इलाज हो तो कैसे और कौन करे, यह सबसे बड़ा सवाल है। तमाम लापरवाही हैं। कोई मॉनीटरिंग करने वाला नहीं हैं, इससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। इस संबंध में सीएमएस डॉ. रेखा रानी से बात करने की कोशिश की गई तो कई बार प्रयास के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं किया गया।
आखिर कब आएंगी सीपैप मशीन
-पिछले दो माह पहले सांसद संघमित्रा मौर्य ने महिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने कहा था कि एसएनसीयू की व्यवस्थाएं सुधरेंगी। जो मशीन नहीं है या जिस सामान की जरूरत है, उसकी लिस्ट बनाकर दें। उसको पूरा कराया जाएगा। लिस्ट तो दे दी गई, लेकिन जरूरी मशीनें आज तक नहीं आईं। उनमें एक मशीनें सीपैप भी थी। जिससे प्रीमैच्योर डिलीवरी वाले बच्चों का इलाज होता है। इनके अभाव में प्रीमैच्योर बच्चों का इलाज संभव ही नहीं है। फिर भी सीएसएनसीयू में मशीनें नहीं मंगाई गई।
विज्ञापन
दो फोटोथैरेपी मशीनें पड़ी हैं खराब
-फोटोथैरेपी मशीन से नवजात बच्चों में पीलिया रोग का इलाज होता है। अक्सर खून की कमी से पीलिया रोग बढ़ने लगता है। उस समय बच्चों को फोटोथैरेपी मशीन की सख्त जरूरत पड़ती है। इस समय एसएनसीयू में पांच मशीनें हैं। उनमें से दो खराब पड़ी हैं। सिर्फ तीन मशीनों से तीन बच्चों का इलाज हो रहा है।
मैं अपनी ड्यूटी पूरी कर रहा हूं। उसके अलावा भी समय दे रहा हूं। इससे ज्यादा मैं क्या कर सकता हूं। हम कई बार लेटर लिखकर दे चुकें हैं। कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। बच्चों की संख्या ज्यादा है और स्टाफ की कमी है। इससे अव्यवस्था तो बढ़ेगी।
डॉ. संदीप वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ एसएनसीयू
विज्ञापन
पिछले तीन माह से एसएनसीयू की स्थिति कुछ ज्यादा खराब है। अब तक करीब 40 बच्चों की मौत हो चुकी है। पिछले चौबीस घंटे का रिकॉर्ड देखें तो तीन बच्चे दम तोड़ चुके हैं। शुरूआती दौर में बच्चों की मौत का कारण इंफेक्शन बताया गया था। इससे जिला स्तर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया था। उस समय स्थानीय स्तर पर फ्यूमीगेशन और बायोलॉजिकल सर्वे कराने की तैयारी चल रही थी लेकिन डीजी हेल्थ ने आकर इंफेक्शन फैलने से ही इंकार कर दिया। इससे सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। बाद में माना गया कि एसएनसीयू में स्टाफ कम है। डॉक्टर नहीं है। उससे पहले चार डॉक्टर लगाए गए थे लेकिन कोई ड्यूटी पर नहीं आया। डीजी हेल्थ ने अलग से दो डॉक्टर भेजने का दावा किया था। अब तक उनको भी नहीं भेजा गया है। आज के हालात देखें तो सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप वार्ष्णेय पर एसएनसीयू टिका है। वह सुबह से लेकर दोपहर तक बैठते हैं। जरूरत पर दोबारा पहुंच भी जाते हैं लेकिन नाइट ड्यूटी में तैनात डॉ. हनीश चावला अक्सर रात को गायब हो जाते हैं, यानी एसएनसीयू 16 घंटे डॉक्टर विहीन रहता है। इस दौरान सिर्फ स्टाफ नर्सें मौजूद होती हैं। बच्चों की संख्या को देखते हुए उनकी भी संख्या कम है। कम से कम चार वॉर्मर पर एक स्टाफ नर्स होनी चाहिए। यहां तो पूरे 21 बच्चे भर्ती हैं। दूसरी बात यह कि मशीनें खराब पड़ी हैं। बच्चों का इलाज हो तो कैसे और कौन करे, यह सबसे बड़ा सवाल है। तमाम लापरवाही हैं। कोई मॉनीटरिंग करने वाला नहीं हैं, इससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। इस संबंध में सीएमएस डॉ. रेखा रानी से बात करने की कोशिश की गई तो कई बार प्रयास के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं किया गया।
विज्ञापन
आखिर कब आएंगी सीपैप मशीन
-पिछले दो माह पहले सांसद संघमित्रा मौर्य ने महिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने कहा था कि एसएनसीयू की व्यवस्थाएं सुधरेंगी। जो मशीन नहीं है या जिस सामान की जरूरत है, उसकी लिस्ट बनाकर दें। उसको पूरा कराया जाएगा। लिस्ट तो दे दी गई, लेकिन जरूरी मशीनें आज तक नहीं आईं। उनमें एक मशीनें सीपैप भी थी। जिससे प्रीमैच्योर डिलीवरी वाले बच्चों का इलाज होता है। इनके अभाव में प्रीमैच्योर बच्चों का इलाज संभव ही नहीं है। फिर भी सीएसएनसीयू में मशीनें नहीं मंगाई गई।
विज्ञापन
दो फोटोथैरेपी मशीनें पड़ी हैं खराब
-फोटोथैरेपी मशीन से नवजात बच्चों में पीलिया रोग का इलाज होता है। अक्सर खून की कमी से पीलिया रोग बढ़ने लगता है। उस समय बच्चों को फोटोथैरेपी मशीन की सख्त जरूरत पड़ती है। इस समय एसएनसीयू में पांच मशीनें हैं। उनमें से दो खराब पड़ी हैं। सिर्फ तीन मशीनों से तीन बच्चों का इलाज हो रहा है।
मैं अपनी ड्यूटी पूरी कर रहा हूं। उसके अलावा भी समय दे रहा हूं। इससे ज्यादा मैं क्या कर सकता हूं। हम कई बार लेटर लिखकर दे चुकें हैं। कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। बच्चों की संख्या ज्यादा है और स्टाफ की कमी है। इससे अव्यवस्था तो बढ़ेगी।
डॉ. संदीप वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ एसएनसीयू