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Budaun News: वर्षों बाद ठीक हुई लिफ्ट सीएमएस ने कराई बंद
Sat, 06 Jul 2024 05:44 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sat, 06 Jul 2024 05:44 AM IST
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प्रसव के बाद छुट्टी करा के जाती प्रसूता, तीमारदार खुद रैंप से लाते हुए। संवाद
बदायूं। हादसा न हो जाए इसके डर से महिला अस्पताल की लिफ्ट बंद करा दी गई है। आठ साल बाद इसको ठीक कराया गया था। मात्र चार दिन चलने के बाद से फिर से यह बंद पड़ी है। गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं को रैंप से लाया-ले जाया जा रहा है। दूसरी मंजिल से प्रसूताओं की छुट्टी होने के बाद कर्मचारी हाथ खड़े कर देते हैं। इससे तीमारदारों को खुद ही अपने मरीज को व्हीलचेयर से रैंप के जरिए नीचे तक लाना पड़ रहा है।
महिला अस्पताल के भवन निर्माण के दौरान ही 2014 में लिफ्ट लगाई गई थी। 2015 में लिफ्ट खराब हुई तो किसी ने ठीक कराने की सुध नहीं ली। अमर उजाला ने गर्भवती और प्रसूताओं की परेशानी देख अभियान चलाकर खबरें प्रकाशित की जिस पर शासन ने संज्ञान लिया और 10 जून 2024 को इंजीनियरों को बदायूं भेजकर लिफ्ट ठीक कराई गई। ट्रायल भी हुआ और मरीजों को सुविधा मिलने लगी। 15 जून को अचानक इसका संचालन बंद हुआ तो फिर से वही हाल हो गया जो आठ साल से था। डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को व्हील चेयर के माध्यम से दूसरे मंजिल तक पहुंचाया जा रहा है। कई बार व्हील चेयर उपलब्ध न होने पर प्रसूताएं रैंप के सहारे ही चढ़ती व उतरती हैं। इससे प्रसूताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल की लिफ्ट ठीक तो कराई गई लेकिन चलते-चलते अटक रही है। पांच लोग 14 जून को फंस गए थे तब जैसे-तैसे निकाले गए। अगर कोई हादसा हो जाता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। हादसे के बाद जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग ही ठहराया जाएगा। लिफ्ट खराब होकर फिर अटक सकती है। इसलिए बंद कराया है,अगर विभागीय अभियंत्रण विभाग ठीक करने के बाद इसके फिर से न अटकने की जिम्मेदारी लेगा तो इसे संचालित कराएंगे।
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-डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस महिला अस्पताल बदायूं
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महिला अस्पताल के भवन निर्माण के दौरान ही 2014 में लिफ्ट लगाई गई थी। 2015 में लिफ्ट खराब हुई तो किसी ने ठीक कराने की सुध नहीं ली। अमर उजाला ने गर्भवती और प्रसूताओं की परेशानी देख अभियान चलाकर खबरें प्रकाशित की जिस पर शासन ने संज्ञान लिया और 10 जून 2024 को इंजीनियरों को बदायूं भेजकर लिफ्ट ठीक कराई गई। ट्रायल भी हुआ और मरीजों को सुविधा मिलने लगी। 15 जून को अचानक इसका संचालन बंद हुआ तो फिर से वही हाल हो गया जो आठ साल से था। डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को व्हील चेयर के माध्यम से दूसरे मंजिल तक पहुंचाया जा रहा है। कई बार व्हील चेयर उपलब्ध न होने पर प्रसूताएं रैंप के सहारे ही चढ़ती व उतरती हैं। इससे प्रसूताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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अस्पताल की लिफ्ट ठीक तो कराई गई लेकिन चलते-चलते अटक रही है। पांच लोग 14 जून को फंस गए थे तब जैसे-तैसे निकाले गए। अगर कोई हादसा हो जाता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। हादसे के बाद जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग ही ठहराया जाएगा। लिफ्ट खराब होकर फिर अटक सकती है। इसलिए बंद कराया है,अगर विभागीय अभियंत्रण विभाग ठीक करने के बाद इसके फिर से न अटकने की जिम्मेदारी लेगा तो इसे संचालित कराएंगे।
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-डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस महिला अस्पताल बदायूं

प्रसव के बाद छुट्टी करा के जाती प्रसूता, तीमारदार खुद रैंप से लाते हुए। संवाद

प्रसव के बाद छुट्टी करा के जाती प्रसूता, तीमारदार खुद रैंप से लाते हुए। संवाद