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घाटे में सहकारिता विभाग, करोड़पति हो रहे सचिव

Thu, 09 Jun 2016 09:06 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Thu, 09 Jun 2016 09:06 PM IST
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मथुरा के जवाहर बाग कांड के बाद सुर्खियों में आए सहकारिता विभाग के सचिव राकेश गुप्ता और उसकी अकूत संपत्ति के बाद विभाग के बाकी सचिवों की ओर भी उंगलियां उठना लाजिमी है। गौर करने वाली बात यह है कि घाटे में चल रहे सहकारिता विभाग के ज्यादातर सचिव करोड़पति हैं। हालांकि, वेतन के नाम पर इनको समितियों द्वारा किए जाने वाले कुछ व्यापार का सिर्फ 2.50 प्रतिशत मिलता है। सहकारिता विभाग घपलों और घोटालों का जंक्शन बन गया है।
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सहकारिता विभाग जिले में कुल 132 सहकारी समितियों का संचालन करता है। समितियों के जरिए किसानों को रियासती दामों पर खाद, बीज और ऋण मुहैया कराया जाता है। जिले की कुल 132 समितियों के संचालन का काम 117 सचिवों के जिम्मे है। सहकारिता विभाग की माली हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सचिवों को नवंबर 2014 से वेतन भुगतान नहीं हुआ है। इसके बावजूद विभाग के तमाम सचिव ऐसे हैं, जिनके पास आलीशान कोठियों के साथ लग्जरी गाड़ियां और शस्त्र लाइसेंस हैं। 
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घाटे में जा रहे जिस सहकारिता विभाग के पास सचिवों के भुगतान तक के लिए धन नहीं है। उसी विभाग के सचिव बिना वेतन ही माला-माल हो रहे हैं। इसके बावजूद अफसर आंख मूंद कर बैठे हैं। जिस तरह सचिव आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर रहे हैं, उससे साफ है कि विभाग को चूना लगाया जा रहा है। मथुरा कांड के बाद राकेश गुप्ता की करोड़ों की संपत्ति का पता लगने के बाद बाकी सचिवों पर भी उंगली उठनी लाजिमी है।
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पांच समितियों की चल रही जांच
दातागंज/बदायूं। जिले में लोहाठेर, असरासी, सनौटी, जमालपुर और प्रसिद्घपुर सहकारी समितियों के खिलाफ जांच चल रही है। यहां बड़ा घपला होने की आशंका है। जांच की गति पर भी सवाल हैं, रिपोर्ट कब आएगी और फिर कार्रवाई होगी या नहीं यह कहना जल्दबाजी होगा। 

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सचिवों को समिति पर हुए कुल व्यापार में से ढाई प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। नवंबर 2014 से सचिवों का भुगतान नहीं हुआ है। कुछ मामलों में जांच चल रही है। यह बात भी सही है कि कई सचिवों के पास काफी संपत्ति है।
-एपीएस यादव, एआर कोऑपरेटिव
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