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बदायूं में लटक गई जवाहरबाग के खलनायक की जांच
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Fri, 10 Mar 2017 10:32 PM IST
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- सहकारी समिति में लाखों रुपये के घोटाले का मामला अटका
मथुरा के चर्चित जवाहरबाग मामले में भले ही हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है, लेकिन जवाहरबाग कांड के खलनायक राकेश गुप्ता की सहकारी समिति में घपले के मामले से जुड़ी जांच नौ महीने बाद भी अटकी हुई है। राकेश गुप्ता जवाहरबाग में कब्जा करने वाले कथित सत्याग्रहियों के मुखिया रामवृक्ष यादव का खास था। उस पर सहकारी समिति में सचिव रहते लाखों रुपये के घोटाले में हाथ होने का आरोप है। इसकी जांच के आदेेश हुए थे।
मथुरा के बेशकीमती जवाहरबाग में कथित सत्याग्रही रामवृक्ष यादव ने कब्जा कर लिया था। दो जून 2016 को जवाहरबाग को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई के दौरान हिंसक झड़प में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव शहीद हो गए। 20 अन्य लोग भी मारे गए थे। पुलिस की जांच में सामने आया था कि बदायूं के थाना हजरतपुर के गांव गड़िया शाहपुर का राकेश गुप्ता कब्जाधारियों को रसद पहुंचाता था। राकेश गुप्ता की तैनाती दातागंज की प्रसिद्धपुर सहकारी समिति पर बतौर सचिव थी। एसटीएफ ने राकेश गुप्ता को 18 जून 2016 को बदायूं के उसहैत थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया था। जवाहरबाग कांड में राकेश गुप्ता का नाम आने के बाद बदायूं के सहकारिता विभाग में हड़कंप मच गया था। आननफानन के पहले उसे निलंबित किया गया बाद में बर्खास्त कर दिया गया। प्रसिद्धपुर सहकारी समिति को सील कर दिया गया। यहां घोटाला उजागर होने पर जांच को दो सदस्यों की कमेटी बना दी गई। जवाहरबाग कांड को नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक राकेश गुप्ता मामले में सहकारिता विभाग की जांच पूरी नहीं हो सकी है। जांच कमेटी के कोऑपरेटिव बैंक जीएम मिलिंद कुमार और सहकारिता विभाग के अब्दुल हसीब के रिटायर होने के बाद जांच लटक गई थी। जवाहरबाग कांड में सीबीआई जांच का आदेश होने के बाद घोटाला की जांच का जिम्मा नए सिरे से एडीओ कोऑपरेटिव राकेश त्रिपाठी को दिया गया है।
राकेश गुप्ता मामले में जांच पूरी नहीं हो सकी है। जांच टीम के दो सदस्यों के रिटायर होने की वजह से इसमें देरी हुई है। नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया गया है। समिति में घोटाला पहले ही उजागर हो चुका है। अब यह देखना है कि इसमें राकेश गुप्ता समेत और कौन शामिल हैं।
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- अंबिका प्रसाद, एआर कोऑपरेटिव
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- सहकारी समिति में लाखों रुपये के घोटाले का मामला अटका
मथुरा के चर्चित जवाहरबाग मामले में भले ही हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है, लेकिन जवाहरबाग कांड के खलनायक राकेश गुप्ता की सहकारी समिति में घपले के मामले से जुड़ी जांच नौ महीने बाद भी अटकी हुई है। राकेश गुप्ता जवाहरबाग में कब्जा करने वाले कथित सत्याग्रहियों के मुखिया रामवृक्ष यादव का खास था। उस पर सहकारी समिति में सचिव रहते लाखों रुपये के घोटाले में हाथ होने का आरोप है। इसकी जांच के आदेेश हुए थे।
मथुरा के बेशकीमती जवाहरबाग में कथित सत्याग्रही रामवृक्ष यादव ने कब्जा कर लिया था। दो जून 2016 को जवाहरबाग को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई के दौरान हिंसक झड़प में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव शहीद हो गए। 20 अन्य लोग भी मारे गए थे। पुलिस की जांच में सामने आया था कि बदायूं के थाना हजरतपुर के गांव गड़िया शाहपुर का राकेश गुप्ता कब्जाधारियों को रसद पहुंचाता था। राकेश गुप्ता की तैनाती दातागंज की प्रसिद्धपुर सहकारी समिति पर बतौर सचिव थी। एसटीएफ ने राकेश गुप्ता को 18 जून 2016 को बदायूं के उसहैत थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया था। जवाहरबाग कांड में राकेश गुप्ता का नाम आने के बाद बदायूं के सहकारिता विभाग में हड़कंप मच गया था। आननफानन के पहले उसे निलंबित किया गया बाद में बर्खास्त कर दिया गया। प्रसिद्धपुर सहकारी समिति को सील कर दिया गया। यहां घोटाला उजागर होने पर जांच को दो सदस्यों की कमेटी बना दी गई। जवाहरबाग कांड को नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक राकेश गुप्ता मामले में सहकारिता विभाग की जांच पूरी नहीं हो सकी है। जांच कमेटी के कोऑपरेटिव बैंक जीएम मिलिंद कुमार और सहकारिता विभाग के अब्दुल हसीब के रिटायर होने के बाद जांच लटक गई थी। जवाहरबाग कांड में सीबीआई जांच का आदेश होने के बाद घोटाला की जांच का जिम्मा नए सिरे से एडीओ कोऑपरेटिव राकेश त्रिपाठी को दिया गया है।
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राकेश गुप्ता मामले में जांच पूरी नहीं हो सकी है। जांच टीम के दो सदस्यों के रिटायर होने की वजह से इसमें देरी हुई है। नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया गया है। समिति में घोटाला पहले ही उजागर हो चुका है। अब यह देखना है कि इसमें राकेश गुप्ता समेत और कौन शामिल हैं।
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