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Budaun News: महिला अस्पताल में अवैध वसूली, रुपये के अभाव में तड़प रहीं गर्भवती
Tue, 31 Dec 2024 01:11 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 31 Dec 2024 01:11 AM IST
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जिला महिला अस्पताल। संवाद
बदायूं। महिला अस्पताल में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली हो रही है। आरोप है कि रविवार को रुपये न देने पर गर्भवती महिलाएं तड़पती रहीं और कर्मचारी व डॉक्टर ने उनको देखा तक नहीं। जिसके तीमारदार रुपये दे रहे थे उनको कुछ ही देर में खुशखबरी मिल रही थी। जबकि, रुपये के अभाव में बाकी गर्भवती तड़प रहीं थीं।
बिल्सी क्षेत्र के गांव लहरा असदुल्लापुर निवासी यूसुफ ने अपना दर्द सुनाया। उन्होंने कहा कि पत्नी शहाना बेगम को प्रसव पीड़ा हुई तो उसे शनिवार की रात को महिला अस्पताल में भर्ती कराया। 24 घंटे से न तो कर्मचारी देख रहे हैं और न ही डॉक्टर। यहां तो सब रुपये का खेल चल रहा है। पत्नी करीब दो घंटे से प्रसव पीड़ा से परेशान है। अब घर से रुपये मंगाने को फोन किया है। रुपये देने के बाद ही प्रसव हो सकेगा।
वहीं, वजीरगंज विकासखंड के गांव इटौआ निवासी हरिओम शर्मा ने बताया कि पुत्रवधु रचना को प्रसव पीड़ा होने पर सैदपुर सीएचसी पर ले गए। यहां डॉक्टर ने सामान्य प्रसव होने की बात कही, लेकिन खून कम होने की वजह से महिला अस्पताल रेफर कर दिया। रविवार को दोपहर करीब एक बजे यहां भर्ती कराया। डॉक्टर ने देखा और चलीं गईं।
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एक महिला कर्मचारी ने पांच हजार रुपये की मांग की, रुपये न होने की बात कही तो तीन बजे तक न तो कर्मचारी ने हाथ लगाया और न डॉक्टर ने। मरीज को तड़पता देख तीन हजार रुपये दे दिए। रुपये देने के दस मिनट के बाद ही प्रसव करा दिया गया। इस तरह से मरीज व तीमारदारों को डराया जाता है कि रुपये देना मजबूरी हो जाती है। सरकारी अस्पताल केवल नाम का है यहां तो बिना रुपये के मरीज को देखने वाला भी कोई नहीं है।
ऑपरेशन कहकर डरा देते हैं डॉक्टर, कर्मचारी
आरोप है कि महिला अस्पताल के चिकित्सक अपने काम से बचने के लिए प्रसूता के परिवार वालों को ऑपरेशन की बात कहकर डरा देते हैं। महिला अस्पताल में जब कोई प्रसूता पहुंचती है तो चिकित्सक उसका परीक्षण कर सबसे पहले ऑपरेशन की बात कहते हैं। जिससे कि परिवार वाले प्रसूता को किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाएं। रविवार शाम को भी जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर ने एक प्रसूता का परीक्षण करने के बाद उसके पति से कहा ऑपरेशन करना पड़ सकता है, इससे घरवाले डर गए और मरीज को प्राइवेट अस्पताल में ले गए।
ऐसी कोई शिकायत उनके पास तक नहीं आई है। अगर कोई शिकायत करेगा तो जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होगी। किसी मरीज से रुपये लेना गलत है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।- डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल
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बिल्सी क्षेत्र के गांव लहरा असदुल्लापुर निवासी यूसुफ ने अपना दर्द सुनाया। उन्होंने कहा कि पत्नी शहाना बेगम को प्रसव पीड़ा हुई तो उसे शनिवार की रात को महिला अस्पताल में भर्ती कराया। 24 घंटे से न तो कर्मचारी देख रहे हैं और न ही डॉक्टर। यहां तो सब रुपये का खेल चल रहा है। पत्नी करीब दो घंटे से प्रसव पीड़ा से परेशान है। अब घर से रुपये मंगाने को फोन किया है। रुपये देने के बाद ही प्रसव हो सकेगा।
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वहीं, वजीरगंज विकासखंड के गांव इटौआ निवासी हरिओम शर्मा ने बताया कि पुत्रवधु रचना को प्रसव पीड़ा होने पर सैदपुर सीएचसी पर ले गए। यहां डॉक्टर ने सामान्य प्रसव होने की बात कही, लेकिन खून कम होने की वजह से महिला अस्पताल रेफर कर दिया। रविवार को दोपहर करीब एक बजे यहां भर्ती कराया। डॉक्टर ने देखा और चलीं गईं।
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एक महिला कर्मचारी ने पांच हजार रुपये की मांग की, रुपये न होने की बात कही तो तीन बजे तक न तो कर्मचारी ने हाथ लगाया और न डॉक्टर ने। मरीज को तड़पता देख तीन हजार रुपये दे दिए। रुपये देने के दस मिनट के बाद ही प्रसव करा दिया गया। इस तरह से मरीज व तीमारदारों को डराया जाता है कि रुपये देना मजबूरी हो जाती है। सरकारी अस्पताल केवल नाम का है यहां तो बिना रुपये के मरीज को देखने वाला भी कोई नहीं है।
ऑपरेशन कहकर डरा देते हैं डॉक्टर, कर्मचारी
आरोप है कि महिला अस्पताल के चिकित्सक अपने काम से बचने के लिए प्रसूता के परिवार वालों को ऑपरेशन की बात कहकर डरा देते हैं। महिला अस्पताल में जब कोई प्रसूता पहुंचती है तो चिकित्सक उसका परीक्षण कर सबसे पहले ऑपरेशन की बात कहते हैं। जिससे कि परिवार वाले प्रसूता को किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाएं। रविवार शाम को भी जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर ने एक प्रसूता का परीक्षण करने के बाद उसके पति से कहा ऑपरेशन करना पड़ सकता है, इससे घरवाले डर गए और मरीज को प्राइवेट अस्पताल में ले गए।
ऐसी कोई शिकायत उनके पास तक नहीं आई है। अगर कोई शिकायत करेगा तो जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होगी। किसी मरीज से रुपये लेना गलत है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।- डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल