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मुसलमान अपने पैगम्बर के सिद्धांतों पर अमल करें : मुफ्ती नाजिम अहसानी
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सैदपुर। नगर के मोहल्ला खांची पूरब स्थित मस्जिद अमीर खान में जश्ने ईद मिलादुन्नबी का जलसा अकीदत और जोश-ओ-खरोश के साथ आयोजित किया गया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की और देश की उन्नति व अमन-चैन की दुआएं की गईं।
जलसे को खिताब करते हुए मुरादाबाद से आए मुफ़्ती नाज़िम अहसानी ने कहा कि मेरे पैग़म्बर-ए-इस्लाम को अल्लाह तआला ने सारी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा था। मुसलमानों को अपने नबी की सुन्नतों और नेक कार्यों पर अमल करने की जरूरत है। अगर मुसलमान अपने पैगम्बर के सिद्धांतों पर चले तो वह कभी परेशान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम ने पूरी जिंदगी झूठ, नफरत और बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया। संयम का दामन नहीं छोड़ा। उसी का नतीजा था कि तत्कालीन समाज में फैली तमाम बुराइयों पर विजय मिली। आज के दौर में भी हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज को शांति और भाईचारे की राह पर ले जाने का संकल्प लेना चाहिए। ईदगाह के पूर्व पेश इमाम मौलाना शाने आलम ख़ान ने कहा कि हम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश की 1500 वीं सालगिरह मना रहे हैं। ऐसे मौके पर हमें प्रेम, भाईचारा और इंसानियत की हिफाज़त करने का संदेश अपनाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि किसी भी मौके पर हुड़दंग या गैर-मुनासिब कामों से बचना चाहिए। जलसे में मोहम्मद अरवान रज़ा और बरेली से आए सैफ़ रज़ा ने भी विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में हाफ़िज़ अदीब रज़ा, मौलाना राहिल रज़ा ख़ान, हाफ़िज़ रिज़वान नूरी, क़ारी नौशाद रज़ा, हाफ़िज़ मौलाना रज़ा-उल-हसन, मौलाना शाहबाज़ रज़ा और मौलाना इफ़्तिख़ार रज़ा समेत कई उलेमा व शख्सियतें मौजूद रहीं। जलसे का संचालन आदिल रज़ा ने किया। संवाद
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जलसे को खिताब करते हुए मुरादाबाद से आए मुफ़्ती नाज़िम अहसानी ने कहा कि मेरे पैग़म्बर-ए-इस्लाम को अल्लाह तआला ने सारी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा था। मुसलमानों को अपने नबी की सुन्नतों और नेक कार्यों पर अमल करने की जरूरत है। अगर मुसलमान अपने पैगम्बर के सिद्धांतों पर चले तो वह कभी परेशान नहीं हो सकता।
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उन्होंने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम ने पूरी जिंदगी झूठ, नफरत और बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया। संयम का दामन नहीं छोड़ा। उसी का नतीजा था कि तत्कालीन समाज में फैली तमाम बुराइयों पर विजय मिली। आज के दौर में भी हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज को शांति और भाईचारे की राह पर ले जाने का संकल्प लेना चाहिए। ईदगाह के पूर्व पेश इमाम मौलाना शाने आलम ख़ान ने कहा कि हम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश की 1500 वीं सालगिरह मना रहे हैं। ऐसे मौके पर हमें प्रेम, भाईचारा और इंसानियत की हिफाज़त करने का संदेश अपनाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि किसी भी मौके पर हुड़दंग या गैर-मुनासिब कामों से बचना चाहिए। जलसे में मोहम्मद अरवान रज़ा और बरेली से आए सैफ़ रज़ा ने भी विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में हाफ़िज़ अदीब रज़ा, मौलाना राहिल रज़ा ख़ान, हाफ़िज़ रिज़वान नूरी, क़ारी नौशाद रज़ा, हाफ़िज़ मौलाना रज़ा-उल-हसन, मौलाना शाहबाज़ रज़ा और मौलाना इफ़्तिख़ार रज़ा समेत कई उलेमा व शख्सियतें मौजूद रहीं। जलसे का संचालन आदिल रज़ा ने किया। संवाद