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ऑक्सीजन : जिले में पांच प्लांट, फिर भी बरेली की फर्म से आ रहे सिलिंडर
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जिला अस्पताल में स्थित ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिले में पांच प्लांट चालू होने के बाद भी ऑक्सीजन सप्लाई में खेल हो रहा है। जिला महिला अस्पताल इसे लेकर चर्चा में है। गौर करने वाली बात है कि जिला महिला अस्पताल के बराबर स्थित जिला अस्पताल में 1000 एलपीएम (एक हजार लीटर प्रति मिनट) ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता का प्लांट है, लेकिन मोटा बजट खर्च कर बरेली की एक फर्म से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाए जा रहे हैं। यही नहीं कई बार ऑक्सीजन सिलिंडर ला रहा वाहन जाम में फंसने से महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती नवजात की जान पर बन आती है।
जिला महिला अस्पताल स्थित एसएनसीयू में 11 बेड हैं। यहां नवजात को भर्ती करने और इलाज की व्यवस्था है। गंभीर नवजात को ऑक्सीजन पर रखा जाता है। सोमवार को एसएनसीयू में दस नवजात भर्ती थे। इनमें नौ को हालत गंभीर होने के कारण ऑक्सीजन पर रखा गया था। यहां ऑक्सीजन की सप्लाई बरेली के एक फर्म करती है। ऑक्सीजन का स्टॉक खत्म हो गया। नवजात को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन दी जा रही थी। शाम के वक्त बिजली गुल होने से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी बंद हो गए। डीजल न होने के कारण जनरेटर भी चालू नहीं हो सका। ऐसे में ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से नवजात की जान पर बन आई। कुछ की हालत बिगड़ गई। गनीमत रही कि कोई अनहोनी नहीं हुई।
गौर करने वाली बात यह है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक-एक हजार एलपीएम ऑक्सीजन उत्पादन के दो और जिला अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट है। इसके अलावा घटपुरी और रुदायन सीएचसी पर भी ऑक्सीजन प्लांट हैं। जिले में मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन खपत से कहीं ज्यादा है। इसके बाद भी जिला महिला अस्पताल प्रशासन मोटा बजट खर्च करके बरेली से ऑक्सीजन सिलिंडरों की सप्लाई मंगा रहा है। महिला अस्पताल प्रशासन ने एक बार भी मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल से ऑक्सीजन सप्लाई के लिए डिमांड तक नहीं की। इसको लेकर अब तमाम सवाल उठ रहे हैं।
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पहले से आ रही है बरेली से ऑक्सीजन सप्लाई
सीएमओ के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर तक ऑक्सीजन की सप्लाई बरेली से आती थी। दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण कई लोगों की जान भी चली गई। ऑक्सीजन की जरूरत पूरी करने के लिए अलीगढ़, काशीपुर की निजी फर्मों से भी ऑक्सीजन मंगानी पड़ी। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो और जिला अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट चालू हो गया। तब यहां बाहर से सप्लाई मंगाना बंद कर दी गई, लेकिन जिला महिला अस्पताल में अब भी ऑक्सीजन की सप्लाई बरेली से आती है।
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सीएमओ ने एसएनसीयू का निरीक्षण किया, सीएमएस ने 20 सिलिंडर मांगे
सोमवार को एसएनसीयू में ऑक्सीजन खत्म होने के बाद नौ नवजात की सांसों पर बन आई थी। प्रथम दृष्टया इसमें जिला महिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आई। इसके बाद बुधवार को सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने जिला महिला अस्पताल स्थित एसएनसीयू का निरीक्षण किया। सीएमएस डॉ. रेखा रानी से भी अव्यवस्थाओं को लेकर बात की। सीएमएस ने ताजा स्थिति के बारे में बताया। इसके साथ ही यह भी बताया कि स्टॉक की कमी न हो इसके लिए उन्होंने शासन से 20 ऑक्सीजन सिलिंडर मांगे हैं।
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हमारे पास भरपूर ऑक्सीजन, वह मांगें तो उपलब्ध कराने को तैयार
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम का कहना है कि उनके पास पर्याप्त मेडिकल ऑक्सीजन है। ऑक्सीजन प्लांट तो जरूरत पर चलाया जाता है। अस्पताल में 29 बड़े और 79 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। जिला महिला अस्पताल की ओर से कभी ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने या भरवाने की डिमांड ही नहीं की गई। अगर वहां से डिमांड आती है तो जनहित में ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने में उनको कोई समस्या नहीं थी।
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कितना चलता है पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर
2.7 किग्रा-2 घंटा 4 मिनट
3.4 किग्रा-3 घंटा 27 मिनट
4.9 किग्रा-5 घंटा 41 मिनट
13.5 किग्रा-14 घंटे 21 मिनट
