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हिंदू पक्ष का दावा: जामा मस्जिद है तो यहां रजिया सुल्तान का जन्म कैसे हो गया

Sat, 22 Oct 2022 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 22 Oct 2022 12:57 AM IST
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Jama Masjid is there, so how Razia Sultan was born here,Jama Masjid case
न्यायालय परिसर में सुनवाई के दौरान खड़े हिंदू पक्ष के अधिवक्ता व हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक म? - फोटो : BADAUN
बदायूं। शहर की जामा मस्जिद के मुकदमे की शुक्रवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय कुमार गुप्ता की अदालत में सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता ने शुक्रवार को डीएम के एतराज का जवाब दाखिल किया। जवाब में उन्होंने कहा है कि अगर जामा मस्जिद है, तो यहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित माना जाता है, फिर इसमें रजिया सुल्तान का जन्म कैसे हो गया। यह पहले से नीलकंठ महादेव का मंदिर है। बाद में इस पर कब्जा करके जामा मस्जिद नाम दे दिया गया।
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हिंदू पक्ष के वकील विवेक रैंडर ने बताया कि पिछली सुनवाई को डीएम के अधिवक्ता ने अपना एतराज दाखिल किया था। उन्होंने तमाम बिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा था कि यह मामला सुनवाई के योग्य नहीं है। वाद पत्र की मद संख्या दस में मुगल आक्रांता इल्तुतमिश की पत्नी से यहां रजिया सुल्तान का जन्म होना बताया गया था। कहा था कि यहां नमाज पढ़ी जाती थी। हिंदू पक्ष ने अपने जवाब में कहा है कि अगर यह जामा मस्जिद है, तो महिलाओं का प्रवेश कैसे हुआ। फिर यहां रजिया सुल्तान का जन्म कैसे हो गया। यह आक्रांताओं द्वारा कब्जाया गया नीलकंठ महादेव का मंदिर है।
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इसके अलावा हिंदू पक्ष ने तमाम सुबूतों का हवाला देते हुए यह मुकदमा चलने योग्य बताया है। हालांकि शुक्रवार को मामले में बहस नहीं हुई। न्यायाधीश ने सभी पक्षकारों के नाम गजट कराने का आदेश दिया है। इससे सभी पक्षकारों को इसकी जानकारी हो सके। अगली सुनवाई के लिए सात नवंबर तारीख लगाई गई है। उस दिन दोनों पक्षों के एतराज व जवाब को लेकर बहस हो सकती है।
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रजिया सुल्तान का इससे कोई मतलब नहीं है। अगर बदायूं दर्पण ने लिख दिया कि रजिया सुल्तान का जन्म उसमें हुआ तो यह सत्य नहीं है। असली बात यह है कि यह मुकदमा चलने लायक नहीं है। वादी पक्ष के पास कुछ नहीं है। इसलिए वह ऐसी बातें ढूंढकर ला रहे हैं। आज तो केवल वादी पक्ष ने शासकीय अधिवक्ता के एतराज का जवाब दाखिल किया था। - मोहम्मद असरार अहमद, वकील, इंतजामिया कमेटी जामा मस्जिद
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