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मजदूर का अविष्कार, गाड़ी के साइलेंसर से निकलेगी शुद्ध हवा

Tue, 15 Jun 2021 12:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 12:29 AM IST
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Invention of laborer, pure air will come out of the silencer of the vehicle
बदायूं। कहते हैं कि प्रतिभा परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती। इस कहावत को सदर तहसील क्षेत्र के गांव खासपुर निवासी बबलू उर्फ रामवीर ने साबित कर दिया है। बबलू ने कोरोना काल में ऑक्सीजन की मारामारी देखकर एक उपकरण बनाया है, जिसे वाहनों में साइलेंसर की जगह इस्तेमाल कर सकते हैं। उनका दावा है कि उपकरण में मौजूद पानी कार्बन कणों को अवशोषित कर लेगा। इससे शुद्ध हवा बाहर निकलेगी और वायु प्रदूषण पर काफी नियंत्रण हो सकेगा। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रवक्ता भी मानते हैं कि बबलू के प्रयोग कारगर हो सकता है।
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बबलू ने ऐसे साइलेंसर का निर्माण किया है, जो किसी भी गाड़ी में लगाने पर उससे निकलने वाले कार्बन को अवशोषित कर लेगा और शुद्ध हवा बाहर निकलेगी। इससे वातावरण में कार्बन नहीं फैलेगा। बबलू ने बताया कि उसे ये साइलेंसर बनाने का विचार कोरोना महामारी के दौरान आया। इलाज के दौरान लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी। हवा में शुद्ध ऑक्सीजन होती तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते और वातावरण शुद्ध होने से लोगों की प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती।
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बबलू के मुताबिक हवा में कार्बन सबसे अधिक गाड़ियों से फैलता है। इसलिए उसका बनाया साइलेंसर डीजल और पेट्रोल से चलने वाले किसी भी वाहन में लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल मॉडल के तौर पर बाल्टियों से उसने नमूना बनाकर देखा है। वैसे साइलेंसर बनाने के लिए दो डिब्बों का इस्तेमाल किया गया है। जिसको गाड़ी में पानी भर के लगाने से एक डिब्बे में कार्बन एकत्रित होगा जो उसमें भरे पानी को भाप बनाएगा। यह भाप घुमावदार पाइप से दूसरे डिब्बे में पहुंचकर साफ वायु बनकर बाहर निकल जाएगी। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया में गाड़ी के इंजन पर कोई दबाव भी नहीं पडे़गा।
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सीमित संसाधनों में ब्याज पर पैसे लेकर किया काम
बबलू के पिता जीवाराम ड्राइवर थे। बचपन में ही पिता का देहांत हो गया। बबलू ने गांव के स्कूल से आठ साल पहले हाईस्कूल पास किया था। उनके पास तीन बीघा जमीन है, परिवार में पत्नी व चार बच्चे हैं। परिवार का जीवनयापन नहीं हो पाता तो मजदूरी भी करते हैं। उन्होंने बताया कि साइलेंसर बनाने के लिए उनको दो हजार रुपये ब्याज पर लेने पडे़। उनका दावा है अगर सरकार या कोई प्राइवेट कंपनी उनकी सहायता करती है तो वह इस खास साइलेंसर को किसी भी तरह के वाहन में महज पंद्रह सौ से दो हजार रुपये की लागत में लगा सकते हैं।
बिना ईंधन वाहन चलाने वाला इंजन बनाने का सपना
बबलू ने बताया कि उनका सपना है कि वह एक ऐसा इंजन बनाएं जिसमें पेट्रोल, डीजल या गैस जैसा कोई ईधन इस्तेमाल न हो। उन्होंने इसे बनाने का फार्मूला भी तैयार कर लिया है पर आर्थिक स्थिति इसमें रुकावट बन रही है। अगर उन्हें सहायता मिले तो वह बिना ईंधन के वाहन चलाकर दिखा देंगे।
कौतूहल का विषय बना खास साइलेंसर
बबलू द्वारा बनाया साइलेंसर आसपास के लोगों में कौतूहल का विषय बन गया है। बबलू ने साइलेंसर को गाड़ियों में लगाकर परीक्षण किया जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। उसने फेसबुक पर ‘बबलू की बातें’ नाम से आईडी बना रखी है। उन्होंने अपना प्रयोग संबंधी वीडियो फेसबुक पर डाला था, जिसे लोगों ने काफी सराहा।

विशेषज्ञ बोले- संभव है ऐसा होना
राजकीय पॉलिटेक्निक अलापुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रवक्ता इंजीनियर भूपेंद्र सिंह से जब बबलू के प्रयोग के बारे में बात की गई तो उनका कहना था कि इस तरह का प्रयोग संभव हो सकता है। हालांकि यह कितने फीसदी प्रदूषण कम करेगा यह वैज्ञानिक विधि से परीक्षण के बाद ही पता चल सकेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्रामीण क्षेत्र में तमाम ऐसी प्रतिभाएं हैं जिन्हें मौका मिले तो वह देश व समाज के लिए काफी कुछ कर सकते हैं।
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