{"_id":"030d1510290cda1ef5be1374a5388c8a","slug":"kavi-sammelan-in-badaun-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"...अपना कुनबा याद रहा सबकी कुर्बानी भूल गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...अपना कुनबा याद रहा सबकी कुर्बानी भूल गए
बदायूं।
Updated Sat, 03 Jan 2015 12:26 AM IST
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राष्ट्रकवि डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी की स्मृति में डॉ. ब्रजेन्द्र अवस्थी वेलफेयर सोसायटी की ओर से बृहस्पतिवार रात बदायूं क्लब में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। भोर तक चले कवि सम्मेलन में जहां विभिन्न प्रांतों से आए ख्यातिलब्ध कवियों ने व्यवस्था पर करारे व्यंग्य कसे, वहीं डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी को श्रद्धासुमन भी अर्पित किए गए।
शुभारंभ एडीएम (प्रशासन) अशोक कुमार श्रीवास्तव और उप्र हिंदी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सोम ठाकुर ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सोसायटी की ओर से राष्ट्र कवि डॉ. अवस्थी सम्मान से ओज के वरिष्ठ कवि वेदव्रत वाजपेयी को सम्मानित किया गया। उन्हें 21 हजार रुपये और प्रतीक चिह्न देकर सोसायटी की ओर से डॉ. बलराज किशोर मिश्र, डॉ. पूर्ति मिश्रा, केशव मिश्रा, डॉ. तृप्ति मिश्रा, संजीव अवस्थी, शंतजीव अवस्थी ने सम्मानित किया गया। मुंबई से पधारे दुर्गेश दुबे ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
वरिष्ठ गीतकार डॉ. सोम ठाकुर ने आज के माहौल को कविता में उतारा-
आजादी के परवानों की अमर कहानी भूल गए।
अपना कुनबा याद रहा सबकी कुर्बानी भूल गए।।
लखनऊ से पधारे वेदव्रत वाजपेयी ने ओज पूर्ण वाणी में कहा -
देश नहीं बनता है मिट्टी, गिट्टी ईंट मकानों से,
मां का मस्तक ऊंचा होता बेटों के बलिदानों से।
इंदौर से आए गिरेंद्र सिंह प्राण ने व्यवस्था पर तंज कसा-
रिश्वत की बिदांस बेटियां अड़ी हुई नादानी पर,
सदाचार बूढ़ा लगता है भ्रष्टाचार जवानी पर।
मुंबई से आए राज बुंदेली ने फरमाया-
अपना हिंद देश वह देश है दोस्तों,
यहां चूड़ियों से चिंगारी निकलती है।
कानपुर की शायरा शबीना अदीब ने श्रोताओं की भरपूर तालिया बटोरीं-
खामोश लव हैं, झुकी हैं पलकें,
अभी मोहब्बत नई-नई है।
उदयपुर से आए सत्यम उपाध्याय ने कहा-
हम इम्तिहान में सफल हुए, परिणाम तुम्हारा बाकी है,
हमने तो अपना काम किया, अब काम तुम्हारा बाकी है। युवा कवि मनुव्रत वाजपेयी ने कहा-
मौलवी पुजारियों के अपने अपने तर्क हैं,
प्रार्थना उसी की मात्र शैलियों का फर्क है।
आगरा से सलोनी राणा ने कहा-
मोर पंख से लिखा है जिसको सारे पन्ने मोड़ चलें हैं,
बीते कल के मनमीतों से सारे बंधन तोड़ चले हैं।
उन्नाव से पधारी प्रियंका शुक्ला प्र्रकृति को माध्यम बनाया-
तुम रवि से उदय अस्त होते रहो,
मैं दिषा हूूं मेरा अन्त होगा नहीं।
हास्य कवि संदीप दुबे नरकंकाल ने कहा-
प्यार का बल्ब जलाए रहिये,
बस फ्यूज होने से बचाये रहिये।
शायर मध्यम सक्सेना ने कहा-
बच्चों के फकत जिस्म दफन करबला में है,
रुहों ने अम्मीजां का आंचल नहीं छोड़ा।
कार्यक्त्रस्म में दुर्गेश दुबे, रामखिलाड़ी स्वदेषी आदि कवियों ने भी काव्य पाठ किया। जिले के कवि डॉ. सुविज्ञानन्द दीपंकर की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन बरेली से पधारे डॉ. राहुल अवस्थी ने किया। शतंजीव अवस्थी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक प्रेमस्वरुप पाठक, सांसद प्रतिनिधि अवधेश यादव, मंजुल शंखधार, राजेंद्र कुमार, राजीव अवस्थी, डॉ. अक्षत अशेष, अशोक खुराना, डॉ. निशि अवस्थी, उमेश भट्ट, वंदना अवस्थी, कामेश पाठक, कुलदीप अंगार, सुरेश चंद्र शर्मा, शाहरुख फरशोरी, अमित