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...फिर तो अफसर ही करा देंगे रेलवे की भूमि पर कब्जा!
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उझानी (बदायूं)। मिल कंपाउंड वाले छोर पर रेलवे की खाली पड़ी जमीन पर भूमाफिया की नजर बनी हुई है। आठ दिन पहले उसने मौके पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पीली बालू को अनलोड कराया और अब उससे गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया गया है। धीरे-धीरे चल रहे कब्जे के प्रयास में अफसरों की भूमिका पर सवाल उठने लगा है। अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में उस पर कब्जा भी हो जाएगा।
रेलवे की इस भूमि पर कब्जे की कोशिश सबसे पहले 15 जुलाई को की गई थी। एक भूमाफिया के इशारे पर उस दिन पीली बालू की छह-सात ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अनलोड की गई थीं। इसकी शिकायत अगले दिन रेलवे के अफसरों समेत आरपीएफ इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह से की गई थी। आरपीएफ ने मौके पर पहुंचकर वहां से मजदूरों को खदेड़ने के बाद चालक समेत दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को कब्जे में लिया था लेकिन उसी दिन शाम को चालक को क्लीनचिट देकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को छोड़ दिया गया था। इसके बाद तीन दिन के अंदर उसी बालू का खाली भूमि पर फैलाने का काम जिस तरह से किया जा रहा है, उसे देख लोगों को जल्द ही कब्जा हो जाने की आशंका सताने लगी है। बताते हैं कि भू-माफिया रेलवे की भूमि पर कब्जा करने से पहले उसे समतल करना चाहता है। मोहल्ले के लोगों से भी यही कहा गया है कि बारिश के पानी के भराव से निजात दिलाने के लिए ही भराव किया जा रहा है।
रास्ता बना लिया तो प्लॉट काटना होगा आसान
उझानी। रेलवे की खाली भूमि पर कब्जे की कोशिश को लेकर तीन दिन पहले मोहल्ले के एक व्यक्ति ने रेलवे कर्मी से यही कहा था कि बारिश का पानी भर जाने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ेगा। इसीलिए सामने वाले घरों तक पहुंचने के लिए अस्थायी रास्ता बनने के बाद इलाके में सफाई भी रहेगी। इस तर्क के पीछे असलियत पर गौर करें तो रास्ते के पीछे भू-माफिया आगे चलकर प्लॉट काटना चाहता है।
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रेलवे की इस भूमि पर कब्जे की कोशिश सबसे पहले 15 जुलाई को की गई थी। एक भूमाफिया के इशारे पर उस दिन पीली बालू की छह-सात ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अनलोड की गई थीं। इसकी शिकायत अगले दिन रेलवे के अफसरों समेत आरपीएफ इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह से की गई थी। आरपीएफ ने मौके पर पहुंचकर वहां से मजदूरों को खदेड़ने के बाद चालक समेत दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को कब्जे में लिया था लेकिन उसी दिन शाम को चालक को क्लीनचिट देकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को छोड़ दिया गया था। इसके बाद तीन दिन के अंदर उसी बालू का खाली भूमि पर फैलाने का काम जिस तरह से किया जा रहा है, उसे देख लोगों को जल्द ही कब्जा हो जाने की आशंका सताने लगी है। बताते हैं कि भू-माफिया रेलवे की भूमि पर कब्जा करने से पहले उसे समतल करना चाहता है। मोहल्ले के लोगों से भी यही कहा गया है कि बारिश के पानी के भराव से निजात दिलाने के लिए ही भराव किया जा रहा है।
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रास्ता बना लिया तो प्लॉट काटना होगा आसान
उझानी। रेलवे की खाली भूमि पर कब्जे की कोशिश को लेकर तीन दिन पहले मोहल्ले के एक व्यक्ति ने रेलवे कर्मी से यही कहा था कि बारिश का पानी भर जाने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ेगा। इसीलिए सामने वाले घरों तक पहुंचने के लिए अस्थायी रास्ता बनने के बाद इलाके में सफाई भी रहेगी। इस तर्क के पीछे असलियत पर गौर करें तो रास्ते के पीछे भू-माफिया आगे चलकर प्लॉट काटना चाहता है।
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