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Budaun News: अधूरे कागजात ने लगाया वोकल फॉर लोकल की रफ्तार पर ब्रेक

Fri, 25 Sep 2026 01:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:44 AM IST
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Incomplete documents put the brakes on the momentum of 'Vocal for Local'.
पीएमएफएमई के तहत जगत ब्लॉक के बूंचानगला में पशु आहार बनाने की लगाई इकाई के साथ अवान सिंह। स्रोत
बदायूं। अधूरे कागजात के कारण वोकल फॉर लोकल की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। बैंकों ने 277 आवेदन निरस्त कर दिए हैं, जबकि 262 आवेदकों से कागजात पूरे करने को कहा है। इन्हीं कमियों के चलते जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के आवेदकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस साल महज 129 आवेदकों को अनुदानित ऋण मिला है, जबकि 800 को योजना का लाभ देने का लक्ष्य शासन से मिला है।
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कुछ महीने पहले तक पीएमएफएमई उद्यान विभाग के जरिये संचालित हो रही थी। अब यह योजना राजकीय फल संरक्षण केंद्र के अधीन है। जिले के 800 लोगों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य शासन से मिला है। राजकीय फल संरक्षण केंद्र के प्रभारी नवीन आर्य ने बताया कि इस योजना के लिए जिलेभर से 800 लोगों ने आवेदन किए हैं। इनकी जांच-पड़ताल की गई।
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बताया कि जांच के बाद 538 आवेदकों की फाइलें सरकारी बैंकों के पास लोन स्वीकृत कराने के लिए भेजी गई थीं। इसमें सरकारी बैंकों ने इस वित्तीय वर्ष में अब तक 129 फाइलें स्वीकृत कर लोगों को लोन दिया है। 79 फाइलें बैंकों में लंबित पड़ी हैं। वहीं विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए 277 फाइलों को बैंकों ने निरस्त कर विभाग को लौटा दिया है।
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प्रभारी ने बताया कि योजना में बैंकों ने 262 आवेदनों को ड्राफ्ट में बताया गया है। ऐेसे आवेदकों से बातचीत कर कागजात पूरे कर फाइलें पुन: बैंकों को प्रेषित की जाएंगी। (संवाद)


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क्या है पीएमएफएमई
यह खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से चलाई जाने वाली केंद्रीय योजना है। इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 2021 में शुरू किया गया। योजना के तहत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना के लिए 35 प्रतिशत की ऋण-बद्ध सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये तक) और उन्नयन या नई इकाई की स्थापना के लिए सामान्य अवसंरचना के लिए अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।


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इन उत्पादों का उद्योग लगाने के लिए मिलता है लोन
योजना में फल और सब्जियों में जूस, जैम, चिप्स, अचार और डिब्बा बंद उत्पाद, अनाज और दलिया में आटा, बेसन, पोहा, मखाना और बेकरी के उत्पाद, मसाले और अन्य में मसाले पीसना और उनकी पैकेजिंग, पापड़, नमकीन बनाने के उत्पाद और दुग्ध और अन्य उत्पाद में घी, पनीर, मिठाई या स्थानीय पारंपरिक खाद्य उत्पाद बनाने के लिए प्रोजेक्ट की लागत की 35 प्रतिशत सब्सिडी या 10 लाख रुपये का लोन मिलता है।


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योजना का लाभ लेने के लिए यह है जरूरी
इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक किसान व युवा के पास भारत की स्थायी नागरिकता होनी चाहिए। उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए परिवार के एक ही सदस्य को आर्थिक सहायता मिलेगी।

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महज ओके लिखकर फाइल कर दी निरस्त



सुमित कुमार सिंह का आवेदन लो सीआईसी (क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी), मुलायम सिंह का आवेदन कागजात उपलब्ध नहीं कराने पर, लक्ष्मी साहू का आवेदन महज ‘ओके’ लिखते हुए निरस्त कर दिया। हंसराज का आवेदन सभी जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं कराने व सुमित माहेश्वरी का आवेदन इस बिजनेस के लिए लोकेशन सही न होने की बात कहते हुए निरस्त कर फाइलें लौटाई गईं। ज्यादातर बैंकों ने यही कारण लिखते हुए लोन की फाइलों को निरस्त किया है।

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----आवेदक बोले- बिना कारण बताए बैंक ने ऋण कर दिया निरस्त-----



अभी आटा चक्की चला रहा हूं। उद्योग बढ़ाने के लिए स्पेलर और सोलर लगाने के लिए आवेदन किया था। बैंक की ओर से बिना कारण बताए आवेदन निरस्त कर दिया गया। दातागंज पीएनबी के बैंक मैनेजर से कारण पूछा तो उन्होंने कहा, कारण वहीं जाकर पता करो जहां से आवेदन किया था। - वेद प्रकाश, अरेला दातागंज


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आटा चक्की चलाता हूं। इस योजना के बारे में पता चला तो पहली बार ऋण लेकर सेलर और सोलर लगाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन पीएनबी वजीरगंज के बैंक मैनेजर ने बिना कारण बताए ही आवेदन रिजेक्ट कर दिया। पूछने पर सिर्फ इतना बताया कि आपका ऋण होगा नहीं। - राकेश कुमार, नदवारी, वजीरगंज




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पीएमएफएमई योजना के तहत आने वाले आवेदकों से बैंकों की शाखाओं पर गाइडलाइन के अनुसार पूछताछ की जाती है। जहां पर वह उद्योग धंधे लगाएंगे, उस साइट का निरीक्षण भी किया जाता है। साथ ही आवेदकों से कारोबार के बारे में जानकारी की जाती है। इन सभी गाइडलाइन को पूरा करने पर ही बैंकों की ओर ऋण मंजूर किया जाता है, जो फाइलें निरस्त की गई हैं उनमें कुछ न कुछ कमी तो अवश्य होगी। - रितेश कुमार वर्मा, एलडीएम बैंक
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