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Budaun News: शुरू नहीं हो सका दो साल पहले बना छात्रावास
Fri, 08 Sep 2023 02:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Fri, 08 Sep 2023 02:08 AM IST
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बदायूं। राजकीय महिला डिग्री कॉलेज में करीब दो साल पहले छात्राओं के लिए बनाया गया छात्रावास अभी तक संचालित नहीं हो सका है, जबकि निर्माणदायी संस्था ने इसे कॉलेज को हैंडओवर भी कर दिया था। इसकी मुख्य वजह वार्डन का नहीं होना बताया जा रहा हैं।
राजकीय महिला डिग्री कॉलेज में पढ़ाई की शुरुआत 2016 से हुई है। कॉलेज की इमारत के साथ ही यहां एक हॉस्टल भी बनाया जाना था। इसके पीछे मंशा यह थी कि शहर में यह इकलौता सरकारी महिला महाविद्यालय था। ऐसे में यहां पढ़ने वाली छात्राओं के रहने की उम्मीद थी। हालांकि उम्मीद के मुताबिक यहां छात्राओं की संख्या काफी है।
इनमें शहर के अलावा अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय आती हैं और पढ़ाई के बाद में अपने घरों लौट जाती हैं। वहीं, कुछ छात्राएं शहर में ही कोचिंग करती हैं। इसकी वजह से उनको घर लौटने में रात हो जाती है, इससे छात्राओं को काफी परेशानी होती है। ऐसी छात्राओं को हॉस्टल का काफी लाभ मिल सकता है।
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करीब दो साल पहले राजकीय निर्माण निगम ने हॉस्टल के लिए भवन बनाकर कॉलेज प्रशासन के हैंडओवर कर दिया था, लेकिन कॉलेज प्रशासन अभी तक इसे शुरू नहीं कर सका है। हॉस्टल में छात्राओं की सुरक्षा का जिम्मा कॉलेज प्रशासन का है, इसलिए शासन स्तर से वार्डन की मांग की जा रही है, लेकिन वह अभी तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है।
सुबह की पाली में परीक्षा होने पर होती है दिक्कत
ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को सुबह पहली पाली में होने वाली परीक्षा के समय तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। इसको ध्यान में रखते हुए प्राचार्य ने छात्राओं को निर्देशित किया है कि अगर छात्राएं परीक्षा अवधि में छात्रावास में रुकना चाहती है तो एक प्रार्थना पत्र दे सकती है, लेकिन कम से कम पांच छात्राएं एक साथ रुक सकती हैं। इससे कम होने पर अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे ज्यादा छात्राएं रुक सकती हैं।
वर्जन--
राजकीय निर्माण निगम की ओर से छात्रावास का निर्माण कराया गया था। संस्था ने इसे हैंडओवर भी कर दिया था, लेकिन वार्डन नहीं होने की वजह से उसे अभी शुरू नहीं किया गया है। छात्राओं की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है, इसलिए शासन से वार्डन की मांग की जा चुकी है। -डॉ. स्मिता जैन, प्राचार्य, राजकीय महिला डिग्री कॉलेज
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राजकीय महिला डिग्री कॉलेज में पढ़ाई की शुरुआत 2016 से हुई है। कॉलेज की इमारत के साथ ही यहां एक हॉस्टल भी बनाया जाना था। इसके पीछे मंशा यह थी कि शहर में यह इकलौता सरकारी महिला महाविद्यालय था। ऐसे में यहां पढ़ने वाली छात्राओं के रहने की उम्मीद थी। हालांकि उम्मीद के मुताबिक यहां छात्राओं की संख्या काफी है।
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इनमें शहर के अलावा अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय आती हैं और पढ़ाई के बाद में अपने घरों लौट जाती हैं। वहीं, कुछ छात्राएं शहर में ही कोचिंग करती हैं। इसकी वजह से उनको घर लौटने में रात हो जाती है, इससे छात्राओं को काफी परेशानी होती है। ऐसी छात्राओं को हॉस्टल का काफी लाभ मिल सकता है।
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करीब दो साल पहले राजकीय निर्माण निगम ने हॉस्टल के लिए भवन बनाकर कॉलेज प्रशासन के हैंडओवर कर दिया था, लेकिन कॉलेज प्रशासन अभी तक इसे शुरू नहीं कर सका है। हॉस्टल में छात्राओं की सुरक्षा का जिम्मा कॉलेज प्रशासन का है, इसलिए शासन स्तर से वार्डन की मांग की जा रही है, लेकिन वह अभी तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है।
सुबह की पाली में परीक्षा होने पर होती है दिक्कत
ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को सुबह पहली पाली में होने वाली परीक्षा के समय तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। इसको ध्यान में रखते हुए प्राचार्य ने छात्राओं को निर्देशित किया है कि अगर छात्राएं परीक्षा अवधि में छात्रावास में रुकना चाहती है तो एक प्रार्थना पत्र दे सकती है, लेकिन कम से कम पांच छात्राएं एक साथ रुक सकती हैं। इससे कम होने पर अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे ज्यादा छात्राएं रुक सकती हैं।
वर्जन
राजकीय निर्माण निगम की ओर से छात्रावास का निर्माण कराया गया था। संस्था ने इसे हैंडओवर भी कर दिया था, लेकिन वार्डन नहीं होने की वजह से उसे अभी शुरू नहीं किया गया है। छात्राओं की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है, इसलिए शासन से वार्डन की मांग की जा चुकी है। -डॉ. स्मिता जैन, प्राचार्य, राजकीय महिला डिग्री कॉलेज