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अति कुपोषित बच्चों को मिलेगा घी और दूध
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jul 2016 11:57 PM IST
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परिषदीय स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन की तर्ज पर गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों को गर्म भोजन देने की तैयारी शुरू हो गई है। शनिवार को सभी ब्लाकों में प्रधानों तथा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रशिक्षण देकर हौसला पोषण योजना के बारे में विस्तार से समझाया गया।
मुख्य विकास अधिकारी प्रताप सिंह भदौरिया ने ब्लाक सालारपुर, वजीरगंज एवं बिसौली पहुंचकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्वयं प्रशिक्षण दिया। योजना को दिलचस्पी के साथ शुरू कर सफल बनाने की अपील की। उन्होंने बताया कुपोषण के शिकार बच्चों और गर्भवती की जांच को जनवरी, फरवरी में मातृृत्व सप्ताह के तहत चिन्हांकन किया गया था। सीडीओ ने बताया नेशन फैमिली हेल्थ सर्वे 2005-06 के अनुसार प्रदेश में हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया से ग्रसित है, जिसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 11 ग्राम से कम है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर आंगनबाड़ी कार्यकत्री और प्रधान तथा नगरीय क्षेत्रों में वार्ड मेंबर को कार्यकत्री का संयुक्त बैंक खाता खुलवाने की व्यवस्था कर दी गई है। अति कुपोषित बच्चों को दूध और दही देने के लिए दूध पाउडर और घी उपलब्ध कराया जाएगा। समय-समय पर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच भी होती रहेगी। सामान्य स्थिति में सौ तथा एनीमिया की शिकार गर्भवती महिलाओं को आयरन की दौ सौ गोलियां खिलाई जाएंगी।
जन्म के समय नवजात शिशु का वजन यदि दो किलो पांच सौ ग्राम से कम होता है, तो ऐसे बच्चे कुपोषित होते हैं। उनका शारीरिक विकास भी कम होता है। प्रदेश स्तर पर दो किलो पांच सौ ग्राम से कम वजन वाले बच्चों का 22.5 प्रतिशत है। गर्भवती महिलाओं को अति कुपोषित बच्चों के लिए अलग अलग मैन्यू तैयार किए गए हैं। पोषण मिशन के तहत जिलाधिकारी 15 जुलाई को अपने गोद लिए गांव भटौली से इस योजना का शुभारंभ करेंगे। ब्लाक सालारपुर में लगभग 2700 गर्भवती महिलाएं, 872 अतिकुपोषित बच्चे हैं। ब्लाक वजीरगंज में 1900 गर्भवती, 2069 कुपोषित तथा 770 अति कुपोषित बच्चे, 328 एनेमिक महिलाएं हैं। इस अवसर पर बीडीओ सालारपुर, वजीरगंज राजकुमार संबंधित एमओआईसी सहित ब्लाक प्रमुख आंगनबाड़ी कार्यकत्री और प्रधान मौजूद रहे।
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मुख्य विकास अधिकारी प्रताप सिंह भदौरिया ने ब्लाक सालारपुर, वजीरगंज एवं बिसौली पहुंचकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्वयं प्रशिक्षण दिया। योजना को दिलचस्पी के साथ शुरू कर सफल बनाने की अपील की। उन्होंने बताया कुपोषण के शिकार बच्चों और गर्भवती की जांच को जनवरी, फरवरी में मातृृत्व सप्ताह के तहत चिन्हांकन किया गया था। सीडीओ ने बताया नेशन फैमिली हेल्थ सर्वे 2005-06 के अनुसार प्रदेश में हर दूसरी गर्भवती महिला एनीमिया से ग्रसित है, जिसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 11 ग्राम से कम है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर आंगनबाड़ी कार्यकत्री और प्रधान तथा नगरीय क्षेत्रों में वार्ड मेंबर को कार्यकत्री का संयुक्त बैंक खाता खुलवाने की व्यवस्था कर दी गई है। अति कुपोषित बच्चों को दूध और दही देने के लिए दूध पाउडर और घी उपलब्ध कराया जाएगा। समय-समय पर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच भी होती रहेगी। सामान्य स्थिति में सौ तथा एनीमिया की शिकार गर्भवती महिलाओं को आयरन की दौ सौ गोलियां खिलाई जाएंगी।
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जन्म के समय नवजात शिशु का वजन यदि दो किलो पांच सौ ग्राम से कम होता है, तो ऐसे बच्चे कुपोषित होते हैं। उनका शारीरिक विकास भी कम होता है। प्रदेश स्तर पर दो किलो पांच सौ ग्राम से कम वजन वाले बच्चों का 22.5 प्रतिशत है। गर्भवती महिलाओं को अति कुपोषित बच्चों के लिए अलग अलग मैन्यू तैयार किए गए हैं। पोषण मिशन के तहत जिलाधिकारी 15 जुलाई को अपने गोद लिए गांव भटौली से इस योजना का शुभारंभ करेंगे। ब्लाक सालारपुर में लगभग 2700 गर्भवती महिलाएं, 872 अतिकुपोषित बच्चे हैं। ब्लाक वजीरगंज में 1900 गर्भवती, 2069 कुपोषित तथा 770 अति कुपोषित बच्चे, 328 एनेमिक महिलाएं हैं। इस अवसर पर बीडीओ सालारपुर, वजीरगंज राजकुमार संबंधित एमओआईसी सहित ब्लाक प्रमुख आंगनबाड़ी कार्यकत्री और प्रधान मौजूद रहे।
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