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सांसद धर्मेंद्र ने दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों के मामले उठाए
बदायूं, ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2016 11:57 PM IST
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संसद में रखा अपनी पार्टी का पक्ष, बोले, सपा ने आरक्षण बढ़ाने का किया काम
85 प्रतिशत लोगों पर अन्याय और अत्याचार के बाद समर्थ भारत की बात बेमानी
समाजवादी पार्टी से बदायूं के सांसद धर्मेंद्र यादव ने मानसून सत्र के दौरान संसद में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अन्याय व अत्याचार का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस संबंध में अपनी पार्टी का पक्ष भी सदन के समक्ष रखा।
सत्र में उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को सुनकर लग रहा है कि दलितों के सबसे मजबूत वकील व पैरोकार सत्तापक्ष के लोग ही हैं। उन्होंने भाजपा नीत सरकार से पूछा, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म क्यों अपनाया? गांधी जी के हत्यारे गोडसे की आलोचना आज तक क्यों नहीं की गई? बाबा साहब पर राजनीति करने वाले सत्तापक्ष के नेता ये जवाब दें कि बाबा साहब पर क्या-क्या संकट आए? दलित भाइयों को मंदिर में क्यों नहीं घुसने दिया गया और इसके जिम्मेदार कौन लोग हैं? जहां तक उनकी पार्टी की राजनीति का सवाल है तो उसकी सोच और विचारधारा सदैव समतामूलक समाज की रही है। डॉ. राममनोहर लोहिया की विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम मुलायम सिंह यादव कर रहे हैं।
उन्होंने सदन को बताया नेताजी ने राजनीति की शुरूआत भी नहीं की थी, उन्होंने अपने छात्र जीवन में एक दलित मित्र के घर खाना खाया था, जिसके फलस्वरूप उनको ग्रामवासियों ने समाज से अलग कर दिया था। समाजवादियों ने दलितों के सम्मान में ऐसे कष्ट झेले हैं। उप्र के अंदर अंबेडकर गांव, दलितों का आरक्षण 21 से 23 प्रतिशत बढ़ाने की परिकल्पना सिर्फ समाजवादी पार्टी ने की थी। यूपी एससी के माध्यम से दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ क्या हो रहा है? इसका जवाब सत्तापक्ष के मंत्रियों को देना होगा। प्रधानमंत्री ने जिस तरह से गुजरात की घटना पर एक गंभीर बयान दिया है, बेहतर होता प्रधानमंत्री दांदरी की घटना पर, गौ प्रेमियों पर बयान देते। दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक मिलाकर कम से कम 80-85 प्रतिशत की संख्या में हैं, इन सभी पर अन्याय व अत्याचार हो रहा है और सत्तापक्ष के लोग चुप बैठे हैं, ऐसे में समर्थ भारत की कल्पना बेमानी है।
85 प्रतिशत लोगों पर अन्याय और अत्याचार के बाद समर्थ भारत की बात बेमानी
समाजवादी पार्टी से बदायूं के सांसद धर्मेंद्र यादव ने मानसून सत्र के दौरान संसद में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अन्याय व अत्याचार का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस संबंध में अपनी पार्टी का पक्ष भी सदन के समक्ष रखा।
सत्र में उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को सुनकर लग रहा है कि दलितों के सबसे मजबूत वकील व पैरोकार सत्तापक्ष के लोग ही हैं। उन्होंने भाजपा नीत सरकार से पूछा, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म क्यों अपनाया? गांधी जी के हत्यारे गोडसे की आलोचना आज तक क्यों नहीं की गई? बाबा साहब पर राजनीति करने वाले सत्तापक्ष के नेता ये जवाब दें कि बाबा साहब पर क्या-क्या संकट आए? दलित भाइयों को मंदिर में क्यों नहीं घुसने दिया गया और इसके जिम्मेदार कौन लोग हैं? जहां तक उनकी पार्टी की राजनीति का सवाल है तो उसकी सोच और विचारधारा सदैव समतामूलक समाज की रही है। डॉ. राममनोहर लोहिया की विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम मुलायम सिंह यादव कर रहे हैं।
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उन्होंने सदन को बताया नेताजी ने राजनीति की शुरूआत भी नहीं की थी, उन्होंने अपने छात्र जीवन में एक दलित मित्र के घर खाना खाया था, जिसके फलस्वरूप उनको ग्रामवासियों ने समाज से अलग कर दिया था। समाजवादियों ने दलितों के सम्मान में ऐसे कष्ट झेले हैं। उप्र के अंदर अंबेडकर गांव, दलितों का आरक्षण 21 से 23 प्रतिशत बढ़ाने की परिकल्पना सिर्फ समाजवादी पार्टी ने की थी। यूपी एससी के माध्यम से दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ क्या हो रहा है? इसका जवाब सत्तापक्ष के मंत्रियों को देना होगा। प्रधानमंत्री ने जिस तरह से गुजरात की घटना पर एक गंभीर बयान दिया है, बेहतर होता प्रधानमंत्री दांदरी की घटना पर, गौ प्रेमियों पर बयान देते। दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक मिलाकर कम से कम 80-85 प्रतिशत की संख्या में हैं, इन सभी पर अन्याय व अत्याचार हो रहा है और सत्तापक्ष के लोग चुप बैठे हैं, ऐसे में समर्थ भारत की कल्पना बेमानी है।
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