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जिसे कोई नहीं अपनाता, भगवान अपनाते हैं
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 01 Mar 2017 11:24 PM IST
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जिसे कोई नहीं अपनाता, भगवान अपनाते हैं
- फोटो : अमर उजाला
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श्रीमद्भागवत कथा में ब्रज की होली, मधुर भजन पर झूमे भक्त
लोक निर्माण परिवार सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समिति की ओर से लोनिवि शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भगवान कृष्ण की मित्रता का सुंदर वर्णन किया। साथ ही ब्रज की होली खेलकर और मधुर भजन सुनकर श्रद्धलु झूम उठे।
कथा वाचक गोपाल ठाकुर महाराज ने कहा कि भगवान कहते हैं कि जिसको कोई नहीं अपनाता है वो मेरी शरण में आता है तो मैं उसे अपना लेता हूं। मित्रता की परिभाषा समझाते हुए कहा कि सुदामा का परिवार अत्यंत गरीबी तथा दुर्दशा के लिए स्वयं को दोषी मानता था। सुदामा को उनकी पत्नी ने एक बार परम मित्र श्रीकृष्ण याद दिलायी। सुदामा की पत्नी ने सुदामा को उनके पास जाने का आग्रह किया और कहा कि श्रीकृष्ण दयावान हैं, वे हमारी सहायता अवश्य करेंगे। सुदामा ने संकोच भरे स्वर में कहा कि श्रीकृष्ण एक पराक्रमी राजा है और मैं गरीब ब्राह्मण हूं। सुदामा के महल पहुंचते ही भगवान सुदामा को अंदर ले गए और सिंहासन पर बैठाया, अपने हाथों से सुदामा के पैरों को धोया। कथा श्रवण करने वालों में मुनेंद्र प्रताप सिंह, सुरेश पाल सिंह, सुधीर सक्सेना, अजय गंगवार, प्रमोद सक्सेना, शक्ति प्रसाद, संजीव कुमार, दिनेश कुमार सिंह, प्रेमपाल सिंह, नन्हे लाल, राजीव राठौर, रेखा राठौर, हरीश बजाज आदि मौजूद रहे।
लोक निर्माण परिवार सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समिति की ओर से लोनिवि शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भगवान कृष्ण की मित्रता का सुंदर वर्णन किया। साथ ही ब्रज की होली खेलकर और मधुर भजन सुनकर श्रद्धलु झूम उठे।
कथा वाचक गोपाल ठाकुर महाराज ने कहा कि भगवान कहते हैं कि जिसको कोई नहीं अपनाता है वो मेरी शरण में आता है तो मैं उसे अपना लेता हूं। मित्रता की परिभाषा समझाते हुए कहा कि सुदामा का परिवार अत्यंत गरीबी तथा दुर्दशा के लिए स्वयं को दोषी मानता था। सुदामा को उनकी पत्नी ने एक बार परम मित्र श्रीकृष्ण याद दिलायी। सुदामा की पत्नी ने सुदामा को उनके पास जाने का आग्रह किया और कहा कि श्रीकृष्ण दयावान हैं, वे हमारी सहायता अवश्य करेंगे। सुदामा ने संकोच भरे स्वर में कहा कि श्रीकृष्ण एक पराक्रमी राजा है और मैं गरीब ब्राह्मण हूं। सुदामा के महल पहुंचते ही भगवान सुदामा को अंदर ले गए और सिंहासन पर बैठाया, अपने हाथों से सुदामा के पैरों को धोया। कथा श्रवण करने वालों में मुनेंद्र प्रताप सिंह, सुरेश पाल सिंह, सुधीर सक्सेना, अजय गंगवार, प्रमोद सक्सेना, शक्ति प्रसाद, संजीव कुमार, दिनेश कुमार सिंह, प्रेमपाल सिंह, नन्हे लाल, राजीव राठौर, रेखा राठौर, हरीश बजाज आदि मौजूद रहे।
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