{"_id":"57598cf24f1c1b9f659c52b7","slug":"losses-cooperation-department-are-millionaires-secretary","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाटे में सहकारिता विभाग, करोड़पति हो रहे सचिव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाटे में सहकारिता विभाग, करोड़पति हो रहे सचिव
बदायूं, ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2016 09:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा के जवाहर बाग कांड के बाद सुर्खियों में आए सहकारिता विभाग के सचिव राकेश गुप्ता और उसकी अकूत संपत्ति के बाद विभाग के बाकी सचिवों की ओर भी उंगलियां उठना लाजिमी है। गौर करने वाली बात यह है कि घाटे में चल रहे सहकारिता विभाग के ज्यादातर सचिव करोड़पति हैं। हालांकि, वेतन के नाम पर इनको समितियों द्वारा किए जाने वाले कुछ व्यापार का सिर्फ 2.50 प्रतिशत मिलता है। सहकारिता विभाग घपलों और घोटालों का जंक्शन बन गया है।
सहकारिता विभाग जिले में कुल 132 सहकारी समितियों का संचालन करता है। समितियों के जरिए किसानों को रियासती दामों पर खाद, बीज और ऋण मुहैया कराया जाता है। जिले की कुल 132 समितियों के संचालन का काम 117 सचिवों के जिम्मे है। सहकारिता विभाग की माली हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सचिवों को नवंबर 2014 से वेतन भुगतान नहीं हुआ है। इसके बावजूद विभाग के तमाम सचिव ऐसे हैं, जिनके पास आलीशान कोठियों के साथ लग्जरी गाड़ियां और शस्त्र लाइसेंस हैं।
घाटे में जा रहे जिस सहकारिता विभाग के पास सचिवों के भुगतान तक के लिए धन नहीं है। उसी विभाग के सचिव बिना वेतन ही माला-माल हो रहे हैं। इसके बावजूद अफसर आंख मूंद कर बैठे हैं। जिस तरह सचिव आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर रहे हैं, उससे साफ है कि विभाग को चूना लगाया जा रहा है। मथुरा कांड के बाद राकेश गुप्ता की करोड़ों की संपत्ति का पता लगने के बाद बाकी सचिवों पर भी उंगली उठनी लाजिमी है।
विज्ञापन
-----
पांच समितियों की चल रही जांच
दातागंज/बदायूं। जिले में लोहाठेर, असरासी, सनौटी, जमालपुर और प्रसिद्घपुर सहकारी समितियों के खिलाफ जांच चल रही है। यहां बड़ा घपला होने की आशंका है। जांच की गति पर भी सवाल हैं, रिपोर्ट कब आएगी और फिर कार्रवाई होगी या नहीं यह कहना जल्दबाजी होगा।
----
सचिवों को समिति पर हुए कुल व्यापार में से ढाई प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। नवंबर 2014 से सचिवों का भुगतान नहीं हुआ है। कुछ मामलों में जांच चल रही है। यह बात भी सही है कि कई सचिवों के पास काफी संपत्ति है।
-एपीएस यादव, एआर कोऑपरेटिव
विज्ञापन
सहकारिता विभाग जिले में कुल 132 सहकारी समितियों का संचालन करता है। समितियों के जरिए किसानों को रियासती दामों पर खाद, बीज और ऋण मुहैया कराया जाता है। जिले की कुल 132 समितियों के संचालन का काम 117 सचिवों के जिम्मे है। सहकारिता विभाग की माली हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सचिवों को नवंबर 2014 से वेतन भुगतान नहीं हुआ है। इसके बावजूद विभाग के तमाम सचिव ऐसे हैं, जिनके पास आलीशान कोठियों के साथ लग्जरी गाड़ियां और शस्त्र लाइसेंस हैं।
विज्ञापन
घाटे में जा रहे जिस सहकारिता विभाग के पास सचिवों के भुगतान तक के लिए धन नहीं है। उसी विभाग के सचिव बिना वेतन ही माला-माल हो रहे हैं। इसके बावजूद अफसर आंख मूंद कर बैठे हैं। जिस तरह सचिव आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर रहे हैं, उससे साफ है कि विभाग को चूना लगाया जा रहा है। मथुरा कांड के बाद राकेश गुप्ता की करोड़ों की संपत्ति का पता लगने के बाद बाकी सचिवों पर भी उंगली उठनी लाजिमी है।
विज्ञापन
-----
पांच समितियों की चल रही जांच
दातागंज/बदायूं। जिले में लोहाठेर, असरासी, सनौटी, जमालपुर और प्रसिद्घपुर सहकारी समितियों के खिलाफ जांच चल रही है। यहां बड़ा घपला होने की आशंका है। जांच की गति पर भी सवाल हैं, रिपोर्ट कब आएगी और फिर कार्रवाई होगी या नहीं यह कहना जल्दबाजी होगा।
----
सचिवों को समिति पर हुए कुल व्यापार में से ढाई प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। नवंबर 2014 से सचिवों का भुगतान नहीं हुआ है। कुछ मामलों में जांच चल रही है। यह बात भी सही है कि कई सचिवों के पास काफी संपत्ति है।
-एपीएस यादव, एआर कोऑपरेटिव