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साढ़े 22 करोड़ रुपये के फेर में बढ़ते गए फासले
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 08 Aug 2016 11:52 PM IST
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शहर की सड़कों को लेकर बढ़ा था सांसद और आबिद रजा के बीच विवाद
बदायूं की सियासी जंग
सड़क काटने की जंग ‘पत्ता कटने’ तक पहुंची
कंपनी को सड़क न खोदने का नोटिस दिया था पालिका बोर्ड ने
सांसद धर्मेंद्र यादव और शहर विधायक आबिद रजा के बीच जो जंग शुरू हुई, उसकी शुरुआत सड़क काटने के एवज में पालिका की ओर से मुआवजा मांगने से हुई। शहर में अंडर ग्राउंड बिजली केबल डालने के लिए खोदी जाने वाली सड़क की क्षतिपूर्ति पालिका प्रशासन की ओर से करीब 22 करोड़ आंकी गई थी। सड़क से शुरू हुई इस जुबानी जंग में गाय और गंगा भी शामिल हो गईं। आखिर इस जंग में विधायक आबिद रजा और उनकी पत्नी पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा का पार्टी से पत्ता कट हो गया।
शहर की सड़कों को खोदकर अंडर ग्राउंड पाइपलाइन डालने वाली कंपनी ने करीब पांच माह पहले शहर में खुदाई शुरू की थी। बताते हैं कि यह कंपनी सांसद धर्मेंद्र यादव के एक करीबी की है। कंपनी को नगर पालिका बोर्ड की सहमति से पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने सड़कें न खोदने का नोटिस दिया था। यहीं से सांसद और विधायक के बीच टकराव का बीज पड़ गया था। इसमें घी डालने का काम पालिका बोर्ड के दूसरे नोटिस ने किया।
इसके बाद नगर पालिका बोर्ड ने एक करीब साढ़े 22 करोड़ रुपये का एस्टीमेट भी जारी कर दिया था। अब तक विवाद काफी बढ़ चुका था। शहर की सड़कें खोदने के बदले में धनराशि न मिलने पर शहर विधायक आबिद ने पार्टी के एक बड़े सफेदपोश परदेसी नेता का संबोधन देकर सांसद पर निशाना साधा था। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा, तो आबिद ने गोकशी और गंगा में अवैध खनन करने के मामले में भी पार्टी के अन्य नेताओं पर हमला बोल दिया। इसके बाद विधायक आबिद सभी के निशाने पर आ गए। उनके बयानों के बाद पार्टी के नेताओं द्वारा विधायक आबिद की घेराबंदी शुरू हुई तो उनकी पत्नी फात्मा रजा ने सीधे सांसद पर हमला बोलते हुए अपने शौहर की जान का खतरा बताया। विधायक ने कार्रवाई न होने पर एक हफ्ते बाद दर्जा राज्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की भी चेतावनी दी थी। सूत्र बताते हैं कि आलाकमान के इशारे पर पार्टी के जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट तैयार की, जिस पर कुछ घंटों में ही फैसला ले लिया गया। इसके बाद पति-पत्नी दोनों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
बदायूं की सियासी जंग
सड़क काटने की जंग ‘पत्ता कटने’ तक पहुंची
कंपनी को सड़क न खोदने का नोटिस दिया था पालिका बोर्ड ने
सांसद धर्मेंद्र यादव और शहर विधायक आबिद रजा के बीच जो जंग शुरू हुई, उसकी शुरुआत सड़क काटने के एवज में पालिका की ओर से मुआवजा मांगने से हुई। शहर में अंडर ग्राउंड बिजली केबल डालने के लिए खोदी जाने वाली सड़क की क्षतिपूर्ति पालिका प्रशासन की ओर से करीब 22 करोड़ आंकी गई थी। सड़क से शुरू हुई इस जुबानी जंग में गाय और गंगा भी शामिल हो गईं। आखिर इस जंग में विधायक आबिद रजा और उनकी पत्नी पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा का पार्टी से पत्ता कट हो गया।
शहर की सड़कों को खोदकर अंडर ग्राउंड पाइपलाइन डालने वाली कंपनी ने करीब पांच माह पहले शहर में खुदाई शुरू की थी। बताते हैं कि यह कंपनी सांसद धर्मेंद्र यादव के एक करीबी की है। कंपनी को नगर पालिका बोर्ड की सहमति से पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने सड़कें न खोदने का नोटिस दिया था। यहीं से सांसद और विधायक के बीच टकराव का बीज पड़ गया था। इसमें घी डालने का काम पालिका बोर्ड के दूसरे नोटिस ने किया।
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इसके बाद नगर पालिका बोर्ड ने एक करीब साढ़े 22 करोड़ रुपये का एस्टीमेट भी जारी कर दिया था। अब तक विवाद काफी बढ़ चुका था। शहर की सड़कें खोदने के बदले में धनराशि न मिलने पर शहर विधायक आबिद ने पार्टी के एक बड़े सफेदपोश परदेसी नेता का संबोधन देकर सांसद पर निशाना साधा था। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा, तो आबिद ने गोकशी और गंगा में अवैध खनन करने के मामले में भी पार्टी के अन्य नेताओं पर हमला बोल दिया। इसके बाद विधायक आबिद सभी के निशाने पर आ गए। उनके बयानों के बाद पार्टी के नेताओं द्वारा विधायक आबिद की घेराबंदी शुरू हुई तो उनकी पत्नी फात्मा रजा ने सीधे सांसद पर हमला बोलते हुए अपने शौहर की जान का खतरा बताया। विधायक ने कार्रवाई न होने पर एक हफ्ते बाद दर्जा राज्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की भी चेतावनी दी थी। सूत्र बताते हैं कि आलाकमान के इशारे पर पार्टी के जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट तैयार की, जिस पर कुछ घंटों में ही फैसला ले लिया गया। इसके बाद पति-पत्नी दोनों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
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