वार्ष्णेय, डॉ. रामबहादुर व्यथित, अनिल रस्तोगी, स्वतंत्र प्रकाश, अनूप रस्तोगी, संजीव गुप्ता, सुमित मिश्रा, नरेश शंखधार, केएस गुप्ता, इकबाल असलम, भानु यादव, डॉ. अरविंद धवल, भूराज सिंह राजलायर, पवन शंखधार, कमला माहेश्वरी, रजनी मिश्रा, डॉ. उमेश गौड़, ज्ञानानंद पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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शुभारंभ एडीएम (प्रशासन) अशोक कुमार श्रीवास्तव और उप्र हिंदी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सोम ठाकुर ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सोसायटी की ओर से राष्ट्र कवि डॉ. अवस्थी सम्मान से ओज के वरिष्ठ कवि वेदव्रत वाजपेयी को सम्मानित किया गया। उन्हें 21 हजार रुपये और प्रतीक चिह्न देकर सोसायटी की ओर से डॉ. बलराज किशोर मिश्र, डॉ. पूर्ति मिश्रा, केशव मिश्रा, डॉ. तृप्ति मिश्रा, संजीव अवस्थी, शंतजीव अवस्थी ने सम्मानित किया गया। मुंबई से पधारे दुर्गेश दुबे ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
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वरिष्ठ गीतकार डॉ. सोम ठाकुर ने आज के माहौल को कविता में उतारा-
आजादी के परवानों की अमर कहानी भूल गए।
अपना कुनबा याद रहा सबकी कुर्बानी भूल गए।।
लखनऊ से पधारे वेदव्रत वाजपेयी ने ओज पूर्ण वाणी में कहा -
देश नहीं बनता है मिट्टी, गिट्टी ईंट मकानों से,
मां का मस्तक ऊंचा होता बेटों के बलिदानों से।
इंदौर से आए गिरेंद्र सिंह प्राण ने व्यवस्था पर तंज कसा-
रिश्वत की बिदांस बेटियां अड़ी हुई नादानी पर,
सदाचार बूढ़ा लगता है भ्रष्टाचार जवानी पर।
मुंबई से आए राज बुंदेली ने फरमाया-
अपना हिंद देश वह देश है दोस्तों,
यहां चूड़ियों से चिंगारी निकलती है।
कानपुर की शायरा शबीना अदीब ने श्रोताओं की भरपूर तालिया बटोरीं-
खामोश लव हैं, झुकी हैं पलकें,
अभी मोहब्बत नई-नई है।
उदयपुर से आए सत्यम उपाध्याय ने कहा-
हम इम्तिहान में सफल हुए, परिणाम तुम्हारा बाकी है,
हमने तो अपना काम किया, अब काम तुम्हारा बाकी है। युवा कवि मनुव्रत वाजपेयी ने कहा-
मौलवी पुजारियों के अपने अपने तर्क हैं,
प्रार्थना उसी की मात्र शैलियों का फर्क है।
आगरा से सलोनी राणा ने कहा-
मोर पंख से लिखा है जिसको सारे पन्ने मोड़ चलें हैं,
बीते कल के मनमीतों से सारे बंधन तोड़ चले हैं।
उन्नाव से पधारी प्रियंका शुक्ला प्र्रकृति को माध्यम बनाया-
तुम रवि से उदय अस्त होते रहो,
मैं दिषा हूूं मेरा अन्त होगा नहीं।
हास्य कवि संदीप दुबे नरकंकाल ने कहा-
प्यार का बल्ब जलाए रहिये,
बस फ्यूज होने से बचाये रहिये।
शायर मध्यम सक्सेना ने कहा-
बच्चों के फकत जिस्म दफन करबला में है,
रुहों ने अम्मीजां का आंचल नहीं छोड़ा।
कार्यक्त्रस्म में दुर्गेश दुबे, रामखिलाड़ी स्वदेषी आदि कवियों ने भी काव्य पाठ किया। जिले के कवि डॉ. सुविज्ञानन्द दीपंकर की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन बरेली से पधारे डॉ. राहुल अवस्थी ने किया। शतंजीव अवस्थी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक प्रेमस्वरुप पाठक, सांसद प्रतिनिधि अवधेश यादव, मंजुल शंखधार, राजेंद्र कुमार, राजीव अवस्थी, डॉ. अक्षत अशेष, अशोक खुराना, डॉ. निशि अवस्थी, उमेश भट्ट, वंदना अवस्थी, कामेश पाठक, कुलदीप अंगार, सुरेश चंद्र शर्मा, शाहरुख फरशोरी, अमित वार्ष्णेय, डॉ. रामबहादुर व्यथित, अनिल रस्तोगी, स्वतंत्र प्रकाश, अनूप रस्तोगी, संजीव गुप्ता, सुमित मिश्रा, नरेश शंखधार, केएस गुप्ता, इकबाल असलम, भानु यादव, डॉ. अरविंद धवल, भूराज सिंह राजलायर, पवन शंखधार, कमला माहेश्वरी, रजनी मिश्रा, डॉ. उमेश गौड़, ज्ञानानंद पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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