{"_id":"6213e7a10c9f4820b66bb4ae","slug":"health-badaun-news-bly476198715","type":"story","status":"publish","title_hn":"अव्यवस्था : ओपीडी में इतने उमड़े मरीज कि डॉक्टरों का पड़ गया टोटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अव्यवस्था : ओपीडी में इतने उमड़े मरीज कि डॉक्टरों का पड़ गया टोटा
विज्ञापन
जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं की बेहतरी के कितने भी दावे किए जाएं, लेकिन धरातल पर आए दिन हकीकत दिख ही जाती है। रविवार अवकाश के बाद सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी खुली तो यहां मरीजों की लंबी लाइन लग गई। डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ा। कई को तो बिना दवा लिए ही लौटना पड़ा।
इन दिनों बदलते मौसम में बीमारियां बढ़ने लगी हैं। इसके साथ लापरवाही के कारण सर्दी-जुकाम, बुखार और पेट संबंधी बीमारियां भी घेर रहीं हैं। दूर-दराज से लोग जिला अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। जिला अस्पताल में फिजीशियन, चेस्ट स्पेशलिस्ट न होने से लोगों को ज्यादा समस्या हो रही है। सोमवार को ओपीडी में 1200 से ज्यादा मरीज पहुंचे। ओपीडी में डॉक्टरों के केबिन के सामने मरीजों की लाइन लगी रहीं। डॉक्टर कम होने के कारण कई केबिन के ताले भी नहीं खुले। ऐसे में मरीजों को लाइन में लगकर परेशान होना पड़ा। कई बिना दवा लिए ही लौट गए। यहां बता दें कि सामान्य दिनों में यहां रोजाना 500 से 700 मरीज पहुंचते हैं।
दरअसल, जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। सामान्य दिनों में भी यहां समस्या होती है, लेकिन जब बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है और ओपीडी में सामान्य दिनों से ज्यादा संख्या में लोग पहुंचते हैं तो यहां डॉक्टरों की कमी के कारण अव्यवस्था साफ नजर आती है।
विज्ञापन
-
डेढ़ महीने बाद भी दो डॉक्टरों ने नहीं लिया कार्यभार
करीब डेढ़ महीने पहले शासन ने जिला अस्पताल में तीन डॉक्टरों की तैनाती की थी। इन डॉक्टरों को दूसरे जिलों से बदायूं जिला अस्पताल भेजा गया। नेत्र और हड्डी रोग विशेषज्ञ के साथ एक परामर्शदाता भी शामिल हैं। तीन डॉक्टरों में से दो ने अब तक ज्वाइन नहीं किया है। सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम का कहना है कि ज्वाइन न करने वाले डॉक्टरों के संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को लिख दिया गया है।
-
अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी, डॉक्टरों के 19 पद हैं रिक्त
कहने को तो जिला अस्पताल धीरे-धीरे आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहा है, लेकिन यहां विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 19 पद रिक्त चल रहे हैं। अस्पताल में 300 रोगियों को भर्ती करने की सुविधा है। इसके साथ ही ओपीडी में औसतन एक हजार से ज्यादा मरीज रोज आते हैं। बीमारियों के सीजन में रोगियों की संख्या 1500 तक प्रतिदिन पहुंच आती है। इस बीच सर्जन, फिजीशियन, डेंटल सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। यहां डॉक्टरों के 29 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती 10 पदों पर ही है। शासन स्तर तक कई बार लिखा-पढ़ी किए जाने के बाद भी डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। संविदा पर रखे गए कुछ डॉक्टरों से ही गंभीर बीमारियों वाले मरीज दिखवाए जा रहे हैं।
-
यह बोले-रोगी
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण अव्यवस्था हैं। ओपीडी में रोगियों की लंबी लाइन लग रही है। गिने-चुने डॉक्टर ही बैठे हैं। दूर-दराज से आने वाले रोगियों को ज्यादा समस्या हो रही है।
-दक्ष
-
शनिवार को भी दवा लेने आया था, लेकिन डॉक्टर नहीं मिल सके। आज सुबह आठ बजे से लाइन में लगा हूं। अब तक डॉक्टर नहीं आए हैं। कई रोगियों की हालत गंभीर भी है।
-जयपाल
-
जिला अस्पताल में सुविधाएं कम अव्यवस्थाएं ज्यादा हैं। ओपीडी में प्रबंधन नाम की चीज नहीं है। महिला-पुरुषों की अलग लाइन तक नहीं हैं। फिजीशियन न होने से ज्यादा समस्या है।
-नफीस कादरी
-
गुलड़िया स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में जिला अस्पताल आना पड़ा। यहां भी लाइन में लगे काफी देर हो चुकी है। पता लगा है कि डॉक्टरों की कमी के कारण यह समस्या हो रही है।
-रवि पटेल
-
