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नोटबंदी से अभी तक नहीं उभर पा रहे ग्रामीण ग्राहक
अमर उजाला ब्यूरो जरीफनगर।
Updated Wed, 18 Jan 2017 11:34 PM IST
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नोटबंदी
- फोटो : अमर उजाला
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लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिल पा रहा कैश
नोटबंदी के पचास दिन बीतने के बाद भले ही स्थिति पटरी पर आने लगी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के ग्राहक अभी तक इसके असर से नहीं उभर पाए हैं। कैश की किल्लत के चलते हर रोज लाइन में फजीहत झेलनी पड़ रही है। वहीं व्यापारी वर्ग भी असंतोष है। बैंक कर्मियों पर भी सहयोग न करने का आरोप है।
सर्वेश कुमार, विजय कुमार, संजीव, प्रदीप सिंह, जितेंद्र, मोहित यादव, भीकम सिंह, नेमपाल सिंह आदि ने बताया कि बुधवार को भी कैश की किल्लत से लोगों को जूझना पड़ा। कर्मियों ने शाम तक कैश उपलब्ध होने की बात कहीं, लेकिन शाम तक कैश नहीं मिल सका। पूरे दिन लाइन में इंतजार करते हुए कट गए। उन्होंने कहा कि कैश न मिलने से कार्य अधर में लटके पड़े हैं। समाजसेवी महेशपाल सिंह ने बैंक कर्मियों पर मनमानी का आरोप लगाया। कहा कि कोई सही जानकारी भी नहीं दी जा रही है।
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नोटबंदी के पचास दिन बीतने के बाद भले ही स्थिति पटरी पर आने लगी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के ग्राहक अभी तक इसके असर से नहीं उभर पाए हैं। कैश की किल्लत के चलते हर रोज लाइन में फजीहत झेलनी पड़ रही है। वहीं व्यापारी वर्ग भी असंतोष है। बैंक कर्मियों पर भी सहयोग न करने का आरोप है।
सर्वेश कुमार, विजय कुमार, संजीव, प्रदीप सिंह, जितेंद्र, मोहित यादव, भीकम सिंह, नेमपाल सिंह आदि ने बताया कि बुधवार को भी कैश की किल्लत से लोगों को जूझना पड़ा। कर्मियों ने शाम तक कैश उपलब्ध होने की बात कहीं, लेकिन शाम तक कैश नहीं मिल सका। पूरे दिन लाइन में इंतजार करते हुए कट गए। उन्होंने कहा कि कैश न मिलने से कार्य अधर में लटके पड़े हैं। समाजसेवी महेशपाल सिंह ने बैंक कर्मियों पर मनमानी का आरोप लगाया। कहा कि कोई सही जानकारी भी नहीं दी जा रही है।
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