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सपा की व्यूह रचना भेदने को बेताव विपक्षी दल

Wed, 04 Nov 2015 09:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं Updated Wed, 04 Nov 2015 09:04 PM IST
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oppositions are making streatgy against SP
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सरगर्मियां तेज
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सांसद धर्मेंद्र यादव से भी होगी उम्मीदवार पर चर्चा

 
 हालांकि अभी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को लेकर किसी दल ने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि सपा, बसपा और भाजपा अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी। हो सकता है कि ऐन वक्त बसपा और भाजपा हाथ मिलाकर सपा को पटखनी देने का प्रयास भी करें। जिले में सपा का अपना रसूख है। सांसद धर्मेंद्र यादव मुख्यमंत्री के परिवार के हैं, तो एक राज्यमंत्री ओमकार सिंह यादव और दो निगमों के अध्यक्ष क्रमश: बनवारी सिंह यादव-आबिद रजा सरकार में नुमाइंदगी कर रहे हैं। बसपा का भी जिले में जनाधार है। दो विधायक सिनोद शाक्य और हाजी मुर्सरत बिट्टन आगामी विधानसभा चुनाव में अपने नंबर बढ़ाने के लिए अध्यक्षी की जंग जिताने को बेताव हैं। कारण ये भी है कि अध्यक्ष पद पूनम यादव के रूप में बसपा के खाते में ही है। ऐसे में सपा और बसपा के बीच सीधे टकराव की स्थिति बनेगी,  लेकिन इस बार भाजपा ने भी मैदान में उतरकर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। भाजपा और सपा संख्या बल में कमोवेश बराबर की स्थिति में है। समाजवादी पार्टी ने अपने अधिकृत उम्मीदवार न उतारकर जो सियासी खेल खेला, उसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रही। तकरीबन 22 सीटों पर उसे फतह हासिल हुई है। इस लिहाज से पलड़ा उसका भारी है। इतिहास देखें तो अभी तक जिला पंचायत में अधिकतर सपा का ही कब्जा रहा है।
पूरे चुनाव के दौरान संसदीय क्षेत्र से दूरी बनाकर रखने वाले सांसद धर्मेंद्र यादव अब दो दिनी दौरे पर आए हैं। अब मंत्रणा इस पर भी होनी है कि अध्यक्ष पद पर किसको बिठाया जाए। सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, तो किसी अपने पर ही दांव लगाया जाएगा। सूत्रों की बात करें तो विधायक आशुतोष मौर्य की रिश्तेदार मधु चंद्रा का नाम आगे आ रहा है। बसपा से पूर्व विधायक योगेंद्र सागर की पत्नी प्रीति सागर का नाम चर्चा में है। राजनीतिक गलियारों में ये भी चर्चा है कि चुनाव के वक्त बसपा और भाजपा ने हाथ मिला लिया तो सपा के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।
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कोशिश निर्विरोध अध्यक्ष बनाने की: यादव
बदायूं। पार्टी के रिपोर्ट कार्ड को देखकर गदगद सपा के जिलाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश पिछड़ा वित्त विकास निगम के अध्यक्ष बनवारी सिंह यादव का दावा है कि उनके 41 कंडीडेट जीते हैं। अब कोशिश निर्विरोध अध्यक्ष बनवाने की है। रहा उम्मीदवार का सवाल तो सांसद, चार विधायक और निर्वाचित सदस्यों की आम राय से नाम तय किया जाएगा। अभी तो नए सदस्यों को शपथ लेनी है। इसके बाद जो स्थितियां सामने आएंगी, उसी हिसाब से निर्णय भी लिए जाएंगे। पार्टी से चुने गए सदस्य लालची नहीं है। वह हर हाल में पार्टी को मजबूत करने का काम करेंगे।
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संभावनाओं के द्वार खुले: पाठक
बदायूं। भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रेमस्वरूप पाठक का दावा है कि अगर निर्वाचन क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में फोर्स होता और बूथ कैप्चरिंग न हुई होती तो पार्टी को कम से कम बीस सीट मिलतीं। उनका दावा है कि पार्टी को दस सीटें मिली हैं। अब अध्यक्ष पद के लिए मंथन चल रहा है। हालांकि संख्या बल उतना नहीं है, लेकिन संभावनाओं के द्वार खुले हुए हैं। अगर सहमति बनी तो पार्टी उम्मीदवार भी उतार सकती है। उन्होंने बसपा से मिलकर चुनाव लड़ने के बारे में खुलकर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन संकेत इस विकल्प के भी खुले रहने के दिए।
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