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कैसे लड़ें अपराधियों से जंग, सारथी नहीं संग
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2016 11:57 PM IST
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वाहन चालकों की कमी से जूझ रहे जिले के थाने
अप्रशिक्षित सिपाही दौड़ा रहे थानों के वाहन
जिले के थानों में वाहन चालकों की भारी किल्लत है। इसका असर पुलिस के अभियानों पर पड़ता दिख रहा है। जिले के 22 थानों में 44 जीपें हैं, लेकिन ड्राइवर सिर्फ 19 हैं। कई थाने ड्राइवर विहीन हैं। यहां अप्रशिक्षित सिपाहियों को पुलिस जीपें दौड़ाते हुए देखा जा सकता है। पिछले दिनों उझानी और उघैती में पुलिस जीपों के दुर्घटनाग्रस्त होने का यही कारण रहा।
जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति किसी से छिपी हुई नहीं है। अब तक थानों में पुलिस के पास एक-एक जीप थी। बेहतर कानून व्यवस्था और पुलिस मूवमेंट के लिए शासन ने सभी 22 थानों को एक-एक और जीप मुहैया कराई थी। अब जिले के 21 और एक महिला थाने में पुलिस के पास 44 जीपें हैं। पुलिस की जीपों में तो इजाफा हुआ, लेकिन ड्राइवरों की संख्या नहीं बढ़ी। पुलिस ने इन 44 जीपों को ड्राइव करने के लिए थानों में सिर्फ 19 ड्राइवर हैं। हालांकि पुलिस के पास कुछ और भारी वाहनों के साथ अधिकारियों के वाहन भी हैं, लेकिन चालकों की कमी सिर्फ थानों में है। कुंवरगांव थाने में पुलिस के पास दो जीपें हैं और ड्राइवर एक भी नहीं है। जरीफनगर, उसहैत, इस्लामनगर, सहसवान, बिनावर, उसावां, दातागंज, हजरतपुर, उझानी, बिल्सी, बिसौली, वजीरगंज, फैजगंज बेहटा, मुजरिया, उघैती, अलापुर, सिविल लाइंस, कोतवाली, कादरचौक, मूसाझाग थानों में एक-एक चालक ही है। अक्सर ड्राइवरों के अवकाश पर होने की वजह से थानों की सिपाही पुलिस जीपों को जलाते हैं। इससे कई बार जीपें दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं।
अब तक पीएसी से ड्राइवर पुलिस में आया करते थे। कुछ समय से ऐसा नहीं हो रहा है। शासन ने कानून व्यवस्था बेहतर करने के लिए हर थाने को दो-दो जीपें मुहैया कराई हैं। ड्राइवरों की कमी होने की वजह से इन जीपों को लाने में लाइसेंसधारी सिपाहियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जल्द ड्राइवरों की कमी पूरी हो जाएगी।
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-सौमित्र यादव, एसएसपी
अप्रशिक्षित सिपाही दौड़ा रहे थानों के वाहन
जिले के थानों में वाहन चालकों की भारी किल्लत है। इसका असर पुलिस के अभियानों पर पड़ता दिख रहा है। जिले के 22 थानों में 44 जीपें हैं, लेकिन ड्राइवर सिर्फ 19 हैं। कई थाने ड्राइवर विहीन हैं। यहां अप्रशिक्षित सिपाहियों को पुलिस जीपें दौड़ाते हुए देखा जा सकता है। पिछले दिनों उझानी और उघैती में पुलिस जीपों के दुर्घटनाग्रस्त होने का यही कारण रहा।
जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति किसी से छिपी हुई नहीं है। अब तक थानों में पुलिस के पास एक-एक जीप थी। बेहतर कानून व्यवस्था और पुलिस मूवमेंट के लिए शासन ने सभी 22 थानों को एक-एक और जीप मुहैया कराई थी। अब जिले के 21 और एक महिला थाने में पुलिस के पास 44 जीपें हैं। पुलिस की जीपों में तो इजाफा हुआ, लेकिन ड्राइवरों की संख्या नहीं बढ़ी। पुलिस ने इन 44 जीपों को ड्राइव करने के लिए थानों में सिर्फ 19 ड्राइवर हैं। हालांकि पुलिस के पास कुछ और भारी वाहनों के साथ अधिकारियों के वाहन भी हैं, लेकिन चालकों की कमी सिर्फ थानों में है। कुंवरगांव थाने में पुलिस के पास दो जीपें हैं और ड्राइवर एक भी नहीं है। जरीफनगर, उसहैत, इस्लामनगर, सहसवान, बिनावर, उसावां, दातागंज, हजरतपुर, उझानी, बिल्सी, बिसौली, वजीरगंज, फैजगंज बेहटा, मुजरिया, उघैती, अलापुर, सिविल लाइंस, कोतवाली, कादरचौक, मूसाझाग थानों में एक-एक चालक ही है। अक्सर ड्राइवरों के अवकाश पर होने की वजह से थानों की सिपाही पुलिस जीपों को जलाते हैं। इससे कई बार जीपें दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं।
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अब तक पीएसी से ड्राइवर पुलिस में आया करते थे। कुछ समय से ऐसा नहीं हो रहा है। शासन ने कानून व्यवस्था बेहतर करने के लिए हर थाने को दो-दो जीपें मुहैया कराई हैं। ड्राइवरों की कमी होने की वजह से इन जीपों को लाने में लाइसेंसधारी सिपाहियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जल्द ड्राइवरों की कमी पूरी हो जाएगी।
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-सौमित्र यादव, एसएसपी