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बस सिफारिश..पर्चा एक रुपये का, जांच हजारों की
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सीटी स्कैन विभाग। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। किसी भी रोग की जांच के लिए किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की संस्तुति आवश्यक है पर जिला अस्पताल में इसका उलट है। यहां जरूरत है किसी माननीय की सिफारिश की। सिफारिश के साथ जाइए, सीटी स्कैन तक की महंगी जांच भी महज एक रुपये के पर्चे पर हो जाएगी। और तो और निजी अस्पतालों या चिकित्सक से इलाज करा रहे मरीज भी यहां जहां फायदा उठा रहे हैं वहीं जरूरतमंद भटक रहे हैं।
जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा निजी कंपनी से अनुबंध पर चल रही है। इसके बदले सरकार निजी कंपनी को भुगतान करती है। सेवा दे रही कंपनी ने सिर, छाती, पेट या अन्य अंग के सीटी स्कैन के दरें अनुबंध के आधार पर तय कर रखी हैं। हर सीटी स्कैन पर सरकार को औसतन 1700 रुपये निजी कंपनी को भुगतान करने पड़ते हैं। जिला अस्पताल के सीटी स्कैन विभाग में प्रतिदिन औसतन 40 से 50 सीटी स्कैन हो रहे हैं। औसतन हर महीने यहां करीब 1500 सीटी स्कैन हो जाते हैं।
जिला अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इस बात को खुद स्वीकार करते हैं कि महीने में कुल होने वाले सीटी स्कैन में बमुश्किल 12 से 15 फीसदी ही ऐसे होते हैं जिसमें रोगी की जांच के लिए जरूरत होती है। बाकी तो बस सिफारिश पर होता है।
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शासन स्तर से जताई जा चुकी है नाराजगी
जिला अस्पताल में अंधाधुंध सीटी स्कैन को लेकर पिछले महीने शासन स्तर से भी नाराजगी जताई जा चुकी है। सीएमएस को निर्देशित किया गया था कि अनावश्यक सीटी स्कैन न कराए जाएं, इसके बाद सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने कुछ सख्ती भी की, लेकिन यह सख्ती काम नहीं आई। सख्ती के बावजूद महीने में 800-900 से बढ़कर सीटी स्कैन का आंकड़ा अब 1400-1500 तक पहुंच गया है। दरअसल, ओपीडी में कुछ डॉक्टर भी ऐसे हैं जो बेवजह सीटी स्कैन का सुझाव दे रहे हैं। इसका खामियाजा ऐसे रोगियों को भुगतना पड़ रहा है जिनको जांच के लिए वास्तव में सीटी स्कैन की जरूरत होती है।
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इलाज निजी और सीटी स्कैन जिला अस्पताल में
जिला अस्पताल में सीटी स्कैन समेत अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे और अन्य जांचें कराने वाले रोगियों में ऐसे रोगी भी हैं जो निजी नर्सिंगहोम में इलाज कराते हैं, लेकिन जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। एक रुपये का पर्चा बनवा कर यहां वह मुफ्त जांच करा लेते हैं। शनिवार को सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने ऐसे दो मामले पकड़े थे। एक रोगी के कुछ तीमारदार रोगी का सीटी स्कैन कराने पहुंचे थे। ओपीडी में डॉक्टर ने सीटी स्कैन का सुझाव दे दिया। रोगी के तीमारदार यह पर्चा लेकर सीएमएस के हस्ताक्षर कराने पहुंचे। सीएमएस ने रोगी के इलाज के बारे में पूछा तो तीमारदारों ने बताया कि इलाज निजी अस्पताल में करा रहे हैं। इस तरह का एक अन्य मामला भी सामने आया, जब रोगी का इलाज प्राइवेट अस्पताल में हो रहा था। दोनों ही मामलों में सीएमएस ने नाराजगी जताई। दरअसल, बाजार में सीटी स्कैन समेत अन्य जांचें काफी महंगी हैं जबकि जिला अस्पताल में यह मुफ्त हो रहीं हैं।
