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शाहजहांपुर से सप्लाई....जमकर बिक रही %मिलावटी% मिठाई
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बदायूं। जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों की जमकर बिक्री हो रही है। कुछ दुकानदार चंद पैसे अधिक कमाने के लालच में गुणवता से समझौता करने लगे हैं। मिठाई की दुकानों पर तो यह मिलावट का खेल कुछ ज्यादा ही चल रहा है। रविवार को मिलावटी सोनपपड़ी खाने से हजरतपुर में एक दर्जन से अधिक लोगों की हालत बिगड़ गई थी। पता चला है कि दातागंज समेत आसपास के क्षेत्र में यह मिलावटी मिठाई शाहजहांपुर से सप्लाई होती है जो बरेली के फरीदपुर और फतेहगंज पूर्वी से होते हुए यहां आती है। फरीदपुर और फतेहगंज के कई व्यापारी भी इस गोरखधंधे में शामिल बताए जाते हैं। हालात ये हैं कि तड़के ही यहां मोटरसाइकिलों और टाटा मैजिक आदि में लदकर ये मिठाई यहां आकर दुकानों में सप्लाई हो जाती है।
पिछले कुछ महीनों में जिले में मिलावटी मिठाइयों की बिक्री अधिक होने लगी है, लेकिन विभागीय अधिकारियों का ध्यान अभी इस ओर नहीं जा रहा हैं। ऐसे में जिले में मिलावटखोर अपने पैर पसारने लगे हैं। शहर की बात करें तो यहां एक से बढ़कर एक बड़ी दिखने वाली दुकानों पर मिलावट का खेल पहले ही उजागर हो चुका है। शहर के नामचीन रेस्टोरेंट और मिठाई की दुुकानों पर मिलावटी मिठाई मिलने के बाद जुर्माना भी डाला जा चुका है। कई जगहों पर नमूने भी फेल हो चुुके हैं। विभाग होली, दीवाली रक्षाबंधन आदि त्योहारों पर छापे डाल चुका है, लेकिन यह भी औपचारिकता तक ही सिमटकर रह जाते हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल देहात क्षेत्रों का है। यहां सस्ती मिठाई के चक्कर में मिलावट की खपत ज्यादा है। ग्रामीण जनता सस्ते के चक्कर में सेहत से समझौता करने से भी नहीं चूकती, जिसका फायदा मिलावटखोर बखूबी उठाते हैं। रविवार को हजरतपुर में दसवां संस्कार में आए लोग मिलावटी सोनपपड़ी खाने से बीमार हो गए थे। वह तो गनीमत रही कि किसी की हालत ज्यादा नहीं बिगड़ी, वरना लेने के देने पड़ जाते।
सूत्रों की मानें तो शाहजहांपुर से मिलावटी मिठाइयां जिले में दातागंज की ओर से आ रही हैं, जो रोजाना सुबह दातागंज के बेलाडांडी पुल से होकर जिले में लाई जाती हैं। ग्रामीणों की माने तो तड़के अंधेरे में ही वहां से रोजाना बाइक और कार में सवार मिठाइयां लेकर आते हैं, जो देहात क्षेत्र में थोक के भाव में बेचकर चले जाते हैं।
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न कच्चे माल का झंझट न कारीगरों की जरूरत
शाहजहांपुर से जिले में जो मिलावटी मिठाई आ रही है, उससे दुकानदारों को काफी सहूलियत हो रही है। एक तो उन्हें कच्चा सामान अन्य दुकानों से एकत्र नहीं करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उनका काफी समय खराब होता था, दूसरा उन्हें बनी बनाई मिठाइयां मिल रही हैं, जिससे कारीगर का भी झंझट बच रहा है। कारीगरों को देने वाले रुपये की भी बचत हो रही है।
14 सौ रुपये में मिल रहा 15 किलो रसगुल्ले का पीपा
