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नशा छोड़ना चाहते हैं तो पहुंचे राजकीय मेडिकल कॉलेज
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राजकीय मेडीकल कॉलेज में मानसिक रोगों के इलाज के लिए बनाया गया अनुभाग। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अब नशा छोड़ने के लिए भी परामर्श और उपचार दिया जाएगा। यहां मंगलवार और बृहस्पतिवार को विशेषज्ञ रोगियों को परामर्श देने के साथ उपचार भी देंगे। एक मशीन भी मंगाई गई है, जो मिर्गी के दौरों व अन्य मानसिक रोगों के इलाज में कारगर साबित होगी।
लत किसी भी चीज की हो बुरी है। लोग सोचते हैं कि पीड़ित शौक पूरा करने के लिए नशा कर रहा है, पर पीड़ित को पता होता है कि नशा करना उसकी मजबूरी बन चुका है। खासकर अफीम, चूरा पोस्ता व स्मैक की लत चाहने से भी नहीं छूटती। ऐसे में नशा न मिलने पर बुरा हाल हो जाता है। शरीर में भयंकर दर्द होता है। ऐसे लोगों को नशा छुड़ाने के लिए उपचार और परमार्श की जरूरत होती है।
डॉक्टरों का कहना है कि नशा पीड़ितों का उपचार संभव है। इसको लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज में नशा उन्मूलन ओपीडी खोली गई है। जहां पर मंगलवार और बृहस्पतिवार को मरीजों का इलाज किया जाएगा।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज प्राचार्य धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया नशा उन्मूल ओपीडी के अलावा जो लोग मिर्गी के दौरे, बेहोशी, दिमागी गांठ, नींद न आने से परेशान हैं वे भी कॉलेज में मौजूद इलेक्ट्रो इन्सेफलो ग्राम (ईईजी) तकनीक की मदद से अपनी जांच करा सकते हैं।उन्होंने बताया कि ईईजी एक तरह से दिमागी जांच है जो मशीन से की जाती है। इससे मस्तिष्क की गतिविधियों के आधार पर मानसिक अवस्था की सामान्य और असामान्य स्थिति का पता लगाया जाता है। संवाद
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लत किसी भी चीज की हो बुरी है। लोग सोचते हैं कि पीड़ित शौक पूरा करने के लिए नशा कर रहा है, पर पीड़ित को पता होता है कि नशा करना उसकी मजबूरी बन चुका है। खासकर अफीम, चूरा पोस्ता व स्मैक की लत चाहने से भी नहीं छूटती। ऐसे में नशा न मिलने पर बुरा हाल हो जाता है। शरीर में भयंकर दर्द होता है। ऐसे लोगों को नशा छुड़ाने के लिए उपचार और परमार्श की जरूरत होती है।
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डॉक्टरों का कहना है कि नशा पीड़ितों का उपचार संभव है। इसको लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज में नशा उन्मूलन ओपीडी खोली गई है। जहां पर मंगलवार और बृहस्पतिवार को मरीजों का इलाज किया जाएगा।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज प्राचार्य धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया नशा उन्मूल ओपीडी के अलावा जो लोग मिर्गी के दौरे, बेहोशी, दिमागी गांठ, नींद न आने से परेशान हैं वे भी कॉलेज में मौजूद इलेक्ट्रो इन्सेफलो ग्राम (ईईजी) तकनीक की मदद से अपनी जांच करा सकते हैं।उन्होंने बताया कि ईईजी एक तरह से दिमागी जांच है जो मशीन से की जाती है। इससे मस्तिष्क की गतिविधियों के आधार पर मानसिक अवस्था की सामान्य और असामान्य स्थिति का पता लगाया जाता है। संवाद