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निदेशालय से बड़ी कार्रवाई जल्द
बदायूं।
Updated Sun, 15 Feb 2015 12:31 AM IST
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लगातार सुर्खियों में रही सहसवान की हॉटकुक्ड परियोजना में घोटाले के मामले में निदशालय स्तर से जल्द ही बड़ी कार्रवाई के आसार हैं। गत वर्ष हॉटकु क्ड परियोजना में नौ लाख रुपये के बंदरबांट के मामले में जहां तत्कालीन परियोजना अधिकारी और एक बाबू पर कार्रवाई हो चुकी है, वहीं डेढ़ दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी सहायिकाओं की अवैध नियुक्ति का जिन भी बाहर आ चुका है। बावजूद इसके जांच के नाम पर छह सहायिकाओं की जांच लटकाई जा रही है। यह जानकारी निदेशक बाल विकास तक पहुंचने के बाद उन्होंने शाहजहांपुर की डीपीओ बुद्धि दुबे से गुप्त जांच कराई है। बु्द्धि दुबे अपनी रिपोर्ट निदेशालय को दे चुकी हैं।
गत वर्ष के हॉटकुक्ड वितरण में नौ लाख रुपये के घोटाले के मामले की जांच को उलझाने के लिए दो-दो परियोजना अधिकारियों को जांच दी गई है। इसका परिणाम है कि अभी भी 11 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां कार्रवाई से बची हुई हैं। फर्जी नियुक्ति में भी कुछ नहीं हो पा रहा है। यही नहीं, घोटालों के कारण परियोजना अधिकारी सीमा माथुर और कर्मचारी बव्वन पर कार्रवाई होने के बाद से कोई परियोजना अधिकारी यहां का चार्ज भी नहीं ले रही हैं। नतीजतन, मुख्य सेविका दयावती को चार्ज दे दिया गया है।
इस बीच छह सहायिकाओं की अवैध नियुक्ति की जांच भी मौजूदा डीपीओ ने शुरू करा दी है। बता दें कि डेढ़ दर्जन से अधिक सहायिकाओं को नियुक्तियों पर रोक के बावजूद नियुक्ति दे दी गई है।
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परियोजना में भारी घोटाले हैं। निदेशालय ने भी इसे संज्ञान में लिया है। वह अपने स्तर से जांच करा रही हैै।
- निर्मला शर्मा, डीपीओ, बाल विकास एवं पुष्टाहार योजना
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गत वर्ष के हॉटकुक्ड वितरण में नौ लाख रुपये के घोटाले के मामले की जांच को उलझाने के लिए दो-दो परियोजना अधिकारियों को जांच दी गई है। इसका परिणाम है कि अभी भी 11 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां कार्रवाई से बची हुई हैं। फर्जी नियुक्ति में भी कुछ नहीं हो पा रहा है। यही नहीं, घोटालों के कारण परियोजना अधिकारी सीमा माथुर और कर्मचारी बव्वन पर कार्रवाई होने के बाद से कोई परियोजना अधिकारी यहां का चार्ज भी नहीं ले रही हैं। नतीजतन, मुख्य सेविका दयावती को चार्ज दे दिया गया है।
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इस बीच छह सहायिकाओं की अवैध नियुक्ति की जांच भी मौजूदा डीपीओ ने शुरू करा दी है। बता दें कि डेढ़ दर्जन से अधिक सहायिकाओं को नियुक्तियों पर रोक के बावजूद नियुक्ति दे दी गई है।
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परियोजना में भारी घोटाले हैं। निदेशालय ने भी इसे संज्ञान में लिया है। वह अपने स्तर से जांच करा रही हैै।
- निर्मला शर्मा, डीपीओ, बाल विकास एवं पुष्टाहार योजना