रसगुल्ले का एक पीस, जो करीब 10 से 15 रुपये का बिकता है, मिलावटखोर उसका 15 किलो का पीपा दुकानदारों को केवल 14 सौ रुपये मेें मुहैया करा रहे हैं। सोनपपड़ी के भाव तो आश्चर्य में डालने वाले हैं। सोनपपड़ी 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दी जा रही है जो दुकानदार रिटेल में 120 से 150 रुपये किलो तक बेच रहे हैं। यानी एक किलो पर दो से ढाई गुना मुनाफा वे कमा रहे हैं।
शाहजहांपुर से दातागंज व उसके आसपास इस तरह की मिठाई आ रही है, इसकी कोई जानकारी नहीं है और न ही इस संबंध में अभी तक कोई शिकायत आई है। इसको लेकर अचानक चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, ताकि यदि ऐसा है तो उनको पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -चंद्रशेखर, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए
सैंपल फेल आए तो कोर्ट ने डाला जुर्माना
बदायूं। त्योहार आते ही मिलावटी खाद्य पदार्थों की ब्रिकी बढ़ जाती है। ऐसे में मुनाफाखोर भी सक्रिय हो जाते हैं, जो लोगों की सेहत की ओर ध्यान न देते हुए खुद की जेब की ओर ध्यान देते है। ऐसे मुनाफाखोरों पर शिकंजा कसने के लिए विभाग की ओर से लगातार जिले में छापेमारी अभियान चलाया जाता है।
विभाग की ओर से गत वर्षों में जिले में कई बार अभियान चलाया गया। इस दौरान टीम की ओर से कई चीजों के सैंपल लिए गए थे, जिन्हें जांच के लिए विभाग ने लखनऊ लैब के लिए भेजा था। वहां से मिली रिपोर्ट में कई में खाने-पीने की चीजों में मिलावट की पुष्टि हुई। पिछले एक हफ्ते में ऐसे 32 केस में कोर्ट की ओर से फैसला सुनाया गया। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धनंजय शुक्ला ने बताया कि कोर्ट की ओर से बदायूं के खोया आढ़ती धर्मेंद्र गुप्ता पर 50 हजार रुपये, दूूसरे खोया व्यापारी मुकेश गुप्ता पर 42 हजार रुपये जुर्माना कोर्ट ने डाला। नई सराय निवासी निजाकत की बेकरी में बन रहा खस्ता बिस्कुट का नमूूना भी फेल आया था, जिस पर कोर्ट की ओर से 20 हजार रुपये का जुर्माना डाला गया। दौलत इंडस्ट्री बहजोई द्वारा जिले में सरसों का तेल बेचा जा रहा था। उनके तेल के पैकेट की जांच कराई गई तो वह भी मानक अनुरूप नहीं निकला। उस पर 45 हजार रुपये का जुर्माना डाला गया। म्याऊं में एक स्पेलर व एक अन्य जगह पर खुला तेल बेचा जा रहा था। इसमें रुदायन निवासी रवि कुमार पर एक लाख व म्याऊं के मोहम्मद हशमत पर 60 हजार रुपये जुर्माना डाला गया। वहीं इस्लामनगर में नवीन कुमार के यहां से कारगिल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का रिफाइंड का नमूना लिया गया था, जो फेल आया, उस पर डेढ़ लाख रुपये जुर्माना डाला है।
मिलावट का कारोबार है चरम पर
खाद्य विभाग व प्रशासन की लापरवाही के चलते बिसौली में भी मिलावटी मिठाई का कारोबार करने वाले मोटा मुनाफा कमाने में जुटे हैं। नगर के मोहल्ला सराय, बुधबाजार व होलीचौक में मिलावटी मिठाइयां तैयार कर कई जगह सप्लाई की जाती हैं। त्योहार के नजदीक आते ही मिलावटखोर दिन रात एक करके बड़े पैमाने पर मिलावटी मिठाई तैयार करते हैं। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने में नहीं चूकते। रक्षाबंधन पर नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों क्विंटल मिठाई की बिक्री हो गयी, जो कि अधिकांश मिलावटखोरों से ही खरीदी गई थी।
विभाग की बरस रही मेहरबानी
उसहैत कस्बे में मिठाइयों की करीब एक दर्जन से अधिक दुकानें है। जिन पर विभाग की मेहरबानी बरस रही है। हालात ये हैं कि इन दुकानों पर आज तक विभाग की ओर से एक भी सैंपल तक नहीं लिए गए हैं। जिस वजह से ये दुकानदार मनचाहे तरीके से बनाई हुई मिठाइयों की बिक्री करते हैं।
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पिछले कुछ महीनों में जिले में मिलावटी मिठाइयों की बिक्री अधिक होने लगी है, लेकिन विभागीय अधिकारियों का ध्यान अभी इस ओर नहीं जा रहा हैं। ऐसे में जिले में मिलावटखोर अपने पैर पसारने लगे हैं। शहर की बात करें तो यहां एक से बढ़कर एक बड़ी दिखने वाली दुकानों पर मिलावट का खेल पहले ही उजागर हो चुका है। शहर के नामचीन रेस्टोरेंट और मिठाई की दुुकानों पर मिलावटी मिठाई मिलने के बाद जुर्माना भी डाला जा चुका है। कई जगहों पर नमूने भी फेल हो चुुके हैं। विभाग होली, दीवाली रक्षाबंधन आदि त्योहारों पर छापे डाल चुका है, लेकिन यह भी औपचारिकता तक ही सिमटकर रह जाते हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल देहात क्षेत्रों का है। यहां सस्ती मिठाई के चक्कर में मिलावट की खपत ज्यादा है। ग्रामीण जनता सस्ते के चक्कर में सेहत से समझौता करने से भी नहीं चूकती, जिसका फायदा मिलावटखोर बखूबी उठाते हैं। रविवार को हजरतपुर में दसवां संस्कार में आए लोग मिलावटी सोनपपड़ी खाने से बीमार हो गए थे। वह तो गनीमत रही कि किसी की हालत ज्यादा नहीं बिगड़ी, वरना लेने के देने पड़ जाते।
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सूत्रों की मानें तो शाहजहांपुर से मिलावटी मिठाइयां जिले में दातागंज की ओर से आ रही हैं, जो रोजाना सुबह दातागंज के बेलाडांडी पुल से होकर जिले में लाई जाती हैं। ग्रामीणों की माने तो तड़के अंधेरे में ही वहां से रोजाना बाइक और कार में सवार मिठाइयां लेकर आते हैं, जो देहात क्षेत्र में थोक के भाव में बेचकर चले जाते हैं।
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न कच्चे माल का झंझट न कारीगरों की जरूरत
शाहजहांपुर से जिले में जो मिलावटी मिठाई आ रही है, उससे दुकानदारों को काफी सहूलियत हो रही है। एक तो उन्हें कच्चा सामान अन्य दुकानों से एकत्र नहीं करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उनका काफी समय खराब होता था, दूसरा उन्हें बनी बनाई मिठाइयां मिल रही हैं, जिससे कारीगर का भी झंझट बच रहा है। कारीगरों को देने वाले रुपये की भी बचत हो रही है।
14 सौ रुपये में मिल रहा 15 किलो रसगुल्ले का पीपा
रसगुल्ले का एक पीस, जो करीब 10 से 15 रुपये का बिकता है, मिलावटखोर उसका 15 किलो का पीपा दुकानदारों को केवल 14 सौ रुपये मेें मुहैया करा रहे हैं। सोनपपड़ी के भाव तो आश्चर्य में डालने वाले हैं। सोनपपड़ी 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दी जा रही है जो दुकानदार रिटेल में 120 से 150 रुपये किलो तक बेच रहे हैं। यानी एक किलो पर दो से ढाई गुना मुनाफा वे कमा रहे हैं।
शाहजहांपुर से दातागंज व उसके आसपास इस तरह की मिठाई आ रही है, इसकी कोई जानकारी नहीं है और न ही इस संबंध में अभी तक कोई शिकायत आई है। इसको लेकर अचानक चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, ताकि यदि ऐसा है तो उनको पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -चंद्रशेखर, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए
सैंपल फेल आए तो कोर्ट ने डाला जुर्माना
बदायूं। त्योहार आते ही मिलावटी खाद्य पदार्थों की ब्रिकी बढ़ जाती है। ऐसे में मुनाफाखोर भी सक्रिय हो जाते हैं, जो लोगों की सेहत की ओर ध्यान न देते हुए खुद की जेब की ओर ध्यान देते है। ऐसे मुनाफाखोरों पर शिकंजा कसने के लिए विभाग की ओर से लगातार जिले में छापेमारी अभियान चलाया जाता है।
विभाग की ओर से गत वर्षों में जिले में कई बार अभियान चलाया गया। इस दौरान टीम की ओर से कई चीजों के सैंपल लिए गए थे, जिन्हें जांच के लिए विभाग ने लखनऊ लैब के लिए भेजा था। वहां से मिली रिपोर्ट में कई में खाने-पीने की चीजों में मिलावट की पुष्टि हुई। पिछले एक हफ्ते में ऐसे 32 केस में कोर्ट की ओर से फैसला सुनाया गया। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धनंजय शुक्ला ने बताया कि कोर्ट की ओर से बदायूं के खोया आढ़ती धर्मेंद्र गुप्ता पर 50 हजार रुपये, दूूसरे खोया व्यापारी मुकेश गुप्ता पर 42 हजार रुपये जुर्माना कोर्ट ने डाला। नई सराय निवासी निजाकत की बेकरी में बन रहा खस्ता बिस्कुट का नमूूना भी फेल आया था, जिस पर कोर्ट की ओर से 20 हजार रुपये का जुर्माना डाला गया। दौलत इंडस्ट्री बहजोई द्वारा जिले में सरसों का तेल बेचा जा रहा था। उनके तेल के पैकेट की जांच कराई गई तो वह भी मानक अनुरूप नहीं निकला। उस पर 45 हजार रुपये का जुर्माना डाला गया। म्याऊं में एक स्पेलर व एक अन्य जगह पर खुला तेल बेचा जा रहा था। इसमें रुदायन निवासी रवि कुमार पर एक लाख व म्याऊं के मोहम्मद हशमत पर 60 हजार रुपये जुर्माना डाला गया। वहीं इस्लामनगर में नवीन कुमार के यहां से कारगिल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का रिफाइंड का नमूना लिया गया था, जो फेल आया, उस पर डेढ़ लाख रुपये जुर्माना डाला है।
मिलावट का कारोबार है चरम पर
खाद्य विभाग व प्रशासन की लापरवाही के चलते बिसौली में भी मिलावटी मिठाई का कारोबार करने वाले मोटा मुनाफा कमाने में जुटे हैं। नगर के मोहल्ला सराय, बुधबाजार व होलीचौक में मिलावटी मिठाइयां तैयार कर कई जगह सप्लाई की जाती हैं। त्योहार के नजदीक आते ही मिलावटखोर दिन रात एक करके बड़े पैमाने पर मिलावटी मिठाई तैयार करते हैं। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने में नहीं चूकते। रक्षाबंधन पर नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों क्विंटल मिठाई की बिक्री हो गयी, जो कि अधिकांश मिलावटखोरों से ही खरीदी गई थी।
विभाग की बरस रही मेहरबानी
उसहैत कस्बे में मिठाइयों की करीब एक दर्जन से अधिक दुकानें है। जिन पर विभाग की मेहरबानी बरस रही है। हालात ये हैं कि इन दुकानों पर आज तक विभाग की ओर से एक भी सैंपल तक नहीं लिए गए हैं। जिस वजह से ये दुकानदार मनचाहे तरीके से बनाई हुई मिठाइयों की बिक्री करते हैं।