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खसरा की चपेट में आए 12 बच्चे, तीन गंभीर
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:40 AM IST
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उझानी के गांव अब्दुल्लागंज और बुर्रा फरीदपुर में फैली बीमारी
रिश्तेदारी में आया बालक भी बीमार, घरवाले परेशान
अब्दुल्लागंज और बुर्रा फरीदपुर गांव में खसरा ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। बुर्रा फरीदपुर में दो परिवार के छह बच्चे बीमार पड़ गए। अब्दुल्लागंज में महिला समेत एक ही परिवार के चार बच्चे चपेट में हैं। बीमार बच्चों में तीन की हालत गंभीर नजर आने पर घरवालों ने स्वास्थ्य कर्मियों से सपंर्क साधने की वजाय झाड़फूंक शुरू करा दी है।
मौसम परिवर्तन के साथ शुरू खसरा के प्रकोप का पहला मामला बृहस्पतिवार शाम को अब्दुल्लागंज गांव में नजर आया। गांव के राहुल मिश्रा की पत़्नी 27 वर्षीय नेहा को तेज बुखार आते ही शरीर पर दाने झलकने लगे तो घरवालों ने बचाव के उपाय शुरू कर दिए। नेहा ठीक हो स्वास्थ्य लाभ मिलता उससे पहले ही उसके सात वर्षीय बेटे सत्यम, उसी के कुनबे की मुस्कान (आठ) और शशांकी को भी खसरा ने चपेट में ले लिया। संतोष कुमार कश्यप की 15 वर्षीय पुत्री कंचन और उसके रिश्तेदार लीलाधर का बेटा प्रिंस भी बीमार पड़ गया। प्रिंस क घरवाले उत्तराखंड के रूद्रपुर में रहते हैं।
इसके अलावा बुर्रा फरीदपुर निवासी रजनेश यादव का 15 वर्षीय बेटा शिवा, 13 साल की बेटी शीतल और उसकी छोटी बहन संजना (10) खसरा से पीड़ित है। गांव के ही चरन सिंह के तीनों बेटे-बेटियों में अभय, सुमित और अंशू भी बीमार पड़ गई। चरनसिंह और रजनेश के बच्चों की हालत में सुधार है लेकिन अब्दुल्लागंज के राहुल के दो और संतोष की बेटी की हालत गंभीर नजर आने पर घरवालों ने देसी नुस्खा अपनाना शुरू कर दिया है। बीमार बच्चों के घरवालों की मानें तो सूचना के बाद भी स्वास्थ्य कर्मी गांव नहीं पहुंचे।
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नीम-हकीम पर विश्वास करते ग्रामीण
उझानी। खसरा को लेकर ग्रामीणों की मानें तो यह माता का प्रकोप होता है। माता के प्रकोप से बचने के लिए वह घर में पूजा-अर्चना भी करते हैं। तीसरे या फिर पांचवें दिन माता जब विदा होती हैं तो बच्चे खुद ब खुद ठीक होने लगते हैं। हालांकि यह एक अंधविश्वास है लेकिन ग्रामीण खसरा पीड़ितों के इलाज के लिए डॉक्टरों को वरीयता नहीं देते।
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खसरा से अब्दुल्लागंज और बुर्रा फरीदपुर में बच्चों के बीमार होने की सूचना नहीं मिली है। एक भी ग्रामीण अपने बीमार बच्चों को लेकर अस्पताल नहीं लाया। फिर सच्चाई का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को मौके पर भेजा जाएगा। बच्चे बीमार मिले तो उनका इलाज भी किया जाएगा।
- डॉ. निरंजन सिंह, चिकित्साधिकारी।
रिश्तेदारी में आया बालक भी बीमार, घरवाले परेशान
अब्दुल्लागंज और बुर्रा फरीदपुर गांव में खसरा ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। बुर्रा फरीदपुर में दो परिवार के छह बच्चे बीमार पड़ गए। अब्दुल्लागंज में महिला समेत एक ही परिवार के चार बच्चे चपेट में हैं। बीमार बच्चों में तीन की हालत गंभीर नजर आने पर घरवालों ने स्वास्थ्य कर्मियों से सपंर्क साधने की वजाय झाड़फूंक शुरू करा दी है।
मौसम परिवर्तन के साथ शुरू खसरा के प्रकोप का पहला मामला बृहस्पतिवार शाम को अब्दुल्लागंज गांव में नजर आया। गांव के राहुल मिश्रा की पत़्नी 27 वर्षीय नेहा को तेज बुखार आते ही शरीर पर दाने झलकने लगे तो घरवालों ने बचाव के उपाय शुरू कर दिए। नेहा ठीक हो स्वास्थ्य लाभ मिलता उससे पहले ही उसके सात वर्षीय बेटे सत्यम, उसी के कुनबे की मुस्कान (आठ) और शशांकी को भी खसरा ने चपेट में ले लिया। संतोष कुमार कश्यप की 15 वर्षीय पुत्री कंचन और उसके रिश्तेदार लीलाधर का बेटा प्रिंस भी बीमार पड़ गया। प्रिंस क घरवाले उत्तराखंड के रूद्रपुर में रहते हैं।
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इसके अलावा बुर्रा फरीदपुर निवासी रजनेश यादव का 15 वर्षीय बेटा शिवा, 13 साल की बेटी शीतल और उसकी छोटी बहन संजना (10) खसरा से पीड़ित है। गांव के ही चरन सिंह के तीनों बेटे-बेटियों में अभय, सुमित और अंशू भी बीमार पड़ गई। चरनसिंह और रजनेश के बच्चों की हालत में सुधार है लेकिन अब्दुल्लागंज के राहुल के दो और संतोष की बेटी की हालत गंभीर नजर आने पर घरवालों ने देसी नुस्खा अपनाना शुरू कर दिया है। बीमार बच्चों के घरवालों की मानें तो सूचना के बाद भी स्वास्थ्य कर्मी गांव नहीं पहुंचे।
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नीम-हकीम पर विश्वास करते ग्रामीण
उझानी। खसरा को लेकर ग्रामीणों की मानें तो यह माता का प्रकोप होता है। माता के प्रकोप से बचने के लिए वह घर में पूजा-अर्चना भी करते हैं। तीसरे या फिर पांचवें दिन माता जब विदा होती हैं तो बच्चे खुद ब खुद ठीक होने लगते हैं। हालांकि यह एक अंधविश्वास है लेकिन ग्रामीण खसरा पीड़ितों के इलाज के लिए डॉक्टरों को वरीयता नहीं देते।
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खसरा से अब्दुल्लागंज और बुर्रा फरीदपुर में बच्चों के बीमार होने की सूचना नहीं मिली है। एक भी ग्रामीण अपने बीमार बच्चों को लेकर अस्पताल नहीं लाया। फिर सच्चाई का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को मौके पर भेजा जाएगा। बच्चे बीमार मिले तो उनका इलाज भी किया जाएगा।
- डॉ. निरंजन सिंह, चिकित्साधिकारी।