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Budaun News: चल कांवड़िया भोले के द्वार...जलाभिषेक को पकड़ी रफ्तार
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उझानी में हाईवे से होकर निकलती कांवड़ियों की टोली। संवाद
उझानी/ कछला। शिवरात्रि पर जलाभिषेक करने के लिए मंगलवार सुबह से ही गंगा घाट से लेकर हाईवे तक कांवड़ियों की भीड़ रही। भोले के जयकारे लगाते हुए शिवालयों की ओर निकले कांवड़ियों के साथ कलाकार भी दिखे। कलाकारों के साथ झूमते कांवड़िये बुधवार को शिव मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे।
सावन महीने की शिवरात्रि पर जलाभिषेक का खास महत्व माना गया है। आचार्य प्रवीण शर्मा बताते हैं कि सोमवार के अलावा जो भक्त शिवरात्रि पर जलाभिषेक करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य प्राप्त होता है। जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद पूजा- अर्चना करके कांवड़ यात्रा शुरू की। मंगलवार तड़के से रात तक कांवड़ियों की टोलियां चलती रही।
बदायूं शहर के कांवड़ियों की टोली में शामिल नेकपुर मोहल्ले के प्रजीत कुमार ने बताया कि अब तक दो सोमवार को वह जलाभिषेक कर चुके हैं। शिवरात्रि के अलावा उनकी टोली बाकी के दोनों सोमवार को भी जलाभिषेक करेगी। इसके अलावा बरेली और पीलीभीत के कांवड़ियों ने भी शिवालयों की ओर रुख किया। कासगंज के शिवभक्तों ने भी गंगाघाट से कांवड़ यात्रा शुरू की।
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डाक कांवड़ युवकों में बढ़ा रुझान
- कछला गंगाघाट से कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की टोलियों के बीच डाक कांवड़ का भी रुझान बढ़ा है। डाक कांवड़ लेकर शिव मंदिरों की ओर निकलने वाले कांवड़ियों में सबसे ज्यादा युवा हैं। कांवड़ में जल भरने के बाद डाक कांवड़ को रास्ते में विश्राम नहीं दिया जाता है। कांवड़ लेकर जा रहे चंद्रशेखर ने बताया कि एक भक्त जब थका महसूस करता है तो दूसरा उसी कांवड़ को लेकर दौड़ने लग जाता है। इसी तरह खड़ेश्वरी कांवड़ को भी शिवभक्त मंदिर से पहले जमीन पर नहीं रखते। टोली में शामिल कोई न कोई कांवड़िया उसे लेकर चलता रहता है।
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सावन महीने की शिवरात्रि पर जलाभिषेक का खास महत्व माना गया है। आचार्य प्रवीण शर्मा बताते हैं कि सोमवार के अलावा जो भक्त शिवरात्रि पर जलाभिषेक करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य प्राप्त होता है। जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद पूजा- अर्चना करके कांवड़ यात्रा शुरू की। मंगलवार तड़के से रात तक कांवड़ियों की टोलियां चलती रही।
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बदायूं शहर के कांवड़ियों की टोली में शामिल नेकपुर मोहल्ले के प्रजीत कुमार ने बताया कि अब तक दो सोमवार को वह जलाभिषेक कर चुके हैं। शिवरात्रि के अलावा उनकी टोली बाकी के दोनों सोमवार को भी जलाभिषेक करेगी। इसके अलावा बरेली और पीलीभीत के कांवड़ियों ने भी शिवालयों की ओर रुख किया। कासगंज के शिवभक्तों ने भी गंगाघाट से कांवड़ यात्रा शुरू की।
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डाक कांवड़ युवकों में बढ़ा रुझान
- कछला गंगाघाट से कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की टोलियों के बीच डाक कांवड़ का भी रुझान बढ़ा है। डाक कांवड़ लेकर शिव मंदिरों की ओर निकलने वाले कांवड़ियों में सबसे ज्यादा युवा हैं। कांवड़ में जल भरने के बाद डाक कांवड़ को रास्ते में विश्राम नहीं दिया जाता है। कांवड़ लेकर जा रहे चंद्रशेखर ने बताया कि एक भक्त जब थका महसूस करता है तो दूसरा उसी कांवड़ को लेकर दौड़ने लग जाता है। इसी तरह खड़ेश्वरी कांवड़ को भी शिवभक्त मंदिर से पहले जमीन पर नहीं रखते। टोली में शामिल कोई न कोई कांवड़िया उसे लेकर चलता रहता है।