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‘...छोड़कर सारे जमाने को चली आऊंगी’
sheswan
Updated Fri, 02 Jan 2015 07:18 PM IST
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नव वर्ष पर नगर पालिका परिषद परिसर में मुशायरा हुआ। इसमें तमाम नामचीन शायरों ने अपना कलाम पेश किया। देर रात तक चले मुशायरा में श्रोताओं की भारी भीड़ जुटी रही। मुख्य अतिथि नगर पालिका परिषद अध्यक्ष नूरउद्दीन और एसडीएम हरिशंकर यादव ने शमां रोशन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तौहीर अतर और कासिर सहसवानी ने नात पढ़कर मुशायरे को गति प्रदान की।
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शायर अंसार अश्क ने कहा -
न मय न मयखाना न यहां कोई साकी है।
तूने पिलायी है जो नजरों से
उसका नशा अभी तक बाकी है।।
रंजना हया ने सुनाया-
बात बिगडे़ तो मनाने चली आऊंगी,
किसको इन्कार है आने को चली आऊंगी।
उम्रभर साथ निभाने का तू वादा कर ले,
छोड़कर सारे जमाने को चली आऊंगी।।
शायरा महनाज ने कहा -
जब कभी वह मेरे कूचे से गुजर जाता है।
नूर ही नूर फिजाआें में बिखर जाता है।।
कासिर सहसवानी ने पढा-
उन रोटियों से तो हमें मरना कुबूल है।
जो रोटियां नसीब हों किरदार बेचकर।।
मुईज अहमद ने फरमाया-
सुलगती रेत ने ये प्यास की शिद्दत से कहा।
यकीं खुदा पे है, पानी यहीं से निकलेगा।।
नगमा बरेलवी ने पढ़ा-
अब ज्यादा खुदा से मांगू भी क्या।
मैं तेरे पास हूं तू मेरे पास है।।
इनके अलावा डॉ. तौहीद अख्तर ककरालवी, साहिल राजस्थानी, मोहम्मद यूसुफ, अखलाक सहसवानी, असर देहलवी, जमशेद बदांयूनी आदि ने भी अपना कलाम पेश किया।