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ऑक्सीजन कन्संट्रेटर को भी निजी अस्पतालों को बेचे जाने की आशंका, होगा सत्यापन
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बदायूं। सरकारी अस्पतालों के आधुनिक चिकित्सा उपकरण और दवाओं को निजी अस्पतालों में खपाए जाने का मामला सामने आने के बाद जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने ऑक्सीजन कन्संट्रेटर समेत अन्य चिकित्सा उपकरणों के सत्यापन का आदेश दिया है। सत्यापन के बाद असलियत सामने आएगी, कि कहीं कंसट्रेटर भी तो निजी अस्पतालों को नहीं बेच दिए गए।
हाल ही में जिला महिला अस्पताल के आधुनिक चिकित्सा उपकरण और दवाएं खेड़ा नवादा इलाके के निजी अस्पतालों में मिलने और सीएमओ की जांच टीम को प्रथम दृष्टया इस संबंध में साक्ष्य मिलने के बाद से सरकारी अस्पताल के चिकित्सा उपकरण और दवाओं को लेकर मामला गरमाया हुआ है।
सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय के स्तर से जांच टीम गठित कर दी गई है। इधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम भी सरकारी अस्पताल के चिकित्सा उपकरणों और दवाओं को निजी अस्पतालों में खपाए जाने को लेकर गंभीर हो गए हैं।
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दरअसल, जिला अस्पताल को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 65 आक्सीजन कन्संट्रेटर मिले थे। बाद में जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होने के साथ पाइप लाइन से भी ऑक्सीजन की सप्लाई चालू हो गई। इसके बाद से ऑक्सीजन कन्संट्रेटर का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो रहा। माना जा रहा है कि सत्यापन के बाद इसका पता चलेगा कि कहीं कन्सट्रेटर भी तो निजी अस्पतालों को नहीं बेच दिए गए। सीएमएस ने बताया कि ऑक्सीजन कन्संट्रेटर के सत्यापन का निर्देश दिया गया है। इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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निजी अस्पताल को सरकारी उपकरण बेचने का मामला आ चुका है सामने
पिछले दिनों जिला महिला अस्पताल के आधुनिक वार्ड में लगने को आए चिकित्सा उपकरण निजी अस्पतालों को बेचने का मामला सामने आ चुका है। यह निजी अस्पताल खेड़ा नवादा बरेली रोड पर हैं। निजी अस्पताल को उपकरण और दवाएं बेचने की सूचना पर सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने जब टीम को मौके पर भेजा था, तो यहां सरकारी चिकित्सा उपकरणों के खाली डिब्बे, पॉलीथिन मिलीं। सीएमओ की टीम ने आसपास के अन्य निजी अस्पतालों में पड़ताल की तो यहां भी सरकारी दवाओं के रेपर मिले। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। इस मामले की जांच चल रही है।
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काफी महंगा होता है ऑक्सीजन कन्संट्रेटर
ऑक्सजीन कन्संट्रेटर एक मेडिकल डिवाइस है, जो आसपास की हवा से ऑक्सीजन को एक साथ इकट्ठा करता है। पर्यावरण की हवा में 78 फीसदी नाइट्रोजन और 21 फीसदी ऑक्सीजन गैस होती है जबकि बाकी गैस एक फीसदी हैं। ऑक्सीजन कन्संट्रेटर इस हवा को अंदर लेता है, उसे फिल्टर करता है, नाइट्रोजन को वापस हवा में छोड़ देता है और बाकी बची ऑक्सीजन मरीजों को उपलब्ध कराता है। जिला अस्पताल को मिले 65 कन्संट्रेटर में से 45 पांच लीटर क्षमता वाले जबकि शेष 20 दस लीटर प्रति मिनट क्षमता वाले हैं। ऑक्सीजन कन्संट्रेटर की कीमत ज्यादा होती है। कोरोन काल में तो ये ब्लैक तक में बेचे गए थे। ऐसे में इनके निजी अस्पतालों में खपाए जाने की आशंका ज्यादा है।
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हाल ही में जिला महिला अस्पताल के आधुनिक चिकित्सा उपकरण और दवाएं खेड़ा नवादा इलाके के निजी अस्पतालों में मिलने और सीएमओ की जांच टीम को प्रथम दृष्टया इस संबंध में साक्ष्य मिलने के बाद से सरकारी अस्पताल के चिकित्सा उपकरण और दवाओं को लेकर मामला गरमाया हुआ है।
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सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय के स्तर से जांच टीम गठित कर दी गई है। इधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम भी सरकारी अस्पताल के चिकित्सा उपकरणों और दवाओं को निजी अस्पतालों में खपाए जाने को लेकर गंभीर हो गए हैं।
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दरअसल, जिला अस्पताल को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 65 आक्सीजन कन्संट्रेटर मिले थे। बाद में जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होने के साथ पाइप लाइन से भी ऑक्सीजन की सप्लाई चालू हो गई। इसके बाद से ऑक्सीजन कन्संट्रेटर का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो रहा। माना जा रहा है कि सत्यापन के बाद इसका पता चलेगा कि कहीं कन्सट्रेटर भी तो निजी अस्पतालों को नहीं बेच दिए गए। सीएमएस ने बताया कि ऑक्सीजन कन्संट्रेटर के सत्यापन का निर्देश दिया गया है। इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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निजी अस्पताल को सरकारी उपकरण बेचने का मामला आ चुका है सामने
पिछले दिनों जिला महिला अस्पताल के आधुनिक वार्ड में लगने को आए चिकित्सा उपकरण निजी अस्पतालों को बेचने का मामला सामने आ चुका है। यह निजी अस्पताल खेड़ा नवादा बरेली रोड पर हैं। निजी अस्पताल को उपकरण और दवाएं बेचने की सूचना पर सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने जब टीम को मौके पर भेजा था, तो यहां सरकारी चिकित्सा उपकरणों के खाली डिब्बे, पॉलीथिन मिलीं। सीएमओ की टीम ने आसपास के अन्य निजी अस्पतालों में पड़ताल की तो यहां भी सरकारी दवाओं के रेपर मिले। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। इस मामले की जांच चल रही है।
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काफी महंगा होता है ऑक्सीजन कन्संट्रेटर
ऑक्सजीन कन्संट्रेटर एक मेडिकल डिवाइस है, जो आसपास की हवा से ऑक्सीजन को एक साथ इकट्ठा करता है। पर्यावरण की हवा में 78 फीसदी नाइट्रोजन और 21 फीसदी ऑक्सीजन गैस होती है जबकि बाकी गैस एक फीसदी हैं। ऑक्सीजन कन्संट्रेटर इस हवा को अंदर लेता है, उसे फिल्टर करता है, नाइट्रोजन को वापस हवा में छोड़ देता है और बाकी बची ऑक्सीजन मरीजों को उपलब्ध कराता है। जिला अस्पताल को मिले 65 कन्संट्रेटर में से 45 पांच लीटर क्षमता वाले जबकि शेष 20 दस लीटर प्रति मिनट क्षमता वाले हैं। ऑक्सीजन कन्संट्रेटर की कीमत ज्यादा होती है। कोरोन काल में तो ये ब्लैक तक में बेचे गए थे। ऐसे में इनके निजी अस्पतालों में खपाए जाने की आशंका ज्यादा है।