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जिला महिला अस्पताल स्थित एसएनसीयू का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को देखा था। सीएमएस ने बताया कि डीजल के लिए बजट न होने के कारण जनरेटर चलाने में देरी हुई थी। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल प्रशासन से बात की जाएगी कि वहां से ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा सकती है या नहीं, व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा। - डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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जिला महिला अस्पताल स्थित एसएनसीयू में 11 बेड हैं। यहां नवजात को भर्ती करने और इलाज की व्यवस्था है। गंभीर नवजात को ऑक्सीजन पर रखा जाता है। सोमवार को एसएनसीयू में दस नवजात भर्ती थे। इनमें नौ को हालत गंभीर होने के कारण ऑक्सीजन पर रखा गया था। यहां ऑक्सीजन की सप्लाई बरेली के एक फर्म करती है। ऑक्सीजन का स्टॉक खत्म हो गया। नवजात को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से ऑक्सीजन दी जा रही थी। शाम के वक्त बिजली गुल होने से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी बंद हो गए। डीजल न होने के कारण जनरेटर भी चालू नहीं हो सका। ऐसे में ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से नवजात की जान पर बन आई। कुछ की हालत बिगड़ गई। गनीमत रही कि कोई अनहोनी नहीं हुई।
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गौर करने वाली बात यह है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक-एक हजार एलपीएम ऑक्सीजन उत्पादन के दो और जिला अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट है। इसके अलावा घटपुरी और रुदायन सीएचसी पर भी ऑक्सीजन प्लांट हैं। जिले में मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन खपत से कहीं ज्यादा है। इसके बाद भी जिला महिला अस्पताल प्रशासन मोटा बजट खर्च करके बरेली से ऑक्सीजन सिलिंडरों की सप्लाई मंगा रहा है। महिला अस्पताल प्रशासन ने एक बार भी मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल से ऑक्सीजन सप्लाई के लिए डिमांड तक नहीं की। इसको लेकर अब तमाम सवाल उठ रहे हैं।
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पहले से आ रही है बरेली से ऑक्सीजन सप्लाई
सीएमओ के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर तक ऑक्सीजन की सप्लाई बरेली से आती थी। दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण कई लोगों की जान भी चली गई। ऑक्सीजन की जरूरत पूरी करने के लिए अलीगढ़, काशीपुर की निजी फर्मों से भी ऑक्सीजन मंगानी पड़ी। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो और जिला अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट चालू हो गया। तब यहां बाहर से सप्लाई मंगाना बंद कर दी गई, लेकिन जिला महिला अस्पताल में अब भी ऑक्सीजन की सप्लाई बरेली से आती है।
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सीएमओ ने एसएनसीयू का निरीक्षण किया, सीएमएस ने 20 सिलिंडर मांगे
सोमवार को एसएनसीयू में ऑक्सीजन खत्म होने के बाद नौ नवजात की सांसों पर बन आई थी। प्रथम दृष्टया इसमें जिला महिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आई। इसके बाद बुधवार को सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने जिला महिला अस्पताल स्थित एसएनसीयू का निरीक्षण किया। सीएमएस डॉ. रेखा रानी से भी अव्यवस्थाओं को लेकर बात की। सीएमएस ने ताजा स्थिति के बारे में बताया। इसके साथ ही यह भी बताया कि स्टॉक की कमी न हो इसके लिए उन्होंने शासन से 20 ऑक्सीजन सिलिंडर मांगे हैं।
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हमारे पास भरपूर ऑक्सीजन, वह मांगें तो उपलब्ध कराने को तैयार
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम का कहना है कि उनके पास पर्याप्त मेडिकल ऑक्सीजन है। ऑक्सीजन प्लांट तो जरूरत पर चलाया जाता है। अस्पताल में 29 बड़े और 79 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। जिला महिला अस्पताल की ओर से कभी ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने या भरवाने की डिमांड ही नहीं की गई। अगर वहां से डिमांड आती है तो जनहित में ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने में उनको कोई समस्या नहीं थी।
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कितना चलता है पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर
2.7 किग्रा-2 घंटा 4 मिनट
3.4 किग्रा-3 घंटा 27 मिनट
4.9 किग्रा-5 घंटा 41 मिनट
13.5 किग्रा-14 घंटे 21 मिनट
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जिला महिला अस्पताल स्थित एसएनसीयू का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को देखा था। सीएमएस ने बताया कि डीजल के लिए बजट न होने के कारण जनरेटर चलाने में देरी हुई थी। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल प्रशासन से बात की जाएगी कि वहां से ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा सकती है या नहीं, व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा। - डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