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Budaun News: मेडिकल कॉलेज में शुरू नहीं हो सकी एमआरआई व सीटी स्कैन की सुविधा
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बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अब तक एमआईआर व सीटी स्कैन की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है, ऐसे में मरीजों और तीमारदारों को दिक्कत आ रही है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन दो हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद अब तक यहां एमआरआई की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। नतीजतन मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। मरीजों को दूसरे जिलों में जाकर जांच करानी पड़ रही है।
इसी क्रम में करीब छह माह पहले मेडिकल कॉलेज में लगाई गई सीटी स्कैन मशीन भी अब तक शुरू नहीं हो सकी है। गंभीर घायल मरीजों की सीटी स्कैन की जांच जरूरी होती है, लेकिन डॉक्टर मरीजों को जिला अस्पताल भेज रहे हैं। ऐसे में तीमारदारों को पांच सौ रुपये में एंबुलेंस बुक कर सात किलोमीटर दूर जिला अस्पताल में मरीज को ले जाना पड़ रहा है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज से रोजाना 30 से 35 मरीज सीटी स्कैन की जांच के लिए जिला अस्पताल भेजे जा रहे हैं तो एमआरआई जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर जाना पड़ रहा है। निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर एमआरआई कराने के लिए मरीजों को पांच से दस हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है।
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चार महीने से अल्ट्रासाउंड सेवा भी ठप
मेडिकल कॉलेज में रेडियोलाॅजिस्ट अवकाश पर गए तो उनका कोई विकल्प तलाश नहीं किया गया। ऐसे में मरीजों को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर लाइन लगानी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज गए राजू, आजाद, श्रीपाल सिंह, मनोज चौहान आदि ने बताया अल्ट्रासाउंड के चक्कर में दो दिन से दवा नहीं मिल पा रही है। शहर में जाकर निजी सेंटर पर छह सौ रुपये खर्च कर जांच हो सकी है। तब तीसरे दिन दवा मिली है।
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तीमारदारों का दर्द
दोस्त की एमआरआई करानी थी तो मेडिकल कॉलेज लेकर गए थे। वहां एमआईआर जांच नहीं हो रही थी। कक्ष पर ताला लगा था। पूछकर लौट आए। बरेली जाकर छह हजार रुपये खर्च कर जांच करानी पड़ी।
-सोमेश मिश्रा, बरीपुरा
एमआरआई सेंटर का संचालन न होने से परेशानी हो रही है। कई बार प्राचार्य से मिलकर सेंटर संचालित कराने के लिए ज्ञापन दे चुके हैं। इसके बाद भी एमआरआई व सीटी स्कैन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। -राजेश सक्सेना, मंडल प्रवक्ता, भाकियू
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सीटी स्कैन की मशीन लगी है। एमआरआई रूम है लेकिन अभी मशीन ही नहीं लगी है। सीटी स्कैन की सुविधा जल्द ही शुरू कराई जाएगी। रेडियोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की जाएगी। - डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूं
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन दो हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद अब तक यहां एमआरआई की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। नतीजतन मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। मरीजों को दूसरे जिलों में जाकर जांच करानी पड़ रही है।
इसी क्रम में करीब छह माह पहले मेडिकल कॉलेज में लगाई गई सीटी स्कैन मशीन भी अब तक शुरू नहीं हो सकी है। गंभीर घायल मरीजों की सीटी स्कैन की जांच जरूरी होती है, लेकिन डॉक्टर मरीजों को जिला अस्पताल भेज रहे हैं। ऐसे में तीमारदारों को पांच सौ रुपये में एंबुलेंस बुक कर सात किलोमीटर दूर जिला अस्पताल में मरीज को ले जाना पड़ रहा है।
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फिलहाल मेडिकल कॉलेज से रोजाना 30 से 35 मरीज सीटी स्कैन की जांच के लिए जिला अस्पताल भेजे जा रहे हैं तो एमआरआई जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर जाना पड़ रहा है। निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर एमआरआई कराने के लिए मरीजों को पांच से दस हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है।
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चार महीने से अल्ट्रासाउंड सेवा भी ठप
मेडिकल कॉलेज में रेडियोलाॅजिस्ट अवकाश पर गए तो उनका कोई विकल्प तलाश नहीं किया गया। ऐसे में मरीजों को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर लाइन लगानी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज गए राजू, आजाद, श्रीपाल सिंह, मनोज चौहान आदि ने बताया अल्ट्रासाउंड के चक्कर में दो दिन से दवा नहीं मिल पा रही है। शहर में जाकर निजी सेंटर पर छह सौ रुपये खर्च कर जांच हो सकी है। तब तीसरे दिन दवा मिली है।
तीमारदारों का दर्द
दोस्त की एमआरआई करानी थी तो मेडिकल कॉलेज लेकर गए थे। वहां एमआईआर जांच नहीं हो रही थी। कक्ष पर ताला लगा था। पूछकर लौट आए। बरेली जाकर छह हजार रुपये खर्च कर जांच करानी पड़ी।
-सोमेश मिश्रा, बरीपुरा
एमआरआई सेंटर का संचालन न होने से परेशानी हो रही है। कई बार प्राचार्य से मिलकर सेंटर संचालित कराने के लिए ज्ञापन दे चुके हैं। इसके बाद भी एमआरआई व सीटी स्कैन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। -राजेश सक्सेना, मंडल प्रवक्ता, भाकियू
सीटी स्कैन की मशीन लगी है। एमआरआई रूम है लेकिन अभी मशीन ही नहीं लगी है। सीटी स्कैन की सुविधा जल्द ही शुरू कराई जाएगी। रेडियोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की जाएगी। - डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूं