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Budaun News: बेटी पढ़ी-लिखी हो नस्ल दर नस्ल कामयाबी मिलती है
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सैदपुर। मोहल्ला अशरफ नगर बड़ा तकिया में नजफ अशरफ रहमतुल्ला अलैह की दरगाह पर उर्स हुआ।
यहां पर पीलीभीत के मौलाना अहमद राजा मंजरी ने कहा कि इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हुजूर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कार्यों से प्रेरणा लेकर अल्लाह ताला के मार्ग में पुण्य कार्य करना चाहिए। सहाबिये रसूल और बुजुर्गाने दीन ने जो समाज के लिए जो पैगाम दिया। उस पर अमल करते हुए समाज में व्याप्त बुराइयों से से निजात दिलाना चाहिए।
अलीगढ़ अलवर कातिया इंस्टीट्यूट के डॉयरेक्टर मौलाना सैय्यद अमान मियां ने बेटियों की अच्छी परवरिश और शिक्षा पर जोर देते हुए अपनी तकरीर में कहा अगर बेटी पढ़ी लिखी होगी तो नस्ल दर नस्ल कामयाबी की मिसाल पेश करेगी। प्यारे नबी की बेटियों की मोहब्बत और परवरिश की मिसाल पूरी दुनिया में आज भी कायम है। रात भर चले तकरीर कार्यक्रम के बाद सुबह आठ बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
इस मौके पर सलातो सलाम फातिहा पढ़ी गई। देश की तरक्की और शांति के लिए दुआ मांगी गई। दरगाह प्रबंधक कमेटी की तरफ से माकूल लंगर का इंतजाम किया गया। ईदगाह के पेशे इमाम मुफ्ती सैय्यद वाकिफ अली अशरफी, मुफ्ती शाने आलम, इमाम अफलाक रजा, ईद गाह के पूर्व पेशे इमाम मौलाना शाने आलम खान, मौलाना राहिल रजा मौजूद रहे।
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यहां पर पीलीभीत के मौलाना अहमद राजा मंजरी ने कहा कि इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हुजूर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कार्यों से प्रेरणा लेकर अल्लाह ताला के मार्ग में पुण्य कार्य करना चाहिए। सहाबिये रसूल और बुजुर्गाने दीन ने जो समाज के लिए जो पैगाम दिया। उस पर अमल करते हुए समाज में व्याप्त बुराइयों से से निजात दिलाना चाहिए।
अलीगढ़ अलवर कातिया इंस्टीट्यूट के डॉयरेक्टर मौलाना सैय्यद अमान मियां ने बेटियों की अच्छी परवरिश और शिक्षा पर जोर देते हुए अपनी तकरीर में कहा अगर बेटी पढ़ी लिखी होगी तो नस्ल दर नस्ल कामयाबी की मिसाल पेश करेगी। प्यारे नबी की बेटियों की मोहब्बत और परवरिश की मिसाल पूरी दुनिया में आज भी कायम है। रात भर चले तकरीर कार्यक्रम के बाद सुबह आठ बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
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इस मौके पर सलातो सलाम फातिहा पढ़ी गई। देश की तरक्की और शांति के लिए दुआ मांगी गई। दरगाह प्रबंधक कमेटी की तरफ से माकूल लंगर का इंतजाम किया गया। ईदगाह के पेशे इमाम मुफ्ती सैय्यद वाकिफ अली अशरफी, मुफ्ती शाने आलम, इमाम अफलाक रजा, ईद गाह के पूर्व पेशे इमाम मौलाना शाने आलम खान, मौलाना राहिल रजा मौजूद रहे।
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