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495 नहीं, 740 गांव बिजली से हैं वंचित
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Sat, 25 Feb 2017 11:06 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जिले में दो साल पहले थे 1640 गांवों में नहीं थी बिजली
दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना के तहत 900 गांव हुए विद्युतीकृत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे पिछड़े चुनिंदा जिलों से बदायूं की तुलना करते हुए यहां गैरविद्युतीकरण वाले गांवों की संख्या 495 बताई थी लेकिन सच यह है कि जिले में उससे भी ज्यादा गांवों में बिजली अभी तक नहीं पहुंच पाई है। विद्युत विभाग के आंकड़े ही बोल रहे हैं कि जिले में अभी भी 740 गांव बिजली की रोशनी से जगमग नहीं हो पाए हैं। हालांकि इनमें से कुछ गांवों में विद्युतीकरण को पोल लगाए जा चुके हैं लेकिन बिजली की सप्लाई शुरू नहीं की गई है। ऐसे में, इन सभी गांवों की लाखों की आबादी को बिजली नसीब नहीं है। वह रात को अंधेरे में जीवन काटने को विवश हैं या फिर लालटेन की रोशनी में रात गुजारते हैं।
विधानसभा चुनाव के दौरान 11 फरवरी को जनसभा को संबोधित करने बदायूं आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब जिले के लगभग पांच सौ गांवों में विद्युतीकरण न होने का मुद्दा उठाकर प्रदेश की सपा सरकार पर चोट की तो सबका ध्यान बिजली की व्यवस्था की ओर गया। प्रधानमंत्री के जवाब में सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा था कि गांवों में विद्युतीकरण हुआ है लेकिन उसके लिए बजट की मंजूरी यूपीए शासनकाल में उन्होंने पैरवी करके कराई थी। गौर करने वाली बात यह है कि जिले की 1038 ग्राम पंचायतों में करीब 5190 राजस्व गांव हैं। इनमें दो साल पहले 1640 गांव ऐसे चिह्नित किए गए जहां आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी। केंद्र सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा, लेकिन काम वक्त पर शुरू न होने की वजह इनमें 900 गांवों तक ही बिजली पहुंचाई जा सकी है। ऐसे में अब भी जिले में 740 गांव ऐसे हैं जो बिजली की रोशनी के लिए तरस रहे हैं।
यह है स्थिति
बदायूं जिले के जिन गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है उनमें सबसे ज्यादा गांव कटरी इलाकों के हैं। सहसवान, दातागंज, कादरचौक, उझानी, जरीफनगर और मुजरिया ऐसे कस्बे हैं जहां गैर विद्युतीकरण वाले गांवों की संख्या सबसे कम है। ग्रामीण विद्युतीकरण का जिम्मा पेश पॉवर नाम की कंपनी को दिया गया है। काम देर से शुरू होने का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कादरचौक ब्लॉक की ग्राम पंचायत ककोड़ा के 12 मजरों में अब भी 10 मजरे ऐसे हैं जो बिजली की रोशनी को तरस रहे हैं।
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जिले में कुल 1640 गांव ऐसे थे जहां विद्युतीकरण नहीं था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत जिले के करीब 900 गांवों में विद्युतीकरण हो चुका है। बाकी में काम चल रहा है। उनमें जल्द बिजली पहुंचा दी जाएगी।
-अतुल कुमार अग्रवाल, एक्सईएन प्रथम खंड/नोडल अधिकारी ग्रामीण विद्युतीकरण
दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना के तहत 900 गांव हुए विद्युतीकृत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे पिछड़े चुनिंदा जिलों से बदायूं की तुलना करते हुए यहां गैरविद्युतीकरण वाले गांवों की संख्या 495 बताई थी लेकिन सच यह है कि जिले में उससे भी ज्यादा गांवों में बिजली अभी तक नहीं पहुंच पाई है। विद्युत विभाग के आंकड़े ही बोल रहे हैं कि जिले में अभी भी 740 गांव बिजली की रोशनी से जगमग नहीं हो पाए हैं। हालांकि इनमें से कुछ गांवों में विद्युतीकरण को पोल लगाए जा चुके हैं लेकिन बिजली की सप्लाई शुरू नहीं की गई है। ऐसे में, इन सभी गांवों की लाखों की आबादी को बिजली नसीब नहीं है। वह रात को अंधेरे में जीवन काटने को विवश हैं या फिर लालटेन की रोशनी में रात गुजारते हैं।
विधानसभा चुनाव के दौरान 11 फरवरी को जनसभा को संबोधित करने बदायूं आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब जिले के लगभग पांच सौ गांवों में विद्युतीकरण न होने का मुद्दा उठाकर प्रदेश की सपा सरकार पर चोट की तो सबका ध्यान बिजली की व्यवस्था की ओर गया। प्रधानमंत्री के जवाब में सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा था कि गांवों में विद्युतीकरण हुआ है लेकिन उसके लिए बजट की मंजूरी यूपीए शासनकाल में उन्होंने पैरवी करके कराई थी। गौर करने वाली बात यह है कि जिले की 1038 ग्राम पंचायतों में करीब 5190 राजस्व गांव हैं। इनमें दो साल पहले 1640 गांव ऐसे चिह्नित किए गए जहां आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी। केंद्र सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा, लेकिन काम वक्त पर शुरू न होने की वजह इनमें 900 गांवों तक ही बिजली पहुंचाई जा सकी है। ऐसे में अब भी जिले में 740 गांव ऐसे हैं जो बिजली की रोशनी के लिए तरस रहे हैं।
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यह है स्थिति
बदायूं जिले के जिन गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है उनमें सबसे ज्यादा गांव कटरी इलाकों के हैं। सहसवान, दातागंज, कादरचौक, उझानी, जरीफनगर और मुजरिया ऐसे कस्बे हैं जहां गैर विद्युतीकरण वाले गांवों की संख्या सबसे कम है। ग्रामीण विद्युतीकरण का जिम्मा पेश पॉवर नाम की कंपनी को दिया गया है। काम देर से शुरू होने का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कादरचौक ब्लॉक की ग्राम पंचायत ककोड़ा के 12 मजरों में अब भी 10 मजरे ऐसे हैं जो बिजली की रोशनी को तरस रहे हैं।
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जिले में कुल 1640 गांव ऐसे थे जहां विद्युतीकरण नहीं था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत जिले के करीब 900 गांवों में विद्युतीकरण हो चुका है। बाकी में काम चल रहा है। उनमें जल्द बिजली पहुंचा दी जाएगी।
-अतुल कुमार अग्रवाल, एक्सईएन प्रथम खंड/नोडल अधिकारी ग्रामीण विद्युतीकरण