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Budaun News: मेडिकल कॉलेज में आईसीयू का नहीं मिल रहा लाभ
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मेडिकल कॉलेज में बना आईसीयू वार्ड में खाली पड़े बेड। स्रोत- सोशल मीडिया
बदायूं। मेडिकल कॉलेज में बना बीस बेड का आईसीयू मरीजों को सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। किसी न किसी कमी के चलते यह आए दिन बंद ही रहता है। वहीं यहां जहां 167 वेंटिलेटर हैं, जबकि इनमें सिर्फ आठ ही काम कर रहे हैं। कॉलेज के सूत्रों का कहना है कि संसाधन व कर्मचारियों की कमी से यह दिक्कत है। हालांकि विभागीय जिम्मेदार आईसीयू संचालन होने की बात कह रहे है।
मेडिकल कॉलेज में हर दिन करीब दो से ढाई हजार मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा 250 से 300 मरीज भर्ती किए जाते हैं। गंभीर बीमारियों से जुड़े मरीजों को आईसीयू व वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है, लेकिन यहां पर इनकी सुविधा सही न होने से मरीजों को दूसरे अस्पतालों को जाना पड़ता है।
वहीं मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए कासगंज, संभल, बरेली, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों के सैकड़ों मरीज हर दिन आते हैं। यहां पर एनआईसीयू, एसआईसीयू, एमआईसीयू आदि वार्ड हैं। इन वार्डों में जरूरी संसाधन व संसाधनों की कमी के चलते इनका पूरी तरह से लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
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खाली मिला आईसीयू वार्ड
शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जब मेडिकल कॉलेज पहुंची तो वहां पड़ताल में आईसीयू वार्ड खाली मिला। वार्ड में गेट बंद था, लेकिन ताला नहीं लगा था। यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला। मौजूद कर्मचारियों व चिकित्सकों ने बताया कि मरीजों की संख्या कम होने से वार्ड खाली है, जबकि हकीकत यह है कि संसाधन व कर्मचारियों की कमी के चलते इस वार्ड में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। लेकिन अधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि कोई नहीं कर रहा है।
आईसीयू वार्ड पूरी तौर से संचालित है। इस समय वहां डॉक्टर के न होने से कुछ समस्या है। यहां पर 167 वेंटिलेटर हैं। इनमें दस वेंटिलेटर वार्डों में लगे हैं, जिनमें अभी आठ सही तरीके से काम कर रहे हैं। मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जाती हैं, जो कमियां हैं उन्हें लगातार दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। - प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल काॅलेज, बदायूं
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मेडिकल कॉलेज में हर दिन करीब दो से ढाई हजार मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा 250 से 300 मरीज भर्ती किए जाते हैं। गंभीर बीमारियों से जुड़े मरीजों को आईसीयू व वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है, लेकिन यहां पर इनकी सुविधा सही न होने से मरीजों को दूसरे अस्पतालों को जाना पड़ता है।
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वहीं मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए कासगंज, संभल, बरेली, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों के सैकड़ों मरीज हर दिन आते हैं। यहां पर एनआईसीयू, एसआईसीयू, एमआईसीयू आदि वार्ड हैं। इन वार्डों में जरूरी संसाधन व संसाधनों की कमी के चलते इनका पूरी तरह से लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
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खाली मिला आईसीयू वार्ड
शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जब मेडिकल कॉलेज पहुंची तो वहां पड़ताल में आईसीयू वार्ड खाली मिला। वार्ड में गेट बंद था, लेकिन ताला नहीं लगा था। यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला। मौजूद कर्मचारियों व चिकित्सकों ने बताया कि मरीजों की संख्या कम होने से वार्ड खाली है, जबकि हकीकत यह है कि संसाधन व कर्मचारियों की कमी के चलते इस वार्ड में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। लेकिन अधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि कोई नहीं कर रहा है।
आईसीयू वार्ड पूरी तौर से संचालित है। इस समय वहां डॉक्टर के न होने से कुछ समस्या है। यहां पर 167 वेंटिलेटर हैं। इनमें दस वेंटिलेटर वार्डों में लगे हैं, जिनमें अभी आठ सही तरीके से काम कर रहे हैं। मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जाती हैं, जो कमियां हैं उन्हें लगातार दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। - प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल काॅलेज, बदायूं