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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में व्यवस्थाएं बदहाल
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Mon, 20 Feb 2017 11:23 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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-दवा लेने पहुंचे मरीजों को मिल रही मायूसी
राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। यहां आने वाले मरीजों को मायूसी मिल रही है। ओपीडी में मरीज डॉक्टरों के इंतजार में यहां-वहां फर्श पर लेटे रहते हैं। मरीजों का कहना है कि समय से पहले ही डॉॅक्टर ओपीडी से नदारद हो जाते हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना होता है।
शहर से चार किलोमीटर दूर मथुरा रोड पर राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण करीब 552 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा है। 80 फीसदी निर्माण पूरा भी हो चुका है। अक्तूबर 2016 में सांसद धर्मेंद्र यादव ने ओपीडी का उद्घाटन किया था। हालांकि, अब तक इमरजेंसी सेवाएं चालू नहीं हो सकी हैं। ओपीडी शुरू होने के बाद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद जगी थी, लेकिन, यह पूरी होती नहीं दिख रही। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोज औसतन 1200 से 1400 मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की मनमानी से तमाम मरीजों को मायूस होकर बैरंग लौटना पड़ रहा है।
ओपीडी में फर्श पर पड़े मिले गंभीर मरीज
बदायूं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में तैनात डॉक्टर और स्टाफ की संवेदनहीनता का प्रमाण ओपीडी में फर्श पर पड़े गंभीर मरीज देते हैं। उसावां थाने के गांव कलक्टरगंज निवासी राम सिंह कई दिन से दवा लेने यहां आ रहे हैं। ओपीडी में फिजीशियन न मिलने पर सोमवार को हालत बिगड़ने पर वह फर्श पर ही लेट गए। मुजरिया थाने के गांव सिकंदराबाद निवासी गंभीर बीमार सोनवती काफी देर डॉक्टर के चैंबर के बाहर खड़ी रहीं लेकिन डॉक्टर नदारद थे। आखिर सोनवती की हालत बिगड़ गई। परिवार वालों ने उनको ओपीडी में फर्श पर ही लिटा दिया। घंटों वह यहां पड़ी रहीं, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
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आरओ खराब होने से पेयजल की किल्लत
बदायूं। ओपीडी में मरीजों को शुद्ध पेयजल भी मयस्सर नहीं हो रहा। रोज ओपीडी में 1200 से 1400 मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन ओपीडी का आरओ खराब है। ऐसे में पेयजल की भी दिक्कत हो रही है। ओपीडी में तैनात स्टाफ के साथ मेडिकल कॉलेज के अधिकारी भी इस ओर गौर नहीं कर रहे।
कर्मचारियों को नहीं मिल रहा वेतन
बदायूं। ओपीडी में तैनात कर्मचारियों को वेतन का भुगतान भी नहीं हो रहा। दिव्यांग मंजू गुप्ता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। इनमें छह माह से वेतन भुगतान नहीं हुआ है। वहीं रोगी सहायता केंद्र में तैनात नीरेश को भी वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। मंजू गुप्ता की मानें तो मेडिकल कॉलेज में किसी भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छह महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। यहां आने वाले मरीजों को मायूसी मिल रही है। ओपीडी में मरीज डॉक्टरों के इंतजार में यहां-वहां फर्श पर लेटे रहते हैं। मरीजों का कहना है कि समय से पहले ही डॉॅक्टर ओपीडी से नदारद हो जाते हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना होता है।
शहर से चार किलोमीटर दूर मथुरा रोड पर राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण करीब 552 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा है। 80 फीसदी निर्माण पूरा भी हो चुका है। अक्तूबर 2016 में सांसद धर्मेंद्र यादव ने ओपीडी का उद्घाटन किया था। हालांकि, अब तक इमरजेंसी सेवाएं चालू नहीं हो सकी हैं। ओपीडी शुरू होने के बाद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद जगी थी, लेकिन, यह पूरी होती नहीं दिख रही। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोज औसतन 1200 से 1400 मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की मनमानी से तमाम मरीजों को मायूस होकर बैरंग लौटना पड़ रहा है।
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ओपीडी में फर्श पर पड़े मिले गंभीर मरीज
बदायूं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में तैनात डॉक्टर और स्टाफ की संवेदनहीनता का प्रमाण ओपीडी में फर्श पर पड़े गंभीर मरीज देते हैं। उसावां थाने के गांव कलक्टरगंज निवासी राम सिंह कई दिन से दवा लेने यहां आ रहे हैं। ओपीडी में फिजीशियन न मिलने पर सोमवार को हालत बिगड़ने पर वह फर्श पर ही लेट गए। मुजरिया थाने के गांव सिकंदराबाद निवासी गंभीर बीमार सोनवती काफी देर डॉक्टर के चैंबर के बाहर खड़ी रहीं लेकिन डॉक्टर नदारद थे। आखिर सोनवती की हालत बिगड़ गई। परिवार वालों ने उनको ओपीडी में फर्श पर ही लिटा दिया। घंटों वह यहां पड़ी रहीं, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
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आरओ खराब होने से पेयजल की किल्लत
बदायूं। ओपीडी में मरीजों को शुद्ध पेयजल भी मयस्सर नहीं हो रहा। रोज ओपीडी में 1200 से 1400 मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन ओपीडी का आरओ खराब है। ऐसे में पेयजल की भी दिक्कत हो रही है। ओपीडी में तैनात स्टाफ के साथ मेडिकल कॉलेज के अधिकारी भी इस ओर गौर नहीं कर रहे।
कर्मचारियों को नहीं मिल रहा वेतन
बदायूं। ओपीडी में तैनात कर्मचारियों को वेतन का भुगतान भी नहीं हो रहा। दिव्यांग मंजू गुप्ता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। इनमें छह माह से वेतन भुगतान नहीं हुआ है। वहीं रोगी सहायता केंद्र में तैनात नीरेश को भी वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। मंजू गुप्ता की मानें तो मेडिकल कॉलेज में किसी भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छह महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।