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। जो भी डॉक्टर हैं उनके सहारे हरसंभव कोशिश की जा रही है कि आने वाले रोगियों को बेहतर इलाज मिले। पिछले महीने तीन डॉक्टरों को यहां भेजा गया था। इनमें दो ने अब तक ज्वाइन ही नहीं किया है। डॉक्टरों के 19 पद अब भी रिक्त हैं। इस कारण समस्या हो रही है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस
विज्ञापन
इन दिनों बदलते मौसम में बीमारियां बढ़ने लगी हैं। इसके साथ लापरवाही के कारण सर्दी-जुकाम, बुखार और पेट संबंधी बीमारियां भी घेर रहीं हैं। दूर-दराज से लोग जिला अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। जिला अस्पताल में फिजीशियन, चेस्ट स्पेशलिस्ट न होने से लोगों को ज्यादा समस्या हो रही है। सोमवार को ओपीडी में 1200 से ज्यादा मरीज पहुंचे। ओपीडी में डॉक्टरों के केबिन के सामने मरीजों की लाइन लगी रहीं। डॉक्टर कम होने के कारण कई केबिन के ताले भी नहीं खुले। ऐसे में मरीजों को लाइन में लगकर परेशान होना पड़ा। कई बिना दवा लिए ही लौट गए। यहां बता दें कि सामान्य दिनों में यहां रोजाना 500 से 700 मरीज पहुंचते हैं।
विज्ञापन
दरअसल, जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। सामान्य दिनों में भी यहां समस्या होती है, लेकिन जब बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है और ओपीडी में सामान्य दिनों से ज्यादा संख्या में लोग पहुंचते हैं तो यहां डॉक्टरों की कमी के कारण अव्यवस्था साफ नजर आती है।
विज्ञापन
-
डेढ़ महीने बाद भी दो डॉक्टरों ने नहीं लिया कार्यभार
करीब डेढ़ महीने पहले शासन ने जिला अस्पताल में तीन डॉक्टरों की तैनाती की थी। इन डॉक्टरों को दूसरे जिलों से बदायूं जिला अस्पताल भेजा गया। नेत्र और हड्डी रोग विशेषज्ञ के साथ एक परामर्शदाता भी शामिल हैं। तीन डॉक्टरों में से दो ने अब तक ज्वाइन नहीं किया है। सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम का कहना है कि ज्वाइन न करने वाले डॉक्टरों के संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को लिख दिया गया है।
-
अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी, डॉक्टरों के 19 पद हैं रिक्त
कहने को तो जिला अस्पताल धीरे-धीरे आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहा है, लेकिन यहां विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 19 पद रिक्त चल रहे हैं। अस्पताल में 300 रोगियों को भर्ती करने की सुविधा है। इसके साथ ही ओपीडी में औसतन एक हजार से ज्यादा मरीज रोज आते हैं। बीमारियों के सीजन में रोगियों की संख्या 1500 तक प्रतिदिन पहुंच आती है। इस बीच सर्जन, फिजीशियन, डेंटल सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। यहां डॉक्टरों के 29 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती 10 पदों पर ही है। शासन स्तर तक कई बार लिखा-पढ़ी किए जाने के बाद भी डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। संविदा पर रखे गए कुछ डॉक्टरों से ही गंभीर बीमारियों वाले मरीज दिखवाए जा रहे हैं।
-
यह बोले-रोगी
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण अव्यवस्था हैं। ओपीडी में रोगियों की लंबी लाइन लग रही है। गिने-चुने डॉक्टर ही बैठे हैं। दूर-दराज से आने वाले रोगियों को ज्यादा समस्या हो रही है।
-दक्ष
-
शनिवार को भी दवा लेने आया था, लेकिन डॉक्टर नहीं मिल सके। आज सुबह आठ बजे से लाइन में लगा हूं। अब तक डॉक्टर नहीं आए हैं। कई रोगियों की हालत गंभीर भी है।
-जयपाल
-
जिला अस्पताल में सुविधाएं कम अव्यवस्थाएं ज्यादा हैं। ओपीडी में प्रबंधन नाम की चीज नहीं है। महिला-पुरुषों की अलग लाइन तक नहीं हैं। फिजीशियन न होने से ज्यादा समस्या है।
-नफीस कादरी
-
गुलड़िया स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में जिला अस्पताल आना पड़ा। यहां भी लाइन में लगे काफी देर हो चुकी है। पता लगा है कि डॉक्टरों की कमी के कारण यह समस्या हो रही है।
-रवि पटेल
-
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। जो भी डॉक्टर हैं उनके सहारे हरसंभव कोशिश की जा रही है कि आने वाले रोगियों को बेहतर इलाज मिले। पिछले महीने तीन डॉक्टरों को यहां भेजा गया था। इनमें दो ने अब तक ज्वाइन ही नहीं किया है। डॉक्टरों के 19 पद अब भी रिक्त हैं। इस कारण समस्या हो रही है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस