{"_id":"6716bab32ca5f55b3c094924","slug":"i-have-spent-my-whole-life-thinking-about-what-he-would-think-of-me-badaun-news-c-123-1-sbly1029-128169-2024-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: कटी है उम्र ये सोचने में, मेरे बारे में वो क्या सोचता होगा...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: कटी है उम्र ये सोचने में, मेरे बारे में वो क्या सोचता होगा...
विज्ञापन
फेसबुक पर प्रशंसकों ने फहीम बदायूंनी को श्रद्धांजलि दी। स्त्रोत सोशल मीडिया
बदायूं। अंतरराष्ट्रीय शायर फहमी बदायूंनी के निधन के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनके शेर लिखकर उन्हें याद कर रहे हैं।
फेसबुक, एक्स व इंस्टाग्राम पर सोमवर को उनके शेयर खूब दिखे। साहिल लुधियानवी ने लिखा.. यहां कोई दरिया दिल नहीं है, सब अपना-अपना पानी भर रहे हैं। तेरी खुशबू से जो वाकिफ नहीं है, वो फूलों से गुजारा कर रहे हैं। बदायूं के सांसद आदित्य यादव ने लिखा- पूछ लेते बस वो मिजाज मेरा, कितना आसान था इलाज मेरा...।
इसके अलावा अनुराग शुक्ला ने लिखा- खुशी से कांप रहीं थीं ये अंगुलियां इतनी, डिलीट हो गया एक शख्स सेव करने में...। फरीद बिसौलवीं ने लिखा- अलविदा फहमी बदायूंनी साहब। अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि अरुण जेमिनी ने लिखा- शहर का शहर खूबसूरत है, आप क्या हर मकां में रहते हैं...। इमरान प्रतापगढ़ी ने भी लिखा कि अलविदा फहमी बदायूंनी साहब, आपका जाना ऊर्दू अदब का बड़ा नुकसान है। सोचा था जल्द ही किसी महफिल में आपको जी भरकर सुना जाएगा, लेकिन यह अफसोसजनक खबर आ गई।
बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया ने लिखा.. तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं, कैसे मिलता कोई था ही नहीं...। लेखिका मनिका दुबे ने लिखा तुम्हें बस ये बताना चाहता हूं, मैं तुमसे क्या छिपाना चाहता हूं, कभी मुझसे भी कोई झूठ बोलो, मैं हां में हां मिलाना चाहता हूं। लेखिका व कवि डॉ. श्वेता अजल ने लिखा अब उनको याद करके रो रहे हैं, बिछड़ते वक्त रोना चाहिए था। इसके अलावा कई शायरों व लेखकों ने फहमी साहब को उनकी शायरी पढ़कर याद किया। सोशल मीडिया पर फहमी साहब के शेर खूब पढ़े जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
फेसबुक, एक्स व इंस्टाग्राम पर सोमवर को उनके शेयर खूब दिखे। साहिल लुधियानवी ने लिखा.. यहां कोई दरिया दिल नहीं है, सब अपना-अपना पानी भर रहे हैं। तेरी खुशबू से जो वाकिफ नहीं है, वो फूलों से गुजारा कर रहे हैं। बदायूं के सांसद आदित्य यादव ने लिखा- पूछ लेते बस वो मिजाज मेरा, कितना आसान था इलाज मेरा...।
इसके अलावा अनुराग शुक्ला ने लिखा- खुशी से कांप रहीं थीं ये अंगुलियां इतनी, डिलीट हो गया एक शख्स सेव करने में...। फरीद बिसौलवीं ने लिखा- अलविदा फहमी बदायूंनी साहब। अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि अरुण जेमिनी ने लिखा- शहर का शहर खूबसूरत है, आप क्या हर मकां में रहते हैं...। इमरान प्रतापगढ़ी ने भी लिखा कि अलविदा फहमी बदायूंनी साहब, आपका जाना ऊर्दू अदब का बड़ा नुकसान है। सोचा था जल्द ही किसी महफिल में आपको जी भरकर सुना जाएगा, लेकिन यह अफसोसजनक खबर आ गई।
विज्ञापन
बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया ने लिखा.. तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं, कैसे मिलता कोई था ही नहीं...। लेखिका मनिका दुबे ने लिखा तुम्हें बस ये बताना चाहता हूं, मैं तुमसे क्या छिपाना चाहता हूं, कभी मुझसे भी कोई झूठ बोलो, मैं हां में हां मिलाना चाहता हूं। लेखिका व कवि डॉ. श्वेता अजल ने लिखा अब उनको याद करके रो रहे हैं, बिछड़ते वक्त रोना चाहिए था। इसके अलावा कई शायरों व लेखकों ने फहमी साहब को उनकी शायरी पढ़कर याद किया। सोशल मीडिया पर फहमी साहब के शेर खूब पढ़े जा रहे हैं।
विज्ञापन