फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Medical College: Incomplete work spreading dirt and chaos

मेडिकल कॉलेज : अधूरा काम फैला रहा गंदगी और अव्यवस्था

Mon, 26 Feb 2024 12:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 12:04 AM IST
विज्ञापन
Medical College: Incomplete work spreading dirt and chaos
राजकीय मेडिकल कॉलेज। संवाद
छह साल से शुरू नहीं हो सकी सीटी स्कैन-एमआरआई सुविधा
विज्ञापन


मेडिकल कॉलेज से गंभीर घायलों और बीमारों को रेफर करके चलाया जा रहा काम

संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए छह साल से ज्यादा वक्त बीत गया है, लेकिन अब तक यहां सीटी स्कैन, ट्रामा सेंटर, एमआरआई सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। भवन निर्माण का अधूरा काम भी गंदगी और अव्यवस्थाओं को बढ़ावा दे रहा है। गंभीर घायल और बीमार मरीजों को सैफई, अलीगढ़, लखनऊ और बरेली रेफर करके काम चलाया जा रहा है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज का संचालन 2017 में शुरू होने के बाद जिले समेत आसपास के जिलों के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब बदायूं में ही उच्चस्तरीय स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी। छह साल बीतने के बाद भी यह सपना पूरा नहीं हो सका है। मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन, एमआरआई, ट्रामा सेंटर, ह्दय रोग विशेषज्ञ तक की सुविधाएं नहीं हैं। बेहतर चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आज भी लोगों को दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़त रही है। छह साल के बाद भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो सकी है।
विज्ञापन

बदायूं समेत आसपास के जिलों के मरीज भी मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, लेकिन बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर उनको मायूसी हाथ लग रही है।

-----

डायलिसिस और सीटी को जिला अस्पताल की दौड़
- एक ओर जिला अस्पताल से गंभीर मरीजों को आयर सेंटर के नाम पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों को सीटी स्कैन और डायलिसिस के लिए जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। ज्यादा गंभीर घायलों और मरीजों के इलाज की सुविधा न होने के कारण उनको अन्य जिलों में रेफर कर दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


------
बाहर एमआरआई पर खर्च होते हैं सात से दस हजार

- जिले में एमआरआई जांच की सुविधा न होने से जहां गैर जनपदों में जाकर एमआरआई कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। एक बार एमआरआई सात से दस हजार रुपये तक का खर्च आता है। हृदय रोगियों के लिए भी मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़ती है।

------
अब तक हैंडओवर नहीं हुआ भवन

राजकीय मेडिकल कॉलेज के भवन का निर्माण 2015 में शुरू हुआ था। यहां एमबीबीएस पहले बैच की पढ़ाई 2017 से शुरू हो गई, लेकिन अब तक भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। भवन निर्माण पूरा न होने के कारण हैंडओवर भी नहीं हुआ है। अस्थाई मान्यता के आधार पर कक्षाएं चल रही हैं।


------

यह कार्य पड़े अधूरे

-राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो लेक्चर रूम का निर्माण

-शौचालय में एसटीपी का कार्य अधूरा होने से सभी शौचालय बंद व फैली गंदगी।

- मल्टी परपज हॉल---खिड़किया और फाल्स शीलिंग

-12 लिफ्ट में एक संचालित बाकी लगना शेष
-लेक्चर थियेटर अधूरा पड़ा

-टावर चार और पांच अधूरे पड़े

-ऑपरेशन थियेटर कुल दस बनने है तीन संचालित बाकी बनना शेष

-430 बैडों में 303 शेष

सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा दिलाने के लिए रिपोर्ट शासन स्तर को भेज दी गई है। जल्द ही दोनों जांच मेडिकल कॉलेज में शुरू होने की संभावना है। डायलिसिस सुविधा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने और विशेषज्ञ मिलने पर शुरू की जा सकेगी। - डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed