{"_id":"9287c566a4e501529959692c6f7ca941","slug":"life-to-peace-celebrating-ram-shastr-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन में सुख-शांति को राम का गुणगान: शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन में सुख-शांति को राम का गुणगान: शास्त्री
ujani
Updated Mon, 02 Feb 2015 07:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मिहौना में चल रही राम कथा में सोमवार को कथावाचक दाताराम शास्त्री ने श्रोताओं को धार्मिक कार्यक्रमों का महत्व समझाया। कहा कि जीवन में सुख और शांति के लिए भगवान राम का गुणगान करें।
कथावाचक श्री शास्त्री ने कहा कि भगवान राम ने मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाने के लिए जीवन में ऐसे कार्य किए जो इंसान अपने विचारों में शामिल कर ले तो जीवन ही सफल हो जाएगा। सभी जानते हैं कि राम तो अंतर्यामी थे लेकिन सबकुछ उन्होंने इंसानों की तरह की किया। वह चाहते तो लीला खेलने की जरुरत ही नहीं पड़ती। राम नाम उच्चारण को प्रभावी बताते हुए उन्होंने जीवन में नेक काम करने की सलाह दी।
श्री शास्त्री ने भगवान की लीलाओं के संगीतमय प्रसंग भी सुनाए। कहा कि वनवास के दौरान राम ने पिता के आदेश और सुग्रीव मिलन को मित्रता के लिए समर्पित किया। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए। महिलाएं भी अपनी जिम्मेदारी को समझें। कथा की व्यवस्थाओं में गौरव चतुर्वेदी, कमल चौहान, चंद्रपाल, लल्लू चौहान, हरीओम, राजू, वीके चौहान, टीटू और ऋषिपाल आदि का सहयोग रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
कथावाचक श्री शास्त्री ने कहा कि भगवान राम ने मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाने के लिए जीवन में ऐसे कार्य किए जो इंसान अपने विचारों में शामिल कर ले तो जीवन ही सफल हो जाएगा। सभी जानते हैं कि राम तो अंतर्यामी थे लेकिन सबकुछ उन्होंने इंसानों की तरह की किया। वह चाहते तो लीला खेलने की जरुरत ही नहीं पड़ती। राम नाम उच्चारण को प्रभावी बताते हुए उन्होंने जीवन में नेक काम करने की सलाह दी।
विज्ञापन
श्री शास्त्री ने भगवान की लीलाओं के संगीतमय प्रसंग भी सुनाए। कहा कि वनवास के दौरान राम ने पिता के आदेश और सुग्रीव मिलन को मित्रता के लिए समर्पित किया। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए। महिलाएं भी अपनी जिम्मेदारी को समझें। कथा की व्यवस्थाओं में गौरव चतुर्वेदी, कमल चौहान, चंद्रपाल, लल्लू चौहान, हरीओम, राजू, वीके चौहान, टीटू और ऋषिपाल आदि का सहयोग रहा।
विज्ञापन