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महिला अस्पताल के एसएनसीयू में बढ़ेंगी सुविधाएं

Sat, 19 Feb 2022 12:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 19 Feb 2022 12:53 AM IST
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Health
बदायूं। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू को और आधुनिक बनाने की तैयारियां चल रहीं हैं। इस संबंध में कई आधुनिक मशीनों को लगाने के लिए मांग पत्र भेजा है। इन मशीनों के आने से प्री मैच्योर नवजात को हायर सेंटर रेफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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महिला अस्पताल के एसएनसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई) में फिलहाल 13 वॉर्मर लगे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप वार्ष्णेय बताते हैं कि एसएनसीयू में नवजात को भर्ती करने की सुविधा तो है लेकिन जिन प्री मैच्योर नवजात को सांस लेने में दिक्कत होती है उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। इसके लिए एसएनसीयू में चार सीपैप मशीन, एक एवीजी एनालाइजर, एक पोट्रेविल एक्स-रे मशीन और छह नए वॉर्मर लगाने के लिए मांग पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही ये मशीनें उपलब्ध हो जाएंगी। इसके बाद प्री मैच्योर बच्चों को (अविकसित फेफड़े वाले बच्चे) हायर सेंटर रेफर नहीं किए जाएंगे।
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प्री मैच्योर बच्चों को ये होती हैं दिक्कत
प्री मैच्योर बच्चों में तापमान सहने की क्षमता नहीं होती है। इससे वह हाइपोथरमिया या हाइपोग्लेसिमिया के शिकार हो सकते हैं। इन बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। इनके फेफड़े पूरी तरह से काम नहीं करते। ये सामान्य नवजात की अपेक्षा ज्यादा कमजोर होते हैं।
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अस्पताल के केजीएमसी को मिला प्रदेश में तीसरा स्थान
- महिला अस्पताल के एमएनसीयू (मैटर्नल एंड न्यूनेटल) में एसएनसीयू के अलावा केजीएमसी (कंगारू मदर केयर) भी है। जहां प्रसूताओं के साथ नवजात को रखा जाता है। मां नवजात को अपने सीने से लगाकर रखती हैं। इससे उन्हें गर्मी मिलती रहती है। अस्पताल के केजीएमसी को शुक्रवार को प्रदेश में तीसरा स्थान मिला।

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महिला अस्पताल ने जीता कायाकल्प अवॉर्ड
महिला अस्पताल को एक दिन पहले कायाकल्प अवॉर्ड मिला। इस आशय की जानकारी देते हुए डॉ. संदीप वार्ष्णेय ने बताया कि डेढ़ माह पूर्व प्रदेश स्तर की टीम ने महिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उसके बाद पुरस्कार की घोषणा हुई। इसके तहत तीन लाख रुपये अस्पताल को मिलेंगे। यहां बता दें कि अस्पताल को पिछले साल भी कायाकल्प अवॉर्ड मिला था। संवाद
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