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Budaun News: अपहरण के बाद हत्या के मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा
Tue, 11 Jun 2024 05:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 11 Jun 2024 05:06 AM IST
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बदायूं। अपहरण के बाद युवक की हत्या के पांच साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायालय की न्यायाधीश कुमारी रिंकू जिंदल ने दोषी अर्जुन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, इसी हत्याकांड में दंपत्ती को दोषी करार दिया है। दंपत्ती के अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं थे, इसलिए बहस नहीं हो सकी। अब सुनवाई के लिए 15 जून की तिथि लगाई गई है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव निजामुद्दीनपुर शाह निवासी गल्ला व्यापारी अवनीश गुप्ता ने 12 अगस्त 2019 को तहरीर देकर गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बताया था कि उसका बेटा विवेक (18) 11 अगस्त की शाम को दूध लेने गया था, जो वापस नहीं लौटा है। छह सितंबर को अज्ञात पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया।
परिवार वालों के पास फिरौती के लिए चिट्ठियां आने लगीं। किसी पत्र में तीन तो किसी पत्र में 15 लाख रुपये मांगे जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने विशेष कुमार उर्फ बंपी ठाकुर, उसकी पत्नी सपना, अर्जुन, विकास और सत्यपाल को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने निशानदेही पर बंपी ठाकुर के घर से जमीन खोदवाई तब विवेक का कंकाल मिला था।
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मामले की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर पंकज लवानिया ने की थी। विवेचक ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
सोमवार को न्यायाधीश ने पत्रावली पर साक्ष्यों का अवलोकन करके विशेष लोक अभियोजक राजेश बाबू शर्मा व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद आरोपी अर्जुन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बंपी और उसकी पत्नी सपना को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया। इनके मामले में अब सुनवाई 15 जून को होगी। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में विकास और सत्यपाल को दोष मुक्त किया है। संवाद
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कोतवाली क्षेत्र के गांव निजामुद्दीनपुर शाह निवासी गल्ला व्यापारी अवनीश गुप्ता ने 12 अगस्त 2019 को तहरीर देकर गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बताया था कि उसका बेटा विवेक (18) 11 अगस्त की शाम को दूध लेने गया था, जो वापस नहीं लौटा है। छह सितंबर को अज्ञात पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया।
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परिवार वालों के पास फिरौती के लिए चिट्ठियां आने लगीं। किसी पत्र में तीन तो किसी पत्र में 15 लाख रुपये मांगे जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने विशेष कुमार उर्फ बंपी ठाकुर, उसकी पत्नी सपना, अर्जुन, विकास और सत्यपाल को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने निशानदेही पर बंपी ठाकुर के घर से जमीन खोदवाई तब विवेक का कंकाल मिला था।
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मामले की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर पंकज लवानिया ने की थी। विवेचक ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
सोमवार को न्यायाधीश ने पत्रावली पर साक्ष्यों का अवलोकन करके विशेष लोक अभियोजक राजेश बाबू शर्मा व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद आरोपी अर्जुन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बंपी और उसकी पत्नी सपना को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया। इनके मामले में अब सुनवाई 15 जून को होगी। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में विकास और सत्यपाल को दोष मुक्त किया है। संवाद