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बिजली नाममात्र और भुगतान पूरा
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 22 Mar 2016 09:04 PM IST
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जिले में नलकूप विभाग साल में करीब छह करोड़ रुपये की बिजली का इस्तेमाल करता है, लेकिन बिल 36 करोड़ रुपये का भरना पड़ता है। दरअसल, नलकूप विभाग का चार्ज फिक्स है। इसके तहत नलकूपों को रोज 16 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। इसी के आधार पर बिल का भुगतान होता है, लेकिन नलकूपों को मात्र चार से छह घंटे तक ही बिजली मिल पा रही है।
जिले में सरकारी नलकूपों की संख्या 1200 है। नलकूप ही जिले का सर्वाधिक सींच का साधन है। दुर्भाग्य है कि जिले के नलकूपों को शेड्यूल के हिसाब से 16 घंटा बिजली मिलनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में बिजली की चरमराई व्यवस्था का बदायूं पर भी पूरा असर है। किसानों की मानें तो जिले के नलकूपों को चार से छह घंटे बमुश्किल बिजली मिल पाती है। कई जगहों पर तो तार इतने जर्जर हैं कि नलकूप अपने अस्तित्व को लड़ रहे हैं। किसानों को अन्य साधनों पर भरोसा करना होता है। नलकूपों को कम बिजली मिलने के कारण कृषि उपज पर भी काफी प्रभाव पड़ता है। कई अधिक सिंचाई वाली फसलें किसान छोड़ता जा रहा है। एक आंकड़े के अनुसार करीब छह करोड़ की बिजली ही जिले के सरकारी नलकूप खर्च कर पाते हैं, लेकिन नलकूप विभाग को 36 करोड़ बिजली का भुगतान करना होता है। नलकूप विभाग द्वारा बिजली विभाग को इतना धन दिए जाने के बावजूद किसानों को सिंचाई की पूरी सुविधा नहीं मिल पाती है।
बिजली विभाग को हम जितना बिल भुगतान करते हैं, उसका अंश मात्र बिजली ही हमारे नलकूपों को हासिल हो पाती है। सरकार नलकूपों को अलग से बिजली लाइन देने की योजना आए तो बात बने। जितना बिल हम देते हैं, उतनी बिजली हमको मिलनी चाहिए। हमारा भुगतान सीधे लखनऊ मुख्यालय से होता है।
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- गिरीश चंद्र, एक्सईएन, नलकूप खंड प्रथम
हमें नलकूप विभाग से कोई बिल का पैसा नहीं मिलता है। हम इसके लिए नोटिस भी दे चुके हैं। नलकूप विभाग द्वारा भुगतान होता तो हमें इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसा संभव नहीं। हमने उन्हें भुगतान के लिए नोटिस भी भेजे हैं। अगर, वह कोई भुगतान करते हैं तो रसीदें दिखाएं। तब माना जाएगा कि वह भुगतान करते हैं।
- अनूप चंद्रा, एसई, बिजली विभाग
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जिले में सरकारी नलकूपों की संख्या 1200 है। नलकूप ही जिले का सर्वाधिक सींच का साधन है। दुर्भाग्य है कि जिले के नलकूपों को शेड्यूल के हिसाब से 16 घंटा बिजली मिलनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में बिजली की चरमराई व्यवस्था का बदायूं पर भी पूरा असर है। किसानों की मानें तो जिले के नलकूपों को चार से छह घंटे बमुश्किल बिजली मिल पाती है। कई जगहों पर तो तार इतने जर्जर हैं कि नलकूप अपने अस्तित्व को लड़ रहे हैं। किसानों को अन्य साधनों पर भरोसा करना होता है। नलकूपों को कम बिजली मिलने के कारण कृषि उपज पर भी काफी प्रभाव पड़ता है। कई अधिक सिंचाई वाली फसलें किसान छोड़ता जा रहा है। एक आंकड़े के अनुसार करीब छह करोड़ की बिजली ही जिले के सरकारी नलकूप खर्च कर पाते हैं, लेकिन नलकूप विभाग को 36 करोड़ बिजली का भुगतान करना होता है। नलकूप विभाग द्वारा बिजली विभाग को इतना धन दिए जाने के बावजूद किसानों को सिंचाई की पूरी सुविधा नहीं मिल पाती है।
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बिजली विभाग को हम जितना बिल भुगतान करते हैं, उसका अंश मात्र बिजली ही हमारे नलकूपों को हासिल हो पाती है। सरकार नलकूपों को अलग से बिजली लाइन देने की योजना आए तो बात बने। जितना बिल हम देते हैं, उतनी बिजली हमको मिलनी चाहिए। हमारा भुगतान सीधे लखनऊ मुख्यालय से होता है।
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- गिरीश चंद्र, एक्सईएन, नलकूप खंड प्रथम
हमें नलकूप विभाग से कोई बिल का पैसा नहीं मिलता है। हम इसके लिए नोटिस भी दे चुके हैं। नलकूप विभाग द्वारा भुगतान होता तो हमें इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसा संभव नहीं। हमने उन्हें भुगतान के लिए नोटिस भी भेजे हैं। अगर, वह कोई भुगतान करते हैं तो रसीदें दिखाएं। तब माना जाएगा कि वह भुगतान करते हैं।
- अनूप चंद्रा, एसई, बिजली विभाग