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यह बात सही है कि अस्पताल में जरूरत से ज्यादा सीटी स्कैन हो रहे हैं। कई ऐसे मामले भी पकड़ में आते हैं कि रोगी इलाज निजी अस्पताल में कराते हैं, लेकिन सीटी स्कैन कराने अस्पताल आ जाते हैं। कई बार माननीयों की सिफारिश पर भी सीटी स्कैन कराए जाते हैं। पिछले दिनों शासन स्तर से बेवजह सीटी स्कैन न कराने को लेकर भी निर्देशित किया जा चुका है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस
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जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा निजी कंपनी से अनुबंध पर चल रही है। इसके बदले सरकार निजी कंपनी को भुगतान करती है। सेवा दे रही कंपनी ने सिर, छाती, पेट या अन्य अंग के सीटी स्कैन के दरें अनुबंध के आधार पर तय कर रखी हैं। हर सीटी स्कैन पर सरकार को औसतन 1700 रुपये निजी कंपनी को भुगतान करने पड़ते हैं। जिला अस्पताल के सीटी स्कैन विभाग में प्रतिदिन औसतन 40 से 50 सीटी स्कैन हो रहे हैं। औसतन हर महीने यहां करीब 1500 सीटी स्कैन हो जाते हैं।
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जिला अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इस बात को खुद स्वीकार करते हैं कि महीने में कुल होने वाले सीटी स्कैन में बमुश्किल 12 से 15 फीसदी ही ऐसे होते हैं जिसमें रोगी की जांच के लिए जरूरत होती है। बाकी तो बस सिफारिश पर होता है।
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शासन स्तर से जताई जा चुकी है नाराजगी
जिला अस्पताल में अंधाधुंध सीटी स्कैन को लेकर पिछले महीने शासन स्तर से भी नाराजगी जताई जा चुकी है। सीएमएस को निर्देशित किया गया था कि अनावश्यक सीटी स्कैन न कराए जाएं, इसके बाद सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने कुछ सख्ती भी की, लेकिन यह सख्ती काम नहीं आई। सख्ती के बावजूद महीने में 800-900 से बढ़कर सीटी स्कैन का आंकड़ा अब 1400-1500 तक पहुंच गया है। दरअसल, ओपीडी में कुछ डॉक्टर भी ऐसे हैं जो बेवजह सीटी स्कैन का सुझाव दे रहे हैं। इसका खामियाजा ऐसे रोगियों को भुगतना पड़ रहा है जिनको जांच के लिए वास्तव में सीटी स्कैन की जरूरत होती है।
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इलाज निजी और सीटी स्कैन जिला अस्पताल में
जिला अस्पताल में सीटी स्कैन समेत अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे और अन्य जांचें कराने वाले रोगियों में ऐसे रोगी भी हैं जो निजी नर्सिंगहोम में इलाज कराते हैं, लेकिन जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। एक रुपये का पर्चा बनवा कर यहां वह मुफ्त जांच करा लेते हैं। शनिवार को सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने ऐसे दो मामले पकड़े थे। एक रोगी के कुछ तीमारदार रोगी का सीटी स्कैन कराने पहुंचे थे। ओपीडी में डॉक्टर ने सीटी स्कैन का सुझाव दे दिया। रोगी के तीमारदार यह पर्चा लेकर सीएमएस के हस्ताक्षर कराने पहुंचे। सीएमएस ने रोगी के इलाज के बारे में पूछा तो तीमारदारों ने बताया कि इलाज निजी अस्पताल में करा रहे हैं। इस तरह का एक अन्य मामला भी सामने आया, जब रोगी का इलाज प्राइवेट अस्पताल में हो रहा था। दोनों ही मामलों में सीएमएस ने नाराजगी जताई। दरअसल, बाजार में सीटी स्कैन समेत अन्य जांचें काफी महंगी हैं जबकि जिला अस्पताल में यह मुफ्त हो रहीं हैं।
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यह बात सही है कि अस्पताल में जरूरत से ज्यादा सीटी स्कैन हो रहे हैं। कई ऐसे मामले भी पकड़ में आते हैं कि रोगी इलाज निजी अस्पताल में कराते हैं, लेकिन सीटी स्कैन कराने अस्पताल आ जाते हैं। कई बार माननीयों की सिफारिश पर भी सीटी स्कैन कराए जाते हैं। पिछले दिनों शासन स्तर से बेवजह सीटी स्कैन न कराने को लेकर भी निर्देशित किया जा चुका है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस