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रोज हादसे करा रहे बिन रिफ्लेक्टर के डिवाइडर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बदायूं
Updated Sat, 06 Jan 2018 12:24 AM IST
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कोहरे वाली रात में शहर की सड़कों पर चलना अब जान जोखिम का काम बन गया है। शहर में बने डिवाइडरों पर रिफ्लेक्टर न लगे होने से लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं। गुरुवार रात अंबेडकर पार्क के सामने एक व्यक्ति डिवाइडर से टकराकर घायल हो गया जो जिला अस्पताल में भर्ती है। इससे पहले मंगलवार रात को एक व्यक्ति महिला अस्पताल के सामने डिवाइडर से टकराकर घायल हुआ था।
जिला अस्पताल से कचहरी जाने वाले रोड पर बने डिवाइडर से टकराकर कई लोग घायल होते रहते हैं। अस्पताल में भर्ती राकेश निवासी श्यामनगर ने बताया कि महिला अस्पताल में उसकी भाभी भर्ती हैं। गुरुवार रात दस बजे अस्पताल से बाइक से निकलते वक्त वह कोहरे में डिवाइडर से टकराकर घायल हो गया। कचहरी में होटल चलाने वाला सादिक मंगलवार सुबह इसी तरह के डिवाइडर से टकराकर घायल हुआ तो उसे एक दिन अस्पताल में रहना पड़ा।
धुंध में दिखाई नहीं देते चौक
इंदिरा चौक और लावेला चौक के बीचोंबीच बने गोल घेरे पर कोई रिफ्लेक्टर या रेडियम स्टीकर नहीं लगे हैं। इससे रात में वाहन चालक कोहरे की वजह से इन्हें नहीं देख पाते हैं। कोहरे की धुंध में छिपे चौराहों पर प्रकाश की समुचित व्यवस्था भी नहीं है।
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अंधे ट्रैक्टर-ट्रॉली बने यमदूत
धुंध में दौड़ रहे ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर और इंडीकेटर नहीं लगाए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने अब तक इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया है। जबकि पुलिस की नाक के नीचे से ऐसे वाहन दौड़ रहे हैं। खासकर रात में खनन वाले हेवी वाहन और गन्ना भरी ट्रॉलियां भी जान जोखिम की वजह बने हैं।
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जिला अस्पताल से कचहरी जाने वाले रोड पर बने डिवाइडर से टकराकर कई लोग घायल होते रहते हैं। अस्पताल में भर्ती राकेश निवासी श्यामनगर ने बताया कि महिला अस्पताल में उसकी भाभी भर्ती हैं। गुरुवार रात दस बजे अस्पताल से बाइक से निकलते वक्त वह कोहरे में डिवाइडर से टकराकर घायल हो गया। कचहरी में होटल चलाने वाला सादिक मंगलवार सुबह इसी तरह के डिवाइडर से टकराकर घायल हुआ तो उसे एक दिन अस्पताल में रहना पड़ा।
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धुंध में दिखाई नहीं देते चौक
इंदिरा चौक और लावेला चौक के बीचोंबीच बने गोल घेरे पर कोई रिफ्लेक्टर या रेडियम स्टीकर नहीं लगे हैं। इससे रात में वाहन चालक कोहरे की वजह से इन्हें नहीं देख पाते हैं। कोहरे की धुंध में छिपे चौराहों पर प्रकाश की समुचित व्यवस्था भी नहीं है।
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अंधे ट्रैक्टर-ट्रॉली बने यमदूत
धुंध में दौड़ रहे ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर और इंडीकेटर नहीं लगाए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने अब तक इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया है। जबकि पुलिस की नाक के नीचे से ऐसे वाहन दौड़ रहे हैं। खासकर रात में खनन वाले हेवी वाहन और गन्ना भरी ट्रॉलियां भी जान जोखिम की वजह बने हैं।