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Budaun News: एसएनसीयू में नवजातों की जा रही जान, रात में नहीं रहते डॉक्टर
Thu, 13 Jun 2024 04:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Thu, 13 Jun 2024 04:30 AM IST
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महिला अस्पताल का एसएनसीयू । संवाद
बदायूं। स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में नवजात बच्चों की देखभाल और उपचार के लिए चिकित्साकर्मियों के साथ डाॅक्टर 24 घंटे उपलब्ध नहीं रहते हैं। इसका खामियाजा नवजातों को भुगतना पड़ रहा है, जो अपनी तकलीफ को बोलकर भी बयां नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से उनकी जान चली जा रही है।
दो नवजात की मौत सोमवार और मंगलवार की रात को हो गई। इससे पहले एक जून को भी दो नवजातों ने दम तोड़ दिया था। हर रोज एक नवजात की मौत का औसत है। अधिकांश बच्चों की मौत रात के समय होना सामने आया है। मुख्य वजह यह है कि रात में डॉक्टर ही नहीं रहते है, वहीं मौजूद स्टाफ इलाज नहीं दे पाता और नवजात दम तोड़ देता है।
केस-एक
उझानी निवासी प्रेमवती ने महिला अस्पताल में सोमवार को बेटी को जन्म दिया। मंगलवार को नवजात की हालत बिगड़ी तो उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया पर परिवार वहां नहीं गए, बदायूं के लिए निजी अस्पतालों में घूमते रहे। दोपहर बाद फिर से महिला अस्पताल पहुंचे जहां बेटी को भर्ती कर लिया गया, जिसकी रात में मौत हो गई।
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केस- दो
इस्लामनगर निवासी कुंती को रविवार को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने उसको महिला अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार को बेटी पैदा हुई। रात करीब 12 बजे नवजात की हालत बिगड़ गई। एसएनसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टर के न होने पर इलाज नहीं मिल सका और बच्चे की मौत हो गई।
केस- तीन
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव मझिया निवासी प्रदीप ने प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी मनीषा देवी को 28 मई को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां ऑपरेशन से मनीषा ने बेटी को जन्म दिया। एसएनसीयू में भर्ती नवजात की 31 मई की रात को मौत हो गई।
केस- चार
कासगंज के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के गांव बहोरा निवासी कमल कुमार का बेटा 25 मई से भर्ती था।31 मई की रात में नवजात की मौत हो गई। एक ही दिन में दो बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने एसएनसीयू में हंगामा भी किया था।
दो ही डॉक्टर है जो दो शिफ्ट में ड्यूटी कर रहे हैं। रात को डॉक्टर की कमी चल रही है। बाल रोग विशेषज्ञ मिलें तो व्यवस्था में सुधार हो।इसके लिए शासन को लिखा है, पैरवी भी कर रहे हैं। डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल
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दो नवजात की मौत सोमवार और मंगलवार की रात को हो गई। इससे पहले एक जून को भी दो नवजातों ने दम तोड़ दिया था। हर रोज एक नवजात की मौत का औसत है। अधिकांश बच्चों की मौत रात के समय होना सामने आया है। मुख्य वजह यह है कि रात में डॉक्टर ही नहीं रहते है, वहीं मौजूद स्टाफ इलाज नहीं दे पाता और नवजात दम तोड़ देता है।
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केस-एक
उझानी निवासी प्रेमवती ने महिला अस्पताल में सोमवार को बेटी को जन्म दिया। मंगलवार को नवजात की हालत बिगड़ी तो उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया पर परिवार वहां नहीं गए, बदायूं के लिए निजी अस्पतालों में घूमते रहे। दोपहर बाद फिर से महिला अस्पताल पहुंचे जहां बेटी को भर्ती कर लिया गया, जिसकी रात में मौत हो गई।
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केस- दो
इस्लामनगर निवासी कुंती को रविवार को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने उसको महिला अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार को बेटी पैदा हुई। रात करीब 12 बजे नवजात की हालत बिगड़ गई। एसएनसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टर के न होने पर इलाज नहीं मिल सका और बच्चे की मौत हो गई।
केस- तीन
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव मझिया निवासी प्रदीप ने प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी मनीषा देवी को 28 मई को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां ऑपरेशन से मनीषा ने बेटी को जन्म दिया। एसएनसीयू में भर्ती नवजात की 31 मई की रात को मौत हो गई।
केस- चार
कासगंज के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के गांव बहोरा निवासी कमल कुमार का बेटा 25 मई से भर्ती था।31 मई की रात में नवजात की मौत हो गई। एक ही दिन में दो बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने एसएनसीयू में हंगामा भी किया था।
दो ही डॉक्टर है जो दो शिफ्ट में ड्यूटी कर रहे हैं। रात को डॉक्टर की कमी चल रही है। बाल रोग विशेषज्ञ मिलें तो व्यवस्था में सुधार हो।इसके लिए शासन को लिखा है, पैरवी भी कर रहे हैं। डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल