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मेला ककोड़ा : अंतिम आकार ले रहा अस्थायी शहर

Tue, 16 Nov 2021 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 16 Nov 2021 12:57 AM IST
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MELA KAKORA
बदायूं। गंगा तट पर रुहेलखंड के मिनी कुंभ ककोड़ा मेले में रौनक बढ़ने लगी है। देवोत्थान एकादशी के बाद सोमवार को काफी संख्या में परिवार कल्पवास करने के लिए गंगा तट पर पहुंच गए। जिला पंचायत की ओर से भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है। कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान 19 नवंबर को होना है। इससे पहले गंगा तट पर तंबुओं का अस्थायी शहर अंतिम आकार ले रहा है।
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मेला स्थल पर कच्ची सड़कें बनाने का काम लगभग पूरा हो गया है। घाट बनाने का काम पूरा करने के साथ गंगा में गहराई वाले स्थानों पर खतरे का संकेत देने के लिए बल्लियां लगा दी गईं हैं। मेला स्थल पर सजावट के साथ मुख्य गेट बनाने का काम अंतिम चरण में है। रविवार को गंगा तट पर देवोत्थान एकादशी मनाने के बाद सोमवार को भी लोगों ने गंगा स्नान किया और गंगा तट पर खिचड़ी भी बनाई। मेला ककोड़ा में दुकानें लगाने का काम अंतिम चरण में है। खेल-तमाशों के साथ सर्कस भी लगाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार मेला स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। मेला स्थल पर फायर ब्रिगेड के बाद एंबुलेंस और मेडिकल टीम की तैनाती भी कर दी गई है। कुर्मी समाज का मेला काफी तादाद में पहुंच चुका है। सोमवार से बरेली के श्रद्धालुओं का भी मेला पहुंचना शुरू हो गया।
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मेला स्थल पर खैराती चौक से लेकर हलवाई गली तक पूरा बाजार सज गया है। इस सबके बीच दुकानदारों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। दुमेला में वीआईपी कैंपस में पंडाल लगाने के काम को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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मौत के कुएं में देखे जा सकेंगे हैरतंगेज करतब
मेला ककोड़ा में लगने वाले मौत के कुएं में एक साथ 10 बाइक दौड़ाई जाएंगी। मौत के कुएं का काम भी लगभग पूरा कर लिया गया है। मौत के कुएं में एक साथ पांच कार भी दौड़ती देखी जा सकती हैं। हालांकि, इस बार जिला पंचायत ने तहबाजारी में इजाफा किया है। ऐसे में मेलार्थियों को मनोरंजन के साधनों पर कुछ ज्यादा खर्च कराना हो सकता है। इसके अलावा मेले में सर्कस, कई तरह के झूले आदि भी पहुंच गए हैं।
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मेला स्थल का पूर्वी हिस्सा घेरने की होड़
कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान से पहले श्रद्धालुओं के मेला स्थल पर पहुंचने का क्रम लगातार जारी है। सोमवार को मेला स्थल का पूर्वी हिस्सा लगभग पंडालों से भर गया। यहां जगह घेरने के लिए मेलार्थियों में होड़ लगी हुई है। दरअसल, पूर्वी हिस्से में आना जाना तो आसान है ही इसके साथ ही यहां से गंगा घाट, मुख्य बाजार की भी ज्यादा दूसरी नहीं है। मेला पुराने नक्शे पर ही लगाया जा रहा है। पूर्वी हिस्से में टेंट लगाने को लेकर हर वर्ष इसी तरह से होड़ रहती है।
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पंडाल में हैंडपंप लगवाने को करना होगा भुगतान
जिला पंचायत की ओर से मेलार्थियों को पेयजल मुहैया कराने के लिए मेला स्थल पर सार्वजनिक हैंडपंप लगवाए जाते हैं। इसके अलावा यह व्यवस्था भी रहेगी कि अगर कोई परिवार अपने पंडाल में निजी तौर पर हैंडपंप लगवाना चाहता है तो उसके लिए भुगतान करना होगा। मेला स्थल पर जिला पंचायत की ओर से करीब 400 सार्वजनिक हैंडपंप लगवाने का काम भी अब अंतिम चरण में पहुंच गया है।
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खजला और मिट्टी के चूल्हे की दुकानें भी सजीं
मेला स्थल पर खजले की दुकानें सज गईं हैं। गंगा तट पर लगने वाले मेला ककोड़ा में मिठाइयों की बात करें तो सबसे ज्यादा बिक्री खजला की मिठाई की होती है। इसके अलावा मिट्टी के चूल्हे की दुकानें भी सज गई हैं। गंगा तट पर कल्पवास करने पहुंचने वाले काफी परिवार घरों से गैस सिलिंडर नहीं लाते वह पुरानी परंपरा के तहत ही गंगा तट प र कल्पवास के दौरान मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाते हैं। ऐसे में यहां मिट्टी के चूल्हों की भी काफी बिक्री होती है। अन्य घरेलू, खेती किसानी संबंधी सामानों की दुकानें भी सज गई हैं।
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35 रुपये होगा ककोड़ा मेला का किराया
- मेला ककोड़ा में बनाया गया अस्थायी रोडवेज बस अड्डा
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। श्रद्धालुुओं को मेला आने-जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए परिवहन निगम की ओर से मेला ककोड़ा में फिलहाल 10 बसें लगाए जाने का फैसला किया गया है। इस बार परिवहन निगम की ओर से 35 रुपये किराया निर्धारित किया गया हैं। अब मेला ककोड़ा में अस्थायी रोडवेज बस अड्डा बनाने की तैयारिया शुरू कर दी गई हैं।

रुहेलखंड के मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध मेला ककोड़ा में हर साल परिवहन विभाग की ओर से रोडवेज बस लगाई जाती है। हालांकि पिछले दो सालों से मेले का आयोजन नहीं हुआ है, लेकिन इस साल शासन, जनप्रतिनिधियों और युवाओं के प्रयास से मेले का आयोजन किया जा रहा है। वैसे तो हर साल लगने वाले ककोड़ा मेला में आने-जाने को रोडवेज बसें संचालित होती हैं, लेकिन किराया हर बार अलग तय होता है। परिवहन निगम ककोड़ा मेले से लेकर बदायूं की दूरी के आधार पर किराया निर्धारित करता है। इस बार रोडवेज की ओर से 10 बस लगाई गई हैं। साथ ही अस्थायी रोडवेज बस अड्डा तैयार किया जा रहा है। इधर, 19 नवंबर को 21 बस चलाई जाएंगी। परिवहन निगम के अधिकारियों के मुताबिक ककोड़ा मेले में बसें लगने से उन यात्रियों को भी लाभ मिल सकेगा, जो गंजडुंडवारा पुल के आसपास गांव के रहने वाले हैं। संवाद
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