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जंगल में कहीं नहीं मिला तेंदुआ, पगचिह्न भी नहीं दिखे, तलाश जारी
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बदायूं/अलापुर। वन विभाग के 20 अधिकारियों की दो टीमें पिछले 72 घंटे से तेंदुए की तलाश में जुटी हैं। आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में चौबीस घंटे कांबिंग हो रही है। इसके बाद भी तेंदुआ खोजने में वन विभाग को अब तक कामयाबी नहीं मिली है। सोमवार को भी ककराला से गंगा की कटरी तक टीमों ने कांबिंग की। गौर करने वाली बात यह है कि जंगल में कहीं पर तेंदुए के शिकार के निशान भी नहीं मिले हैं। ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं।
शुक्रवार को कटिया गांव निवासी नूरुल पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। तेंदुए को नूरुल के अलावा किसी ने नहीं देखा। स्थानीय अधिकारियों ने पड़ताल के बाद इसे लकड़बग्घे का हमला माना था। शनिवार को वन संरक्षक बरेली जावेद अख्तर ने टीम के साथ कांबिंग की तो तेंदुए के पगचिह्न मिले। इसके बाद से तेंदुए की तलाश जारी है। तेंदुआ पकड़ने के लिए टाइगर रिजर्व से पिंजरा भी मंगा लिया गया। कांबिंग कर रही टीमों के मुताबिक अन्य किसी स्थान पर भी अब तक तेंदुए के पगचिह्न नहीं मिले हैं। इलाके के दो दर्जन से ज्यादा गांवों में अब तक सावधानी संबंधी पोस्टर चस्पा किए जा चुके हैं। सोमवार को गांव फरीदपुर, नवादा, कटिया, आसपुर, ककराला टाउन आदि इलाकों में सघन कांबिंग की गई।
हैरत की बात, चार दिन में कोई शिकार भी नहीं
वन विभाग के अधिकारी भी इस बात को लेकर हैरत में हैं कि आखिर चार दिन तक तेंदुआ भूखा कैसे रह सकता है। जंगलों में नीलगाय, हिरन, लकडबग्घा आदि जानवर हैं लेकिन उसने अब तक कोई शिकार नहीं किया। कहीं से हमले की खबर भी नहीं है। ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर संशय बढ़ता जा रहा है। ग्राम प्रधानों को वन विभाग की टीमों के नंबर दिए गए हैं। उनको बताया गया है कि कहीं से कोई सूचना मिलने पर वह कॉल करके बताएं। अब तक कहीं तेंदुए को देखे जाने की सूचना नहीं है।
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दो टीमें लगातार कांबिंग कर रही हैं। अब तक तेंदुआ कहीं नहीं दिखा है। किसी अन्य स्थान पर पगचिह्न भी नहीं मिले हैं। जंगल में तेंदुए को चार दिन हो चुके हैं, उसने अब तक कोई शिकार भी नहीं किया है। अगर तेंदुआ है तो उसे जल्द खोज लिया जाएगा। - रविंद्र सिंह बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी दातागंज
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शुक्रवार को कटिया गांव निवासी नूरुल पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। तेंदुए को नूरुल के अलावा किसी ने नहीं देखा। स्थानीय अधिकारियों ने पड़ताल के बाद इसे लकड़बग्घे का हमला माना था। शनिवार को वन संरक्षक बरेली जावेद अख्तर ने टीम के साथ कांबिंग की तो तेंदुए के पगचिह्न मिले। इसके बाद से तेंदुए की तलाश जारी है। तेंदुआ पकड़ने के लिए टाइगर रिजर्व से पिंजरा भी मंगा लिया गया। कांबिंग कर रही टीमों के मुताबिक अन्य किसी स्थान पर भी अब तक तेंदुए के पगचिह्न नहीं मिले हैं। इलाके के दो दर्जन से ज्यादा गांवों में अब तक सावधानी संबंधी पोस्टर चस्पा किए जा चुके हैं। सोमवार को गांव फरीदपुर, नवादा, कटिया, आसपुर, ककराला टाउन आदि इलाकों में सघन कांबिंग की गई।
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हैरत की बात, चार दिन में कोई शिकार भी नहीं
वन विभाग के अधिकारी भी इस बात को लेकर हैरत में हैं कि आखिर चार दिन तक तेंदुआ भूखा कैसे रह सकता है। जंगलों में नीलगाय, हिरन, लकडबग्घा आदि जानवर हैं लेकिन उसने अब तक कोई शिकार नहीं किया। कहीं से हमले की खबर भी नहीं है। ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर संशय बढ़ता जा रहा है। ग्राम प्रधानों को वन विभाग की टीमों के नंबर दिए गए हैं। उनको बताया गया है कि कहीं से कोई सूचना मिलने पर वह कॉल करके बताएं। अब तक कहीं तेंदुए को देखे जाने की सूचना नहीं है।
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दो टीमें लगातार कांबिंग कर रही हैं। अब तक तेंदुआ कहीं नहीं दिखा है। किसी अन्य स्थान पर पगचिह्न भी नहीं मिले हैं। जंगल में तेंदुए को चार दिन हो चुके हैं, उसने अब तक कोई शिकार भी नहीं किया है। अगर तेंदुआ है तो उसे जल्द खोज लिया जाएगा। - रविंद्र सिंह बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी दातागंज