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कुपोषण के खिलाफ चल  रही जंग की धार हुई कुंद

Sat, 14 May 2016 12:00 AM IST
पीयूष दुबे  बदायूं।
पीयूष दुबे  बदायूं। Updated Sat, 14 May 2016 12:00 AM IST
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Moving against malnutrition Rust has been blunt edge
लड़ी जा रही जंग - फोटो : अमर उजाला
जिले में हर छठा बच्चा कुपोषित और 20वां अति कुपोषित 
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जनपद में 48,323 कुपोषित, 16,316 अतिकुपोषित बच्चे 

राज्य पोषण मिशन की कमान खुद डीएम संभाले हुए हैं। बावजूद इसके जिले में कुपोषण के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में खास कामयाबी नहीं मिली है। या यूं कहें कि बस जंग की रणभेरी बजाकर लकीर पीटी जा रही है, तभी तो जिले में हर छठा बच्चा कुपोषित और 20वां बच्चा अतिकुपोषित है। इस तरह अगर कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ी गई, तो शायद आगामी कई सालों तक जिला कुपोषण से मुक्त होता नजर नहीं आ रहा है। 
आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या है कि जिला कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाएगा, उसकी कई वजह भी हैं। इससे पहले यह भी बता दें कि जिले में संचालित हो रहे तमाम आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन कागजों में हो रहा है। डीएम की सख्ती के बाद आंगनबाड़ी केंद्र खुलने में सुधार तो हुआ, लेकिन उनमें बच्चों की संख्या नहीं बढ़ सकी। कारण, अधिकांश ग्रामीण और शहरी जानते हैं। अगर ग्रामीण क्षेत्रों का बारीकी से निरीक्षण किया जाए, तो बच्चों को मिलने वाला पुष्टाहार और गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाला पोषाहार जानवरों की खुराक बन रहा है। कई बार ग्रामीणों द्वारा शिकायत करने पर मामले पकड़े भी गए, लेकिन ब्लाक कार्यालयों पर व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से इस पर पूरी तरह से लगाम नहीं लग सकी। 
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जिले में बने एक पोषण पुनर्वास केंद्र के 10 बेड में से सात बेड खाली पड़े हैं, क्योंकि उनमें आंगनबाड़ी वर्कर ने अपने गांव के बच्चों को भर्ती कराने में उत्सुकता नहीं दिखाई। कुपोषित बच्चों को कुपोषण मुक्त रखने के लिए चलाए जा रहे अभियान धरातल तक पहुंचते ही फेल हो जाते हैं। 
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फैक्ट फाइल 
शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चे      3,63,372 
वजन लिए गए बच्चों की संख्या    3,19,253 
कुपोषित बच्चों की संख्या            48,323 
अतिकुपोषित बच्चों की संख्या       16,316 

महज 112 बच्चे हुए अतिकुपोषण से मुक्त 
 जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र 31 मई को खोला गया था। इसमें अप्रैल के अंत 132 अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराया गया था, जिसमें से 112 बच्चों को करीब एक साल गुजर जाने के बाद अतिकुपोषण से मुक्त किया जा सका, जबकि 20 बच्चों की हालत गंभीर होने पर रेफर किया गया या फिर उनके घरवाले खुद ही छुट्टी करा ले गए। वर्तमान स्थिति में केवल सात बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 16316 है। इस गति से इन बच्चों को अतिकुपोषण से मुक्त कराया गया तो केवल छह सौ बच्चों को ही अतिकुपोषण से मुक्त किया जा सकेगा। 

अब तक जो भी अतिकुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराए गए, उनका बेहतरी के साथ इलाज किया गया। साथ ही तय समय में उनको कुपोषण से मुक्त कराया गया। यहां पर 10 बेड हैं तो इससे ज्यादा बच्चों को भर्ती भी नहीं किया जा सकता है। 
-डॉ. नुरुल हसन, इंचार्ज, पोषण पुनर्वास केंद्र 

दो आंगनबाड़ी केंद्रों में मिले 42 बच्चे 
बदायूं। राज्य पोषण मिशन के तहत सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया ने म्याऊं ब्लाक का चितौरा गांव गोद लिया गया है। गुरुवार को निरीक्षण के दौरान उन्हें गोद लिए गांव में स्थित दो आंगनबाड़ी केंद्रों पर केवल 42 बच्चे मौजूद मिले। इसमें प्रथम केंद्र पर 82 बच्चे नामांकित थे, जिसमें 30 मौजूद और द्वितीय केंद्र पर नामांकित 85 बच्चों में से केवल 12 बच्चे मौजूद मिले। इस पर सीडीओ ने दोनों केंद्रों की कार्यकत्रियों की फटकार लगाते हुए सुधार करने के निर्देश दिए। वहीं गर्भवती महिलाओं ने पूछताछ के दौरान बताया कि उन लोगों को आयरन की गोलियां और पोषाहार का मिल रहा है। सीडीओ के तेवर देखकर मौके पर मौजूद डीपीओ और सीडीपीओ ने भी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सुधार करने के निर्देश दिए।

सभी अतिकुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती करने योग्य नहीं होते हैं। उन्हें वहां पर तमाम मानकों को देखते हुए ही भर्ती किया जाता है। यदि पोषण पुनर्वास केंद्र के बेड खाली हैं तो अतिकुपोषित में भी गंभीर बच्चों को एडमिट कराया जाएगा।

-निर्मल वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी 

अतिकुपोषित बच्चों का कुपोषण मुक्त करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र के अलावा उनके गांवों में पोषाहार की दोगुनी खुराक देेने के साथ ही लगातार देखरेख कराई जा रही है। वहां की आंगनबाड़ी वर्कर एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी इस पर लगातार नजर रखे हैं। जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
-प्रताप सिंह भदौरिया, मुख्य विकास अधिकारी 
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