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गुनौरा वाजिदपुर इलाके में जल्द बनेगी जेल, दो फंसे मामलों को निकालने में जुटा प्रशासन
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बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के नजदीक गुनौरा वाजिदपुर क्षेत्र में नई जेल का निर्माण जल्द होगा। जिला प्रशासन इसकी तैयारियों में लगा है। जेल के लिए जमीन खरीदी जा चुकी है, लेकिन दो मामले आकर फंस गए हैं, जो जेल निर्माण की शुरुआत को लंबित किए हुए हैं। जिला प्रशासन कोशिश में है कि जल्द दोनों मामले सुलझ जाएं और जेल निर्माण का रास्ता साफ हो जाए।
बदायूं-मेरठ हाईवे किनारे गुनौरा वाजिदपुर इलाके में नई जेल के लिए करीब 32 हेक्टेयर (384 बीघा) जमीन खरीदी गई है। सभी किसानों से बैनामे करा लिए गए हैं, लेकिन 3.5 हेक्टेयर जमीन का मामला अटक गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार 1.4 हेक्टेयर जमीन आशिक परवेज नाम के एक व्यक्ति की थी। देश विभाजन के दौरान आशिक परवेज जमीन छोड़कर चले गए, लेकिन कुछ लोगों ने दावा किया है कि 1.4 हेक्टेयर जमीन उनकी है। न्यायालय में इसका मुकदमा चल रहा है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है यह जमीन शत्रु संपत्ति है, लेकिन इस पर न्यायालय की मुहर लगना शेष रह गई है। दूसरा मामला 2.1 हेक्टेयर जमीन का है। यह जमीन गुनौरा वाजिदपुर के महेश नाम के व्यक्ति की है। अभी इस जमीन का वारिसान तय नहीं हुआ है। वारिसान तय होने पर यह मामला भी सुलझ जाएगा। जिला प्रशासन पूरी कोशिश में है कि ये दोनों मामले जल्द से जल्द सुलझ जाएं। उन्हें निपटाने की तैयारियां जोरों पर हैं। दिसंबर अंत तक दोनों मामले सुलझने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे नई जेल के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा।
अभी जिला कारागार में हैं क्षमता से तीन गुना बंदी
-जिला कारागार में 529 बंदियों को रखने की क्षमता है लेकिन इस समय जेल में 1396 बंदी हैं, जबकि अस्थाई जेल में 46 बंदी हैं। जेल में बंदियों की संख्या हमेशा ज्यादा रहती है। कभी 14 सौ तो कभी 15 सौ बंदियों से ऊपर निकल जाती है। मंगलवार को जेल में 1396 बंदियों की गिनती हुई।
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मार्च में ट्रांसफर हुए थे 30 कैदी
-जिला कारागार से मार्च में 30 कैदियों को गैर जनपद की जेलों में ट्रांसफर किया गया था। सभी कैदी सजायाफ्ता थे। एक माह पूर्व उनकी सूची जारी हुई थी। उसके बाद उन्हें अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिया गया।
नई जेल में खत्म होंगी समस्याएं
-गुनौरा वाजिदपुर के नजदीक नई जेल बनेगी। उसमें महिला और पुरुष बंदियों की बैरिक अलग-अलग बनेंगी। वहां बैरिकों की संख्या भी ज्यादा होगी। हर इंतजाम किया जाएगा। तब कहीं जेल की अव्यवस्थाओं पर लगाम लगेगी।
नई जेल के लिए के जमीन खरीदी जा चुकी है लेकिन 3.5 हेक्टेयर जमीन का मामला अटक हुआ है। 1.4 और 2.1 हेक्टेयर जमीन के मामले न्यायालय में चल रहे हैं। ये मामले जल्द सुलझ सकते हैं। उसके बाद जेल का निर्माण शुरू किया जाएगा।
डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक
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बदायूं-मेरठ हाईवे किनारे गुनौरा वाजिदपुर इलाके में नई जेल के लिए करीब 32 हेक्टेयर (384 बीघा) जमीन खरीदी गई है। सभी किसानों से बैनामे करा लिए गए हैं, लेकिन 3.5 हेक्टेयर जमीन का मामला अटक गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार 1.4 हेक्टेयर जमीन आशिक परवेज नाम के एक व्यक्ति की थी। देश विभाजन के दौरान आशिक परवेज जमीन छोड़कर चले गए, लेकिन कुछ लोगों ने दावा किया है कि 1.4 हेक्टेयर जमीन उनकी है। न्यायालय में इसका मुकदमा चल रहा है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है यह जमीन शत्रु संपत्ति है, लेकिन इस पर न्यायालय की मुहर लगना शेष रह गई है। दूसरा मामला 2.1 हेक्टेयर जमीन का है। यह जमीन गुनौरा वाजिदपुर के महेश नाम के व्यक्ति की है। अभी इस जमीन का वारिसान तय नहीं हुआ है। वारिसान तय होने पर यह मामला भी सुलझ जाएगा। जिला प्रशासन पूरी कोशिश में है कि ये दोनों मामले जल्द से जल्द सुलझ जाएं। उन्हें निपटाने की तैयारियां जोरों पर हैं। दिसंबर अंत तक दोनों मामले सुलझने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे नई जेल के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा।
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अभी जिला कारागार में हैं क्षमता से तीन गुना बंदी
-जिला कारागार में 529 बंदियों को रखने की क्षमता है लेकिन इस समय जेल में 1396 बंदी हैं, जबकि अस्थाई जेल में 46 बंदी हैं। जेल में बंदियों की संख्या हमेशा ज्यादा रहती है। कभी 14 सौ तो कभी 15 सौ बंदियों से ऊपर निकल जाती है। मंगलवार को जेल में 1396 बंदियों की गिनती हुई।
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मार्च में ट्रांसफर हुए थे 30 कैदी
-जिला कारागार से मार्च में 30 कैदियों को गैर जनपद की जेलों में ट्रांसफर किया गया था। सभी कैदी सजायाफ्ता थे। एक माह पूर्व उनकी सूची जारी हुई थी। उसके बाद उन्हें अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिया गया।
नई जेल में खत्म होंगी समस्याएं
-गुनौरा वाजिदपुर के नजदीक नई जेल बनेगी। उसमें महिला और पुरुष बंदियों की बैरिक अलग-अलग बनेंगी। वहां बैरिकों की संख्या भी ज्यादा होगी। हर इंतजाम किया जाएगा। तब कहीं जेल की अव्यवस्थाओं पर लगाम लगेगी।
नई जेल के लिए के जमीन खरीदी जा चुकी है लेकिन 3.5 हेक्टेयर जमीन का मामला अटक हुआ है। 1.4 और 2.1 हेक्टेयर जमीन के मामले न्यायालय में चल रहे हैं। ये मामले जल्द सुलझ सकते हैं। उसके बाद जेल का निर्माण शुरू किया जाएगा।
डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक