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Budaun News: नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले की सुनवाई पांच जुलाई को
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बदायूं। नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले की सुनवाई पांच जुलाई को होगी। बुधवार को हुई सुनवाई के बाद अगली तिथि दी गई। इसी के साथ ही अब यह मामला सिविल जज सीनियर डिवीजन सुमन तिवारी की कोर्ट में चलेगा।
सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र चौधरी की न्यायालय में इस यह मामला अब तक विचाराधीन था। कोर्ट में इस बात को लेकर बहस हुई कि केस चलने योग्य है या नहीं। बुधवार को हुई बहस के बाद अगली तिथि दी गई और कोर्ट भी बदली गई। इससे पहले 20 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दलील दी कि इस मामले की सुनवाई नहीं होनी चाहिए। नीलकंठ महादेव मंदिर पक्ष के अधिवक्ताओं ने इसका विरोध किया था। कहा, सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी प्रकार के निर्णय लेने पर रोक लगाई है, न कि सुनवाई पर। अदालत में दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई। अब तक सरकारी वकील की ओर से बहस पूरी हो चुकी है और पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट भी प्राप्त हो चुकी है। वर्तमान में इंतजामिया कमेटी की ओर से बहस जारी है, जिसके बाद नीलकंठ महादेव मंदिर के वकील अपना पक्ष रखेंगे। सभी पक्षों की बहस के बाद कोर्ट यह निर्णय लेगा कि क्या यह मामला सुनवाई योग्य है या नहीं। नीलकंठ महादेव पक्ष के अधिवक्ता वेदप्रकाश साहू ने बताया, मामला अब सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में चलेगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के लिए पांच जुलाई की तारीख नियत की है। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पटेल ने 2022 में दावा किया था कि जामा मस्जिद की जगह पर पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था। मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने इस दावे को खारिज करते हुए मंदिर के अस्तित्व से इंकार किया है।
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सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र चौधरी की न्यायालय में इस यह मामला अब तक विचाराधीन था। कोर्ट में इस बात को लेकर बहस हुई कि केस चलने योग्य है या नहीं। बुधवार को हुई बहस के बाद अगली तिथि दी गई और कोर्ट भी बदली गई। इससे पहले 20 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दलील दी कि इस मामले की सुनवाई नहीं होनी चाहिए। नीलकंठ महादेव मंदिर पक्ष के अधिवक्ताओं ने इसका विरोध किया था। कहा, सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी प्रकार के निर्णय लेने पर रोक लगाई है, न कि सुनवाई पर। अदालत में दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई। अब तक सरकारी वकील की ओर से बहस पूरी हो चुकी है और पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट भी प्राप्त हो चुकी है। वर्तमान में इंतजामिया कमेटी की ओर से बहस जारी है, जिसके बाद नीलकंठ महादेव मंदिर के वकील अपना पक्ष रखेंगे। सभी पक्षों की बहस के बाद कोर्ट यह निर्णय लेगा कि क्या यह मामला सुनवाई योग्य है या नहीं। नीलकंठ महादेव पक्ष के अधिवक्ता वेदप्रकाश साहू ने बताया, मामला अब सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में चलेगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के लिए पांच जुलाई की तारीख नियत की है। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पटेल ने 2022 में दावा किया था कि जामा मस्जिद की जगह पर पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था। मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने इस दावे को खारिज करते हुए मंदिर के अस्तित्व से इंकार किया है।
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